राघव चड्ढा बन सकते हैं मोदी के मंत्री! कैबिनेट में कौन सा विभाग मिलेगा? मिनिस्टर बनाने से BJP का क्या फायदा?
Raghav Chadha News Update: देश की सियासत में इस समय सबसे बड़ी चर्चा मोदी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर हो रही है। कयास लगाए जा रहे हैं कि संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने कैबिनेट का नया रंग-रूप तय कर सकते हैं। मोदी के नए कैबिनेट में इस संभावित फेरबदल का पूरा दारोमदार उन राज्यों पर टिका है, जहां अगले साल यानी 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। यही वजह है कि पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों को इस बार भारी प्रतिनिधित्व मिलने की उम्मीद है।
इस पूरी उठापटक के बीच जो सबसे चौंकाने वाली खबर आ रही है, वह है आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व दिग्गज और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की। मीडिया सोर्स के मुताबिक इस नए कैबिनेट में राघव चड्ढा को शामिल किया जा सकता है। उनके साथ ही लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर अशोक मित्तल के नाम की भी चर्चा जोरों पर है।

पंजाब से किन-किन नेताओं को मिल सकता है मोदी कैबिनेट में जगह?
बीजेपी का पूरा ध्यान इस समय पंजाब में अपनी जमीन मजबूत करने पर है। फिलहाल मोदी सरकार में पंजाब का चेहरा रवनीत सिंह बिट्टू हैं, जो केंद्रीय राज्य मंत्री का जिम्मा संभाल रहे हैं। लेकिन पेंच यह है कि बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो चुका है। नियम कहता है कि बिना सांसद रहे कोई भी व्यक्ति सिर्फ 6 महीने तक ही मंत्री रह सकता है, जिसकी आखिरी तारीख इसी साल दिसंबर में है।
रवनीत सिंह बिट्टू को केंद्रीय मंत्री के पद से हटाया जा सकता है। वो भाजपा की ओर से पंजाब में चुनाव में मैदान में उतर सकते हैं। बीजेपी उन्हें लुधियाना की किसी सीट से चुनाव लड़ा सकती है। रवनीत सिंह बिट्टू फिलहाल रेल राज्यमंत्री हैं।
ऐसे में पंजाब से किसी कद्दावर चेहरे को कैबिनेट में जगह देना बीजेपी की मजबूरी भी है और रणनीति भी। अमृतसर के तरुण चुघ भी इस रेस में बने हुए हैं, लेकिन राघव चड्ढा का पलड़ा भारी दिख रहा है। गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से हालिया मुलाकात के बाद इन चर्चाओं को और हवा मिल गई है। बीजेपी जानती है कि पंजाब में अकाली दल से अलग होने के बाद उसे सिखों और शहरी वोटरों के बीच एक दमदार और नया नैरेटिव चाहिए।
जहां तक राघव चड्ढा को कौन सा विभाग मिलने की संभावना की बात है तो, ऐसा हो सकता है कि रवनीत सिंह बिट्टू का विभाग ( रेल राज्यमंत्री) इनको दिया जाए। या ऐसा भी हो सकता है कि राघव खुद चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) रह चुके हैं तो उन्हें वित्त राज्यमंत्री का पोस्ट भी दिया जा सकता है। भारत के वर्तमान वित्त राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी हैं, जिनको कैबिनेट विस्तार में हटाए जाने की संभावना है।

राघव चड्ढा को मंत्री बनाने से BJP का क्या है गेमप्लान?
राघव चड्ढा को दिल्ली की राजनीति से लेकर पंजाब की सत्ता तक का अनुभव है। साल 2022 के पंजाब चुनाव में उन्होंने आम आदमी पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाने के लिए जमीन पर काम किया था। शुरुआती दो सालों तक उन्हें पंजाब सरकार का 'सुपर सीएम' तक कहा जाने लगा था। लेकिन अरविंद केजरीवाल के जेल जाने के वक्त उनके रिश्ते पार्टी से बिगड़े और उन्होंने बगावत का झंडा बुलंद करते हुए आप के 7 सांसदों के साथ बीजेपी का दामन थाम लिया था।
बीजेपी को इनसे तीन बड़े फायदे हो सकते हैं। पहला, मीडिया में मजबूत पक्ष, राघव चड्ढा अपनी बात को बेहद सलीके और तर्कों के साथ रखने के लिए जाने जाते हैं। टीवी और सोशल मीडिया पर वह बीजेपी के लिए पंजाब में एक बहुत बड़ा नैरेटिव सेट कर सकते हैं।
दूसरा,शहरी और कारोबारी वोट बैंक, लुधियाना और जालंधर जैसे बड़े औद्योगिक शहरों में व्यापारियों और केंद्र सरकार के बीच राघव चड्ढा एक मजबूत पुल का काम कर सकते हैं। तीसरा, आप की अंदरूनी कमजोरी का फायदा, चड्ढा सीधे तौर पर अरविंद केजरीवाल की कोर टीम का हिस्सा रहे हैं, इसलिए उन्हें विरोधी दल की हर कमजोरी और रणनीति का पहले से अंदाजा है।

आम आदमी पार्टी को लगेगा कितना बड़ा झटका?
अगर राघव चड्ढा को मोदी कैबिनेट में जगह मिलती है, तो यह आम आदमी पार्टी के लिए एक बहुत बड़ा मनोवैज्ञानिक और सांगठनिक झटका होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जो चेहरा कल तक पंजाब के कोने-कोने में जाकर आम आदमी पार्टी के लिए वोट मांग रहा था, जब वही मंच से अपनी पुरानी पार्टी की पोल खोलेगा, तो वोटरों के बीच भारी भ्रम पैदा होगा।
असल में राघव चड्ढा का केंद्रीय मंत्री बनना पंजाब आप के भीतर एक बड़ी टूट की वजह बन सकता है। आने वाले चुनावों में जिन विधायकों या नेताओं के टिकट कटेंगे, उनके पास बीजेपी में जाने के लिए राघव चड्ढा के रूप में एक सीधा और बड़ा ठिकाना मौजूद रहेगा।
धर्मेंद्र प्रधान से लेकर हरदीप पुरी सिंह तक, कई दिग्गजों की कुर्सी पर खतरा
इस फेरबदल में सिर्फ नए चेहरे शामिल नहीं होंगे, बल्कि कई पुराने और बड़े मंत्रियों की छुट्टी भी तय मानी जा रही है। मंत्रियों के कामकाज के परफॉर्मेंस की जो समीक्षा हुई है, उसमें कुछ बड़े नाम संकट में दिख रहे हैं।
- देश भर में हुए नीट पेपर लीक और सीबीएसई के डिजिटल मार्किंग की धांधलियों के चलते शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
- बीजेपी अब युवाओं को आगे लाने का मन बना चुकी है। कैबिनेट में शामिल 70 से 80 साल की उम्र वाले करीब 8 मंत्रियों की विदाई की चर्चा है।
- एक व्यक्ति, एक पद का नियम: पंकज चौधरी (उत्तर प्रदेश) और हर्ष मल्होत्रा (दिल्ली) को संगठन में प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है, इसलिए नियम के तहत इन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है।
- नए सेक्टर्स को मौका: पूर्व आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास जैसे बड़े नौकरशाह को सरकार में कोई बड़ी वित्तीय जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के कुछ सांसदों, बागी टीएमसी नेताओं और एकनाथ शिंदे गुट के चेहरों को भी इस विस्तार में इनाम मिल सकता है।
राज्यसभा का गणित और राज्यपालों की नई लिस्ट
मंत्रिमंडल के इस फेरबदल का सीधा नाता देश के कई राज्यों के राजभवनों से भी जुड़ा हुआ है। जिन सीनियर मंत्रियों की कैबिनेट से छुट्टी होगी, उन्हें सीधे तौर पर राज्यों का राज्यपाल बनाकर भेजा जा सकता है। आने वाले दिनों में कर्नाटक के थावरचंद गहलोत, मध्य प्रदेश के मंगूभाई पटेल और उत्तराखंड के लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह का कार्यकाल पूरा हो रहा है, जिससे खाली हुई जगहों को इन नेताओं से भरा जाएगा।
साथ ही, हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा जैसे बड़े मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल भी इसी साल नवंबर में खत्म हो रहा है, जिससे सदन का गणित भी बदलेगा। साफ है कि यह कैबिनेट विस्तार सिर्फ मंत्रियों को बदलने का नहीं, बल्कि 2027 के राज्यों के चुनाव और 2029 के आम चुनाव की जमीन तैयार करने का एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक है।















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