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'भारत-ब्रिटेन FTA को रोकने का पूरा प्रयास किया', UK की पूर्व मंत्री ने बताई वजह

India-UK FTA Controversy: ब्रिटेन में चल रही राजनीतिक घटनाओं के बीच, पूर्व व्यापार और वाणिज्य सचिव केमी बेडेनोच ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर अधिक वीजा की मांग को देखते हुए उन्होंने इस समझौते को रोकने का प्रयास किया था।

केमी बेडेनोच , जो कंजर्वेटिव पार्टी के प्रमुख और विपक्षी नेता के रूप में ऋषि सुनक की जगह लेने की दौड़ में सबसे आगे हैं, ने बताया कि भारत सरकार प्रवासन (migration) पर अधिक रियायतें चाह रही थी, जिसे उन्होंने व्यापार सचिव के रूप में अस्वीकार कर दिया था।

India-UK FTA Controversy

भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता (FTA) पर विवाद
बेडेनोच का कहना है कि जब वह ब्रिटेन में आप्रवासन को नियंत्रित करने के प्रयास कर रही थीं, तब भारत FTA पर दबाव बना रहा था। उनका कहना है कि भारतीय पक्ष इस समझौते के जरिए अधिक प्रवासन की कोशिश कर रहा था, जिसे उन्होंने रोक दिया। हालाँकि, उनके कुछ पूर्व सहयोगियों ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं। कुछ का कहना है कि बेडेनोच खुद इस सौदे के लिए बहुत प्रयासरत थीं और इसके पक्ष में कई दौर की वार्ताओं की निगरानी कर रही थीं।

टोरी सरकार और भारतीय प्रवासन मुद्दा
टोरी पार्टी के एक पूर्व मंत्री ने 'द टाइम्स' को बताया कि बेडेनोच हर हाल में एक व्यापारिक सौदा करना चाहती थीं, लेकिन वह प्रवासन के मुद्दे पर रियायतें देने के लिए तैयार नहीं थीं। एक अन्य पूर्व कैबिनेट मंत्री ने कहा कि बेडेनोच ब्रेक्सिट के बाद ब्रिटेन को लाभ दिखाने के लिए एक 'ट्रॉफी' चाहती थीं और इसके लिए उन्हें उत्साह था।

उन्होंने कहा कि भारतीयों के साथ संबंध अच्छे बनाए रखने के लिए यह सौदा जरूरी था, लेकिन भारतीय पक्ष की स्थिति मजबूत थी और वे व्यापार समझौते में ज्यादा उत्सुक नहीं थे। ब्रिटेन के वार्ताकार हमेशा कमजोर स्थिति से शुरुआत कर रहे थे क्योंकि भारतीय पक्ष के पास सौदेबाजी की अधिक शक्ति थी।

केमी बेडेनोच का बचाव
बेडेनोच के एक करीबी सूत्र ने इस दावे को खारिज किया कि वह किसी भी कीमत पर समझौता करना चाहती थीं। सूत्र ने कहा कि बेडेनोच किसी भी तरह से ब्रिटेन के आव्रजन नियमों में बदलाव करने के पक्ष में नहीं थीं। उनके अनुसार, भारत सरकार ने इसलिए समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि भविष्य में लेबर पार्टी के तहत वे बेहतर शर्तों पर समझौता कर सकते हैं।

सूत्र ने यह भी बताया कि बेडेनोच ने कभी भी वीजा मुद्दे पर बातचीत नहीं की और उन्होंने अपने अधिकारियों को श्रम बाजार तक पहुंच की अनुमति नहीं दी। उनका मानना था कि इस सौदे से ब्रिटेन के आव्रजन नियम प्रभावित नहीं होने चाहिए।

लेबर पार्टी की अगली चाल
भारत से मिली रिपोर्ट्स के अनुसार, लेबर पार्टी के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के नेतृत्व में भारत-यूके FTA वार्ता अगले महीने फिर से शुरू होने की संभावना है। हालाँकि, ब्रिटेन के अधिकारी अभी तक इस समझौते के लिए कोई समयसीमा तय नहीं कर रहे हैं। 10 डाउनिंग स्ट्रीट के एक प्रवक्ता ने कहा कि लेबर सरकार जल्द से जल्द भारत के साथ व्यापार समझौते को सुरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है और बातचीत फिर से शुरू करने का इरादा रखती है।

ब्रिटेन में कंजर्वेटिव पार्टी के नेतृत्व की दौड़ और भारत-यूके FTA पर बहस के बीच यह स्पष्ट हो रहा है कि आव्रजन और व्यापारिक समझौते प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। बेडेनोच और उनके प्रतिद्वंद्वी रॉबर्ट जेनरिक के बीच आव्रजन एक बड़ा केंद्र बिंदु बनता जा रहा है। कंजर्वेटिव पार्टी के लगभग 140,000 सदस्य अगले नेता का चुनाव करेंगे, और ऋषि सुनक के इस्तीफे के बाद 2 नवंबर को उनके उत्तराधिकारी की घोषणा की जाएगी।

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