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हिजाब के खिलाफ शुरू हुआ पूरी दुनिया में बवाल, अब तुर्की की प्रसिद्ध सिंगर ने स्टेज पर काटे बाल

पुलिस हिरासत में कुर्द महिला महसा अमीनी की मौत के बाद भड़की हिंसा में अब तक 75 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं।
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तेहरान/अंकारा, सितंबर 28: ईरान में 22 साल की महसा अमीनी की हिजाब सही से नहीं पहनने की वजह से मारे जाने के बाद एंटी-हिजाब आंदोलन पूरी दुनिया में फैल रहा है और अरब देशों की महिलाओं ने भी अब हिजाब की अनिवार्यता के खिलाफ लिखना शुरू कर दिया है, वहीं अब तुर्की की प्रसिद्ध सिंगर मेलेक मोसो ने परफॉर्मेंस देते हुए महसा अमीनी के समर्थन में और हिजाब के विरोध में अपने बाल काट दिए हैं। उनका स्टेज पर बाल काटने का वीडियो पूरी दुनिया में वायरल हो रहा है।

मेलेक मोसो ने काटे बाल

मेलेक मोसो ने काटे बाल

तुर्की की सिंगर मेलेक मोसो ईरान में हिजाब विरोधी प्रदर्शनों में शामिल हो गई हैं और उन्होंने ईरानी महिलाओं के प्रदर्शन को अपना समर्थन देते हुए अपने बाल स्टेज पर काट लिए हैं। सोशल मीडिया पर उनका बाल काटने का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो एक कैंची से अपना बाल काटते हुए देखी जा रही हैं। इससे पहले भी वो ट्वीटर पर महसा अमीनी की मौत का विरोध करते हुए ईरानी महिलाओं के साथ एकजुटता का प्रदर्शन कर चुकी हैं। महसा अमीनी की मौत का पूरे ईरान में विरोध प्रजर्शन किया जा रहा है और अब ये विरोध प्रदर्शन सत्ता परिवर्तन की मांग कर रहा है। ईरानी महिलाएं देश की कट्टर इस्लामिक शासन को उखाड़ फेंकने की मांग कर रहीं हैं और अपने लिए पूरी आजादी और हक की मांग कर रही हैं। वहीं, ईरान की कट्टर इस्लामिक सरकार इस प्रदर्शन को कुचलने की हर संभव कोशिश कर रही है और अभी तक 75 से ज्यादा प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं। महिलाओं का ये प्रदर्शन ईरान की गांवों तक भी पहुंच चुका है और सबसे खास बात ये है, कि देश की युवा आबादी इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही है, लिहाजा कट्टर रायसी सरकार के हाथ-पांव फूले हुए हैं।

हिजाब पहनने पर सख्त कानून

ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले भी हिजाब ईरान में प्रचलित था, लेकिन हिजाब पहनने की अनिवार्यता नहीं थी और महिलाएं अपनी मर्जी के मुताबिक, किसी पर्व त्योहार पर हिजाब पहनती थीं। लेकिन, सार्वजनिक जगहों पर ईरानी महिलाएं पश्चिमी देशों की महिलाओं के मुताबिक ही जीवन जीती थीं। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, 1979 से पहले ईरान की महिलाएं सार्वजनिक रूप से तंग-फिटिंग जींस, कपड़े, मिनीस्कर्ट्स और शॉर्ट-स्लीव टॉप सहित पश्चिमी शैली के कपड़े पहन सकती हैं। महिलाएं पुरूषों की तरह ही हेयर कटिंग सैलून में जाती थीं, लेकिन इस्लामिक क्रांति के बाद सैलून में महिलाओं का दिखना बंद हो गया और फिर महिलाओं को घर से निकलते ही अपने सिर को पूरी तरह से ढंकने का नियम बना दिया गया और काफी सख्ती के साथ इस नियम का पालन करवाया जाने लगा। अब ईरान में सात साल की उम्र की ऊपर की सभी महिलाओं के लिए हिजाब पहनना अनिवार्य है और ऐसा नहीं करने पर उन्हें मोरल पुलिस गिरफ्तार कर लेती है और फिर उन्हें प्रताड़ित किया जाता है।

अब तक 75 से ज्यादा लोगों की मौत

अब तक 75 से ज्यादा लोगों की मौत

वहीं, पुलिस हिरासत में कुर्द महिला महसा अमीनी की मौत के बाद भड़की हिंसा में अब तक 75 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। अधिकारियों ने बताया कि देश में प्रदर्शन से उत्पन्न अशांति के खिलाफ ईरानी अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों पर बल का प्रयोग किया ,जिसमें 75 से अधिक लोगों की मौत हो गई। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने आधिकारिक मौत का आंकड़ा 41 बताया है। इस हिंसक प्रदर्शन में मरने वालों में सुरक्षा बलों के सदस्य भी शामिल हैं। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली ख़ामेनेई के तीन दशक से अधिक के शासन को समाप्त करने का आह्वान किया। ईरानी महिलाएं अपने हिजाब जला रही हैं और बाल काट कर विरोध जता रही हैं। वह हिजाब कानून का विरोध कर रही हैं। अमेरिका ने महिलाओं के इस विरोध प्रदर्शन में साथ देने का वादा किया है।

इस्लामिक शासन के खिलाफ प्रदर्शन

इस्लामिक शासन के खिलाफ प्रदर्शन

हिजाब के खिलाफ यह विरोध प्रदर्शन कितना उग्र होता चला जा रहा है। प्रदर्शन के क्रम में तेहरान की भीड़ ने तानाशाह की मौत के नारे लगाए और 83 साल के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली ख़ामेनेई के तीन दशक से अधिक के शासन को समाप्त करने का आह्वान किया है। वहीं, ईरानी सरकार की बर्बर कार्रवाई की विश्व में निंदा हो रही है। अमेरिका के बाद अन्य पश्चिमी देशों ने इस कार्रवाई की घोर निंदा की है। जर्मनी ने ईरानी राजदूत को बुलाकर फटकार लगाई तो कनाडा ने ईरान पर नये प्रतिबंधों की घोषणा की है। वहीं, यूरोपीय संघ ने भी ईरान के वर्तमान हालात की निंदा की। जबकि, तेहरान ने ब्रिटिश औरनॉर्वेजियन दूतों को तलब किया। इस पूरे मामले को लेकर पश्चिमी देशों के साथ ईरान का तनाव बढ़ता दिख रहा है।

कौन हैं तुर्की की सिंगर मेलेक मोसो

कौन हैं तुर्की की सिंगर मेलेक मोसो

मेलेक मोसो तुर्की की प्रसिद्ध पॉप सिंगर हैं, जिनका जन्म 11 नवंबर 1988 को तुर्की में हुआ था। वो एक पॉप-रॉक सिंगर हैं, जिन्होंने तुर्की में "केक्लिक गिबी" जैसे हिट सॉंग्स दिए हैं और उन्होंने कई इंटरनेशनल कलाकारों के साथ काम किया है। वो तुर्की की एक बड़ी स्टार मानी जाती हैं और उन्हें स्टारडम हासिल है। वह तुर्की टेलीविजन सीरिज सुकुर में अपने गीत गाने के लिए भी प्रसिद्ध हैं। उन्होंने अपना पहला गाना सिर्फ 7 साल की उम्र में ही लिखा था और उनके कार्यक्रम में लोगों की काफी भीड़ रहती है।

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English summary
Anti-Hibaz demonstrations in Iran are being supported by the whole world and the Turkish singer has cut her hair on stage as a show of solidarity.
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