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अटैक हेलीकॉप्टर, स्टील्थ ड्रोन, फाइटर जेट, मिनी सबमरीन... हथियार बाजार में तुर्की की धमाकेदार एंट्री

तुर्की के ड्रोन ने अजरबैजान-आर्मीनिया जंग में काफी अहम भूमिका निभाई है। नाटो का सदस्य रहने की वजह से तुर्की को अमेरिकी टेक्नोलॉजी से फायदा उठाने का काफी मौका मिला है।

Turkey Weapon Market

Turkey Weapon Market: तुर्की एयरोस्पेस (TA) और टर्किश डिफेंस इंडस्ट्री एजेंसी ने T929 ATAK 2 हैवी अटैक हेलीकॉप्टर का अनावरण कर दिया है, जिसने ग्लोबल डिफेंस मार्केट में तूफान ला दिया है।

Janes की रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्की अपने पुराने T129 हेलीकॉप्टर के साथ अपने इस नये T929 हेलीकॉप्टर को बदलना चाहता है। T929 को तुर्की सशस्त्र बलों के इस्तेमाल के साथ साथ आने वाले वक्त में इसे बेचने के लिहाज से भी डिजाइन किया गया है। यानि, भविष्य में कई और देश तुर्की के T929 ATAK 2 हैवी अटैक हेलीकॉप्टर को खरीद सकते हैं।

जेन्स की रिपोर्ट में कहा गया है, कि T929 एक स्टेप्ड टेंडेम कॉकपिट, स्टब विंग्स और फिक्स्ड-टेलव्हील-टाइप लैंडिंग गियर के साथ काफी खतरनाक अटैक हेलीकॉप्टर बनता है, जिसमें काफी ताकत होगा।

हेलीकॉप्टर में खतरनाक मारक क्षमताएं

जेन्स का कहना है, कि T929 कॉकपिट को .50 कैलिबर राउंड की गोलीबारी के खिलाफ बख़्तरबंद वाहन की तरह तैयार किया गया है। यानि, फायरिंग के बाद भी इस हेलीकॉप्टर पर असर नहीं होगा। वहीं, इसके स्टब विंग्स 1,200 किलोग्राम तक विस्फोटक लेकर उड़ान भर सकते हैं।

इसके साथ ही, इस अटैक हेलीकॉप्टर के जरिए हवा से सतह में और हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, गाइडेड और अनगाइडेड रॉकेट, और चिन-माउंटेड T-30H 30-मिलीमीटर चेन गन और Aselsan फॉरवर्ड-लुकिंग इलेक्ट्रो- ऑप्टिक/इन्फ्रारेड बुर्ज को फायर किया जा सकता है।

जेन्स की रिपोर्ट में कहना है, कि T929 प्रोटोटाइप दो यूक्रेनी मोटर सिच TV3-117VMA-SBM1V सीरीज 1 टर्बोशाफ्ट द्वारा संचालित है, जो इसे अमेरिकी LHTEC T800s हेलीकॉप्टर से अलग करता है।

हेलीकॉप्टर T929 प्रोटोटाइप की तस्वीरें और वीडियो कल तुर्की की राज्य संचालित अनादोलु एजेंसी समाचार एजेंसी ने जारी किए थे। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है, कि ये परीक्षण कब हुए हैं।

एशिया टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हेलीकॉप्टर T929 वो हाईटेक डिफेंस उत्पाद हैं, जिनका उत्पादन हाल के कुछ सालों में तुर्की ने करना शुरू किया है। इससे पहले, तुर्की एडवांस हथियारों का निर्माण नहीं कर पाता था। लेकिन, T929 के निर्माण के बाद तुर्की की हथियारों की निर्माण क्षमता काफी बढ़ गई है।

Turkey Weapon Market

हथियार बाजार में तुर्की के बढ़ते कदम

गौरतलब है कि लड़ाकू विमान बनाने में सक्षम देशों के एलीट क्लब में शामिल होने के लिए तुर्की काफी सालों से हाथ पैर मार रहा था और वो पहले ही इसमें शामिल हो भी सकता है। पिछले साल दिसंबर में, एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट में तुर्की के TF-X फाइटर जेट को लेकर तुर्की की प्रगति की सूचना दी, जिसकी तस्वीरें निर्माण के शुरुआती चरणों में सामने आई थी। इसे एयर-टू-एयर ऑपरेशंस के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसमें एयर-टू-ग्राउंड हमलों पर भी जोर दिया गया है।

वहीं, इस साल जनवरी महीने में द वारज़ोन की रिपोर्ट में बताया गया, कि TF-X फाइटर जेट का उत्पादन काफी एडवांस स्टेज तक पहुंच चुका है और ऐसी रिपोर्ट है, कि उसमें कॉकपिट के सामने एक समर्पित इन्फ्रारेड सर्च और ट्रैक सेंसर सिस्टम (IRST) लगा हुआ है।

रिपोर्ट में कहा गया है, कि ये एक स्टील्थ फाइटर जेट है, जिसमें फॉरवर्ड फ्यूजलेज के तहत बहुउद्देश्यीय इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल लक्ष्यीकरण प्रणाली (ईओटीएस) को भी शामिल गया है। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है, कि तुर्की फिलहाल इस फाइटर जेट के अलावा, किसी और तरह के फाइटर जेट का निर्माण नहीं कर रहा है।

Turkey Weapon Market

लेकिन, ड्रोन की दुनिया में भी तुर्की ने अपना नाम बनाना शुरू कर दिया है।

रिपोर्ट है, कि तुर्की ने स्टील्थ ड्रोन का भी निर्माण कर लिया है। पहले तुर्की कम कीमत वाली रोबोटिक ड्रोन्स का उत्पादन कर रहा था, जिनमें सीमित शक्तियां होती थीं।

पिछले साल नवंबर में, एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट में तुर्की के किज़िलेल्मा स्टील्थ ड्रोन पर रिपोर्ट की गई थी, जिसमें गया था, कि इस स्टील्थ ड्रोन में भारी-सुरक्षित हवाई क्षेत्र में हवा से जमीन और हवा से हवा में मिशन करने की क्षमता शामिल हो सकती है। माना जा रहा है, कि ये ड्रोन नौसेना के लिए काफी उपयुक्त हो सकते हैं।

तुर्की ने एक मिनी-पनडुब्बी भी विकसित की है, जिसके बारे में उसे उम्मीद है, कि यह वैश्विक बाजार में हिट हो सकती और नौसैनिक युद्ध के लिए एक संभावित गेम-चेंजर साबित हो सकती है।

एशिया टाइम्स ने तुर्की की ST-500 मिनी-पनडुब्बी पर भी सूचना दी थी, जो अपने छोटे चुंबकीय और ध्वनिक हस्ताक्षर के कारण तटीय संचालन में प्रभावी हो सकती है। ST-500 मिनी-पनडुब्बी उन देशों के लिए भी एक विकल्प हो सकती है, जो फिलीपींस और यूक्रेन जैसे हालात में हों, जिनके पास काफी कम बजट हो, लेकिन समुद्र के नीचे युद्ध क्षमताओं का निर्माण करना चाहते हों।

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