Sugar Export Ban: सरकार ने चीनी एक्सपोर्ट पर लगाया बैन, कब तक रहेगी पाबंदी? ISMA की नई रिपोर्ट से बढ़ी चिंता
India Sugar Export Ban: देश में चीनी की कीमतों को काबू में रखने और रसोई का बजट बिगड़ने से बचाने के लिए मोदी सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने विदेशी बाजारों में चीनी के निर्यात (Export) पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह रोक लगा दी है। सरकार के इस 'शुगर स्ट्राइक' का सीधा मकसद घरेलू बाजार में चीनी की किल्लत को रोकना और बढ़ते दामों पर लगाम लगाना है।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 13 मई 2026 को एक नया आदेश जारी किया है। इस नोटिफिकेशन के मुताबिक, अब चीनी के निर्यात को 'प्रतिबंधित' (Restricted) लिस्ट से हटाकर 'बैन' (Prohibited) वाली लिस्ट में डाल दिया गया है। यानी अब बिना विशेष अनुमति के चीनी देश से बाहर नहीं भेजी जा सकेगी। यह नियम कच्ची चीनी (Raw Sugar), सफेद चीनी और रिफाइंड चीनी तीनों पर लागू होगा।

कब तक रहेगी यह पाबंदी?
DGFT के आदेश में साफ कहा गया है कि चीनी के एक्सपोर्ट पर यह रोक 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक जारी रहेगी। अगर सरकार को लगता है कि हालात सुधर गए हैं, तो इस तारीख से पहले भी फैसला बदला जा सकता है, वरना यह बैन बना रहेगा।
The Central Government bans the export of sugar with immediate effect till September 30, 2026, or until further orders. Directorate General of Foreign Trade (DGFT) issues a notification amending the export policy from 'Restricted' to 'Prohibited'.
— ANI (@ANI) May 14, 2026
The prohibition will not apply… pic.twitter.com/TwafGBuXRl
इन खास मामलों में मिलेगी छूट
सरकार ने पूरी तरह बैन लगाने के बावजूद कुछ जगहों पर ढील दी है:
- यूरोपीय संघ (EU) और अमेरिका: तय कोटे (CXL-Special Export Quota और TRQ-Tariff Rate Quota) के तहत जो चीनी भेजी जाती है, उस पर यह रोक नहीं लगेगी।
- एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम: सरकारी योजनाओं के तहत होने वाला निर्यात जारी रहेगा।
- मित्र देशों की मदद: अगर किसी दूसरे देश में खाने-पीने का संकट खड़ा होता है और वहां की सरकार भारत से मदद मांगती है, तो सरकार विशेष अनुमति दे सकती है।
जो माल रास्ते में है, उसका क्या होगा?
जिन व्यापारियों का माल पहले ही पोर्ट (बंदरगाह) पर पहुंच चुका है या जहाजों पर लादा जा रहा है, उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। नोटिफिकेशन जारी होने से पहले जो खेप कस्टम क्लियरेंस पा चुकी है या जिसका रिकॉर्ड सरकारी सिस्टम में दर्ज हो चुका है, उसे विदेश भेजने की मंजूरी दी जाएगी।
आखिर क्यों पड़ा यह कड़ा कदम उठाना?
Reuters की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार चाहती है कि देश के भीतर चीनी के दाम न बढ़ें और आम आदमी को सस्ती चीनी मिलती रहे। भारत दुनिया में चीनी का बहुत बड़ा उत्पादक है, इसलिए जब भारत निर्यात रोकता है, तो पूरी दुनिया में इसकी चर्चा होती है। लेकिन सरकार का पहला लक्ष्य भारतीय उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाना है।
किसने जारी किया आदेश?
यह फैसला वाणिज्य और उद्योग मंत्री की हरी झंडी मिलने के बाद लिया गया है। इस सरकारी आदेश पर DGFT के महानिदेशक लव अग्रवाल के साइन हैं।
शुगर स्टॉक्स में भारी गिरावट
सरकारी फैसले के बाद गुरुवार, 14 मई को चीनी कंपनियों के शेयरों में 5% तक की गिरावट दर्ज की गई। प्रभावित स्टॉक्स में बलरामपुर चीनी मिल्स, श्री रेणुका शुगर्स, त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज, डालमिया भारत शुगर, बजाज हिंदुस्तान शुगर, उत्तम शुगर मिल्स, अवध शुगर एंड एनर्जी और धामपुर शुगर मिल्स जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।
घटते उत्पादन ने बढ़ाई चिंता
दरअसल, यह फैसला 'इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन' (ISMA) द्वारा उत्पादन अनुमानों में कमी किए जाने के बाद लिया गया है। संगठन का अनुमान है कि 30 सितंबर को समाप्त होने वाले सीजन के लिए भारत का कुल चीनी उत्पादन 32 मिलियन टन रहेगा, जो इसके पिछले 32.4 मिलियन टन के अनुमान से कम है।












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