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Trump Tariff: धारा 122, 301 और 232? जिसके दम पर ट्रंप वापस लगाएंगे टैरिफ, बचने के कितने विकल्प?- Explainer

Trump Tariff: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ को रद्द कर दिया है। बावजूद इसके, राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ कर दिया कि वे अपने टैरिफ वाले व्यापार एजेंडे से पीछे हटने वाले नहीं हैं। कोर्ट के फैसले के कुछ ही समय बाद उन्होंने 10 प्रतिशत के व्यापक वैश्विक टैरिफ लगाने के आदेश पर हस्ताक्षर किए। इससे साफ है कि ट्रंप अभी भी टैरिफ को अपनी बड़ी आर्थिक रणनीति का हिस्सा मानते हैं। ऐसे में समझते हैं कि ट्रंप कैसे अमेरिकी कानून को हथियार बना सकते हैं और आगे क्या विकल्प हैं।

नई चाल के साथ वापसी

अदालत ने कहा था कि ट्रंप ने International Emergency Economic Power Act (अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम) (IEEPA) के तहत अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया। फैसले के कुछ घंटों बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा, 'आज मैं सामान्य टैरिफ के अलावा धारा 122 के तहत 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लगाने के आदेश पर हस्ताक्षर करूंगा।' यानी IEEPA पर रोक लगने के बाद भी उन्होंने दूसरा कानूनी रास्ता चुन लिया।

Trump Tariff

• सुप्रीम कोर्ट ने IEEPA टैरिफ रद्द किए
• 6-3 का फैसला
• कुछ घंटों बाद ट्रंप का ऐलान
• धारा 122 के तहत 10% नया ग्लोबल टैरिफ

टैरिफ पावर पूरी तरह खत्म नहीं हुई

सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने ट्रंप की सबसे आक्रामक कानूनी रणनीतियों में से एक पर जरूर रोक लगा दी है, लेकिन उनकी टैरिफ लगाने की ताकत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अभी भी कई दूसरे कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। कुछ प्रावधान जल्दी लागू किए जा सकते हैं, कुछ में समय लगता है, और कुछ कानूनी रूप से ज्यादा जोखिम भरे माने जाते हैं।

धारा 122- बिना जांच के टैरिफ

अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 122 राष्ट्रपति को अधिकतम 150 दिनों के लिए 15 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की अनुमति देती है। इसका मकसद तब कार्रवाई करना है जब किसी देश का आयात उसके निर्यात से बहुत ज्यादा हो जाए, यानी अमेरिका का को बड़ा घाटा हो।

धारा 122-
• 10% नया टैरिफ
• 150 दिन लिमिट
• संसद की मंजूरी जरूरी
• जांच की जरूरत नहीं

Trump Tariff

बिना लंबी जांच के फैसला

धारा 122 की खास बात यह है कि इसके तहत टैरिफ लगाने से पहले लंबी जांच की जरूरत नहीं होती। इसलिए इसे एक 'फास्ट एक्शन टूल' माना जाता है। लेकिन इसकी भी लिमिट है। इस धारा के तहत टैरिफ 15 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकता और 150 दिनों से आगे तभी बढ़ाया जा सकता है जब संसद मंजूरी दे। ट्रंप ने इसी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए तुरंत 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लगाने की घोषणा की।

Trump Tariff

धारा 301: बेमतलब ट्रेड कस्टम पर कंट्रोल

उसी 1974 के कानून की धारा 301 अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) को यह जांच करने का अधिकार देती है कि क्या कोई देश अमेरिकी कंपनियों के साथ 'अन्यायपूर्ण' या भेदभावपूर्ण व्यापार कर रहा है। अगर ऐसा पाया जाता है, तो उस देश पर टैरिफ लगाए जा सकते हैं।

चीन के खिलाफ हो चुका इस्तेमाल

ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में चीनी सामान पर बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाने के लिए धारा 301 का इस्तेमाल किया था। उन टैरिफ को लेकर कई कानूनी चुनौतियां भी सामने आई थीं। हालांकि धारा 301 की प्रक्रिया धीमी होती है, क्योंकि इसमें पहले औपचारिक जांच होती है जो कई महीनों तक चल सकती है। ट्रंप ने शुक्रवार को कहा, 'मैं अपने देश को अन्य देशों और कंपनियों की अनुचित व्यापार प्रथाओं से बचाने के लिए कई धारा 301 और अन्य जांच शुरू कर रहा हूं।'

धारा 232: राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार

एक और अहम विकल्प व्यापार विस्तार अधिनियम 1962 की धारा 232 है। यह राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर टैरिफ लगाने की अनुमति देती है, लेकिन इसके लिए पहले डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स की जांच जरूरी होती है।

किन सेक्टर पर होगा असर?

ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में स्टील और एल्युमीनियम पर टैरिफ लगाने के लिए धारा 232 का इस्तेमाल किया था। हाल के समय में इसे ऑटोमोबाइल, तांबे और अन्य सेक्टरों तक भी बढ़ाया गया है। ट्रंप ने साफ कहा, 'तत्काल प्रभाव से धारा 232 के तहत सभी राष्ट्रीय सुरक्षा टैरिफ और मौजूदा धारा 301 टैरिफ पूरी तरह लागू रहेंगे।'

टारगेट पर ये सेक्टर-
• स्टील
• ऑटो
• ऑटोमोबाइल
• तांबा
• ग्लोबल इम्पोर्ट

धारा 338: कम इस्तेमाल लेकिन बड़ा खतरा

टैरिफ अधिनियम 1930 की धारा 338 भी एक विकल्प है। इसके तहत उन देशों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है, जिन पर अमेरिकी व्यापार के खिलाफ भेदभाव करने का आरोप हो। लेकिन अब तक किसी भी राष्ट्रपति ने इस धारा का इस्तेमाल नहीं किया है। अगर ट्रंप ऐसा करते हैं तो वे पहले राष्ट्रपति होंगे।

WTO के नियमों से टकराव और रिस्क

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर धारा 338 का इस्तेमाल किया गया तो यह विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों का उल्लंघन कर सकता है। इससे दूसरे देश भी जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं और एक नया व्यापार युद्ध शुरू हो सकता है।

किस धारा में कितना रिस्क?

धारा 122-
• धारा 301- मीडियम रिस्क
• धारा 232- मीडियम रिस्क
• धारा 338- हाई रिस्क (WTO में विवाद संभव)

आगे क्या?

कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद ट्रंप ने यह साफ कर दिया है कि वे टैरिफ को अपनी आर्थिक और राजनीतिक रणनीति का बड़ा हथियार बनाए रखेंगे। अलग-अलग कानूनी धाराओं के जरिए वे अपने व्यापार एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करते रहेंगे।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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