तो भारत के नोट हैंं मेड इन चाइना, जानिए क्‍या कहता है चीन की मीडिया?

बीजिंग। चीन की चाइना बैंकनोट प्रिंटिंग एंड मिनटिंग कॉरपोरेशन जो कुछ माह पहले बुरे दौर से गुजर रही थी, वह अब पूरी क्षमता के साथ नोटों को प्रिंट करने में लगी है। चीन के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्‍ट को कॉरपोरेशन की ओर से इस बात की पुष्टि की गई है कि इस बार सरकार ने उसके लिए जो लक्ष्‍य तय किया है, वह अब उसे पूरा करने की दिशा में बढ़ रही है। कॉरपोरेशन के पास नोटों को प्रिंट करने की सबसे ज्‍यादा डिमांड बेल्‍ट एंड रोड इनीशिएटिव में भागीदार बने देशों की ओर से आ रही है। कॉरपोरेशन के एक अधिकारी की ओर से अपना नाम न बताने की शर्त पर इस बात की जानकारी दी गई है। इस अधिकारी ने कहा है कि चीन की मुद्रा युआन का यहां पर बहुत छोटे स्‍तर पर निर्माण हो रहा है।

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दूसरे देश से भी मिल रहे नोट छपाई के ऑर्डर

चीन की इस कंपनी को अब दूसरे देश की ओर से भी वहां की मुद्रा की छपाई के कॉन्‍ट्रैक्‍ट मिल रहे हैं। इस सरकारी कंपनी को हेडक्‍वार्टर बीजिंग के शीचेंग जिले में है। यह कंपनी प्रिंटिंग के लिहाज से खुद को दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बताती है। कंपनी में 18,000 ये ज्यादा इंप्‍लॉयी है और करीब 10 अलग-अलग जगहों पर यह पेपर नोट और सिक्‍कों को उत्‍पादन करती है। वहीं अगर इसकी अमेरिकी समकक्ष कंपनी यूएस ब्‍यूरो ऑफ इनग्र‍ेविंग एंड प्रिंटिंग में चीनी कंपनी की तुलना में इंप्‍लॉयी की संख्‍या दो फैक्ट्रियों में बंटी है। साथ ही इंप्‍लॉयी की संख्‍या चीनी कंपनी के कर्मियों की तुलना में 10वां हिस्‍सा ही है। मिंटिंग कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष ल्यू गुइसेंग ने कहा चीन ने अभी तक विदेशी करेंसी नहीं छापी है। ल्यू की मानें तो वन बेल्‍ट वन रोड परियोजना जो कि साल 2013 में लॉन्‍च की गई थी, उसके बाद से ही कंपनी को यह मौके मिले और सफलतापूर्वक थाईलैंड, बांग्लादेश, श्रीलंका, मलेशिया, भारत, ब्राजील और पोलैंड की करेंसी छापने का प्रोजेक्ट हासिल किया। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की मानें तो यह सिर्फ एक नमूना है।

कांग्रेस नेता थरूर ने किया ट्वीट

वहीं इस रिपोर्ट पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने ट्वीट किया है। उन्होंने विदेश में नोट छापे जाने को लेकर कहा है कि इससे पाकिस्तान को जाली नोट आसानी से मिल जाएगी, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है। कुछ सरकारों ने चीन से कहा है कि सौदे को प्रचारित ना किया जाए। उनकी चिंता है कि ऐसी जानकारी बाहर आने से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है या 'अनावश्यक बहस की शुरुआत' हो जाएगी। ल्यू के मुताबिक विश्व के आर्थिक परिदृश्य में बड़े परिवर्तन हो रहे हैं। जैसे चीन बड़ा और अधिक शक्तिशाली जाएगा तो वह पश्चिम द्वारा स्थापित मूल्यों को चुनौती देगा। अन्य देशों के लिए करेंसी छापना एक महत्वपूर्ण कदम है। ये भी पढ़ें-नेपाल में नोट पर कुछ भी लिखने पर तीन माह की सजा और 5,000 रुपए जुर्माना

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