भयंकर कर्ज में डूबी टर्की की अर्थव्‍यवस्‍था, दुनिया पर बढ़ा आर्थिक संकट का खतरा

टर्की की मुद्रा लीरा में सोमवार को एतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। इस नए घटनाक्रम के बाद टर्की एक बड़े संकट की तरफ बढ़ रहा है। निवेशकों की मानें तो राष्‍ट्रपति रेसेप तैयप एर्डोगान की रूढ़‍िवादी आर्थिक नीतियों ने दुनिया को एक बड़े आर्थिक संकट की ओर से ढकलने की शुरुआत कर दी है।

अंकारा। टर्की की मुद्रा लीरा में सोमवार को एतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। इस नए घटनाक्रम के बाद टर्की एक बड़े संकट की तरफ बढ़ रहा है। निवेशकों की मानें तो राष्‍ट्रपति रेसेप तैयप एर्डोगान की रूढ़‍िवादी आर्थिक नीतियों ने दुनिया को एक बड़े आर्थिक संकट की ओर से ढकलने की शुरुआत कर दी है। निवेशकों कहते हैं कि टर्की और दूसरे देशों ने उस समय अमेरिका से कर्ज लिया था जब डॉलर काफी सस्‍ता और अब ये देश कर्ज के तले दबे हुए हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि टर्की जैसे देश इतने बड़े कर्ज के तले दबे हैं कि उसकी अदायगी शायद ही कर पाएं। इन्‍हीं सब चिंताओं ने टर्की की मुद्रा लीरा को एक खतरनाक स्‍तर पर पहुंचा दिया है। लीरा की वजह से विकासशील देशों जैसे दक्षिण अफ्रीका, अर्जेंटीना, मैक्सिको और इंडोनेशिया जैसे देशों की मुद्राओं में भी गिरावट का दौर जारी है। ये भी पढ़ें-तो भारत के नोट हैंं मेड इन चाइना, जानिए क्‍या कहता है चीन की मीडिया?

अमेरिका और टर्की का आपसी टकराव

अमेरिका और टर्की का आपसी टकराव

शु्क्रवार को अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप टर्की से आयात होने वाली धातुओं पर टैरिफ को बढ़ाकर दोगुना कर दिया। राष्‍ट्रपति ट्रंप ने यह कदम एर्डोगान को सजा देने के मकसद से उठाया गया। एर्डोगान ने उस अमेरिकी पादरी को रिहा करने से मना कर दिया है जिसे आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। टर्की, नाटो का भी हिस्‍सा है। अमेरिका के राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) ने सोमवार को ही टर्की के राजदूत सरदार किलिक से मुलाकात की थी। यह मुलाकात टर्की के राजदूत के अनुरोध पर ही हुई थी। दोनों नेताओं की मुलाकात पर व्‍हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी सारा सैंडर्स ने बताया दोनों के बीच अमेरिकी पादरी एंड्रयू ब्रुनसन की हिरासत पर तो चर्चा हुई ही साथ ही में दोनों ने अमेरिका और टर्की के संबंधों पर बातचीत की।

जमकर लिया गया कर्ज

जमकर लिया गया कर्ज

टर्की इस समय बड़े आर्थिक संकट में है क्‍योंकि यहां के बैंकों ने पिछले कुछ समय में जमकर डॉलर उधार लिया है। डॉलर उस समय उधार लिया गया जब अमेरिका के फेडरल रिजर्व बैंक ने ब्‍याज दरें करीब शून्‍य रखी थीं। टर्की की सरकार ने अपना बजट भी आर्थिक दर बढ़ाने के लिए बढ़ा दिया खासतौर पर साल 2016 में जब यहां पर सैन्‍य तख्‍तापलट की कोशिशें हुई थीं। अब जबकि लीरा के मुकाबले डॉलर की कीमतें काफी बढ़ गई हैं तो टर्की के निवेशकों पर कर्ज की स्थिति अनियंत्रित होती जा रही है। अब तक एर्डोगान निवेशकों से ब्‍याज दरें न बढ़ाने के लिए कह रहे हैं ताकि यहां के मुद्रा संकट को नियंत्रित किया जा सके। साथ ही एर्डोगान की कोशिशें अब अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से बेलआउट हासिल करने की हैं।

यूरोप से लिया सबसे ज्‍यादा कर्ज

यूरोप से लिया सबसे ज्‍यादा कर्ज

अगर टर्की के निवेशक विदेशों खासकर यूरोप ये लिए गए अपने कर्ज को संभाल नहीं पाए तो उन्‍हें काफी बड़ा घाटा होने वाला है। टर्की पर स्‍वीडन के बैंकों का 82 बिलियन डॉलर कर्ज है तो फ्रांस के बैंकों ने 38 बिलियन डॉलर टर्की को उधार दिए हैं। ये आंकड़ें स्विट्जरलैंड के इंटरनेशनल सैटलमेंट बैंक की ओर से जारी किए गए हैं। टर्की आज जिस स्थिति का सामना कर रहा है, वह उसकी अपनी ही गलती का नतीजा है। अमेरिका के फेडरल रिजर्व बैंक और दूसरे सेंट्रल बैंकों की ओर से नीतियों में परिवर्तन की वजह से टर्की का आर्थिक माह‍ौल बदल रहा है। फेडरल बैंक ने भी ब्‍याज की दरें बढ़ा दी है और इस वजह से ही अमेरिकी डॉलर अब 13 माह के सर्वोच्‍च शिखर पर है। साथ ही फेडरल बैंक ने सरकारी सिक्‍योरिटीज को भी बेचना शुरू कर दिया है।

अमेरिकी मैन्‍यूफैक्‍चरिंग सेक्‍टर प्रभावित

अमेरिकी मैन्‍यूफैक्‍चरिंग सेक्‍टर प्रभावित

मैकेंजी ग्‍लोबल इंस्‍टीट्यूट्स के मुताबिक जब दुनिया ने मंदी का सामना किया उसके बाद से कर्ज के हालात विस्‍फोटक हो गए हैं। साल 2007 में जहां दुनिया के कई देशों पर कर्ज का आंकड़ा 97 ट्रिलियन डॉलर था तो वहीं पिछले वर्ष यह 169 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच गया है। टर्की और यूरोपियन बैंकर्स के बीच कर्ज के हालातों ने दुनिया के कई बाजारों में चिंताएं पैदा कर दी हैं। अमेरिकी विशेषज्ञ इयान शेफर्डसन की मानें तो टर्की के हालात अमेरिकी अर्थव्‍यवस्‍था या फिर बैंकिंग सिस्‍टम या फिर फेडरल रिजर्व बैंक की आने वाली योजनाओं को बिल्‍कुल भी प्रभावित नहीं करेंगे। लेकिन यह अमेरिका के मैन्‍यूफैक्‍चरिंग सेक्‍टर को बुरी तरह से प्रभावित कर सकते हैं। शेफर्डसन की मानें तो हालात बिल्‍कुल साल 1997-1998 जैसे हो सकते हैं जब एशिया में मंदी की स्थिति की वजह से अमेरिकी मैन्‍यूफैक्‍चरिंग सेक्‍टर को तगड़ा झटका लगा था।

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