Turkiye Defence Aid to Pak: तुर्किये का दोगलापन! भूकंप में भारत मदद भुलाकर पाक से साथ खड़े हुए एर्दोगन

Turkiye Defence Aid to Pak: जम्मी-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को तुर्किये द्वारा हाल ही में दिया गया सैन्य समर्थन भारत के लिए अच्छा नहीं है। पाकिस्तान के सैन्य हवाई अड्डों पर छह सी-130 विमानों सहित तुर्किये के सैन्य सामग्री का भेजा जाना तुर्किये-पाकिस्तान-चीन के गठबंधन को साउथ एशिया में मिलती बढ़त को दिखाती है। यह नया गठबंधन उस इलाके में जियो पॉलिटिक्स को बदल सकता है, खासकर भारत के साथ तनाव बढ़ने के साथ, इसका इस्तेमाल भारत के हितों के खिलाफ जा सकता है।

तुर्किये एयरफोर्स हथियार लेकर पहुंची पाकिस्तान!

रविवार को तुर्किये एयरफोर्स का सी-130 हरक्यूलिस विमान तमाम युद्ध सामग्री लेकर कराची पहुंचा। इसी समय, छह और तुर्किये सैन्य विमान इस्लामाबाद में एक सैन्य अड्डे पर उतरे। हालांकि इन विमानों में किस स्तर की सैन्य सामग्री लाई गई है इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है, लेकिन ये डिलीवरी पाकिस्तान की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए तुर्किये के कदम दिखाती हैं। अपनी सीमाओं पर बढ़ते तनाव के बीच, यह सहायता पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण समय पर आई है।

Turkiye Defence Aid to Pak

भारत के खिलाफ एकजुट हो रहे पाक, तुर्किये और चीन

तुर्किये का यह कदम चीन द्वारा पाकिस्तान को ड्रोन सहित सैन्य सहायता देने के बाद उठाया गया है। साथ में, ये सभी कार्य भारत के क्षेत्रीय प्रभाव को संतुलित करने के उद्देश्य से एक रणनीतिक फैसले की ओर इशारा करते हैं। एक्सपर्ट्स की माने तो चीन-तुर्किये-पाकिस्तान का ट्राइंगल भारत के खिलाफ तेजी से ऊपर आ रहा है। यह बढ़ता रक्षा संबंध भविष्य के लिए चिंताएँ पैदा करता है, खासकर, कश्मीर और अफ़गानिस्तान-पाकिस्तान के बीच चल रही जंग को देखते हुए।

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भारत के खिलाफ पाक के लड़ाकू विमान तैयार!

पाकिस्तान एयरफोर्स (PAF) ने पेशावर, स्कार्दू और स्वात जैसे रणनीतिक हवाई ठिकानों को सक्रिय करके बढ़ते क्षेत्रीय खतरों का जवाब दिया है। एफ-16, जे-10 और जेएफ-17 जैसे लड़ाकू विमान अब वहां तैनात हैं, साथ ही लड़ाकू हवाई गश्त पहले से ही चालू हैं। जिन पाठकों को नहीं पता उन्हें बता दें कि स्कार्दू एयरबेस को पाकिस्तान के एयर डिफेंस और निगरानी गतिविधियों के लिए एक महत्वपूर्ण सैन्य बेस के रूप में जाना जाता है।

तुर्किये की भागीदार भारत के लिए 'रेड फ्लेग'

नई दिल्ली को उभरते चीन-तुर्किये-पाकिस्तान गुट के जवाब में अपनी सुरक्षा रणनीतियों का दोबारा बनाना चाहिए। इस्लामाबाद द्वारा अपने ग्लोबल डिफेंस रिलेशन्स को मजबूत करने के साथ ही क्षेत्रीय कूटनीति को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। तुर्किये की बढ़ती भागीदारी दक्षिण एशिया को और ज्यादा सैन्य तनाव और सेना की मौजूदगी को बढ़ावा दे सकती है, जिससे पहले से ही अस्थिर क्षेत्र में शांति स्थापना की कोशिशें और जटिल हो सकती हैं।

डिफेंस एक्सपर्ट की भारत को क्या सलाह?

डिफेंस एक्सपर्ट सुशांत सरीन ने हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले के मद्देनजर भारत की कूटनीतिक रणनीति पर अपनी चिंता जाहिर की है, जिसमें उन्होंने चीन, तुर्किये और अजरबैजान जैसे देशों से पाकिस्तान को मिल रहे समर्थन को टारगेट करने में देश की विफलता की ओर इशारा किया है। सरीन ने इस बात पर जोर दिया कि ये देश खुलेआम पाकिस्तान का समर्थन कर रहे हैं, फिर भी भारत उनके साथ व्यापार और रक्षा में जुड़ा हुआ है, और उनके कामों के लिए उन पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। डिफेंस एक्सपर्ट ने उन्होंने सोशल मीडिया पर दुख जताते हुए कहा, "भारत के दोस्त और दुश्मन खुद को पहचान रहे हैं। चीन, तुर्किये, अजरबैजान स्पष्ट रूप से पाकिस्तान की तरफ हैं। आदर्श रूप से, ऐसा करने के लिए कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन भारत उन्हें बड़े व्यापार सौदों और डिफेंस डील से पुरस्कृत करेगा। इजरायल शायद भारत के साथ एकमात्र देश है। हर दूसरे देश - अमेरिका, यूरोपियन यूनियन, ब्रिटेन, यहां तक ​​कि रूस भी बचाव कर रहे हैं। लेकिन हां वसुधैव कुटुम्बकम के मूल रूप से हम ऐसे लोग हैं जो इतिहास से सीखने से इनकार करते हैं।"

भूकंप में भारत ने की थी तुर्किये की मदद

जब साल 2023 में तुर्किये में भूकंप के जवाब में, भारत ने तुरंत 'ऑपरेशन दोस्त' शुरू किया, जिसमें तुर्किये में खोज और बचाव दल से लैस भारतीय वायुसेना के सी-17 विमान को तैनात किया गया। इस ऑपरेशन में 250 से अधिक कर्मियों को भेजा गया, जिसमें एनडीआरएफ के 150 से अधिक सदस्य कुत्तों, डिटेक्शन गियर और बचाव कार्यों के लिए आवश्यक सामग्री के साथ शामिल थे। इसके अलावा, भारतीय सेना द्वारा एक 30-बेड वाला फील्ड अस्पताल स्थापित किया गया, जिसमें एक ऑपरेशन थियेटर, एक्स-रे और वेंटिलेटर की सुविधा थी, जिसमें 99 पारामेडीकल स्टाफ था। इसके लिए भारत ने पांच सी-17 विमानों के माध्यम से 135 टन से अधिक राहत सामग्री भी भेजी थी। लेकिन तुर्किये ने ऐसे वक्त में पाकिस्तान का खुलकर समर्थन कर खुद को पूरी दुनिया के सामने शक के घेरे में डाला है। तुर्किये ने ये जानते हुए भी पाकिस्तान को मदद भेजी कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले में पाकिस्तान का हाथ है।

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