UP, पंजाब, हरियाणा के छात्रों पर ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ने लगाया बैन, स्टूडेंट वीजा के नाम पर ये फ्रॉड
2022 में कई भारतीय छात्रों ने ऑस्ट्रिलिया की यूनिवर्सिटी में दाखिले कराए, लेकिन पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। यूनिवर्सिटी ने बताया कि ऐसा करने वालों में ज्यादातर स्टूडेंट्स पंजाब, गुजरात और हरियाणा से हैं।

ऑस्ट्रेलिया की 2 और यूनिवर्सिटी ने भारत के 4 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के छात्रों के एडमिशन पर बैन लगा दिया है। इसकी वजह स्टूडेंट वीजा का गलत इस्तेमाल करना बताया गया है।
ऑस्ट्रेलियन न्यूज पेपर सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में विक्टोरिया की फेडरेशन यूनिवर्सिटी और न्यू साउथ वेल्स में वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी ने पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के छात्रों का दाखिला देने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इन राज्यों के छात्रों पर लगा बैन जून तक जारी रहेगा।
इससे पहले अप्रैल महीने में ऑस्ट्रेलिया के 4 विश्वविद्यालय जिनमें विक्टोरिया विश्वविद्यालय, एडिथ कोवान विश्वविद्यालय, टॉरेंस विश्वविद्यालय, और दक्षिणी क्रॉस विश्वविद्यालय शामिल हैं, ने भारतीय छात्रों के दाखिले पर रोक लगा दिया था।
इन विश्वविद्यालयों ने भारतीय छात्रों पर आरोप लगाए थे कि वे छात्र वीजा का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका आरोप था कि लोग स्टूडेंट वीजा लेकर पढ़ने की बजाय नौकरी के लिए यहां आ रहे हैं।
ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों में भारतीय आवेदकों के लिए रिजेक्शन रेट एक दशक में अपने उच्चतम स्तर तक बढ़ गया है। वर्तमान में ये 24.3 फीसदी हो गया है। यानि कि इन राज्यों में 4 में से 1 मामले धोखाधड़ी के आ रहे हैं, जो कि पिछले 13 सालों में सबसे अधिक है।
वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी ने बताया कि 2022 में कई भारतीय छात्रों ने उनकी यूनिवर्सिटी में दाखिला कराया था लेकिन कई छात्र कॉलेज नहीं आ रहे। उन्होंने देश में रोजगार ढूंढ़ लिया है। यूनिवर्सिटी के मुताबिक ऐसा करने वाले अधिकांश छात्र पंजाब, गुजरात और हरियाणा जैसे राज्यों से हैं।
शिक्षा विभाग ने कहा कि वहइन क्षेत्रों से विश्वविद्यालय में दाखिला लेने वाले गैर-वास्तविक छात्रों के मुद्दे को हल करने के लिए अतिरिक्त उपाय करेगा। इसमें आवेदन स्क्रीनिंग में बदलाव, सख्त प्रवेश व्यवस्था और प्रारंभिक शुल्क में वृद्धि आदि तरीके अपनाए जाएंगे।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2022 में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने विदेश स्टूडेंट्स के काम करने की पॉलिसी में अहम बदलाव किया था। इसमें ऑस्ट्रेलिया में पढ़ने जाने वाले विदेशी छात्रों के काम करने पर लगी लिमिट को हटा दिया गया था, जिसके बाद से स्टूडेंट वीजा की मांग और तेज हुई।












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