Trump-Putin meeting: रूस-यूक्रेन जंग पर अलास्का वार्ता नाकाम हुई तो भारत को चुकानी पड़ सकती है भारी कीमत
Trump-Putin Meeting: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 15 अगस्त 2025 को अलास्का में वार्ता करेंगे। रूस-यूक्रेन के बीच अक्टूबर 2022 से चल रहे युद्ध को रोकने के मकसद से ट्रंप-पुतिन की यह वार्ता अहम मानी जा रही है। ट्रंप तो कह भी चुके हैं कि बातचीत के शुरुआती दो मिनट में पता चल जाएगा कि रूस युद्ध रोकना चाहता है या नहीं। अगर यह वार्ता विफल रही तो न केवल रूस बल्कि भारत पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा।
यूं तो रूस-यूक्रेन युद्ध से भारत का कोई सीधा संबंध नहीं और न ही शुक्रवार को अलास्का में हो रही ट्रंप-पुतिन की बातचीत से सीधे तौर पर कोई लेना-देना। बावजूद इसके अमेरिका कठोर रुख अपनाए हुए है और धमकी दे रहा है कि अगर ट्रंप-पुतिन वार्ता फेल हुई तो भारत पर शुल्क बढ़ाया जाएगा।

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसंट बोले-भारत पर बढ़ सकता शुल्क
मीडिया से बातचीत में अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसंट ने कहा कि 15 अगस्त 2025 को अलास्का में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन के बीच यूक्रेन युद्ध पर बातचीत बेनतीजा रही तो भारत पर सेकंडरी या अतिरिक्त शुल्क और बढ़ाया जा सकता है। यही नहीं, बेसंट ने यूरोपीय संघ से भी भारत पर इसी तरह का सेकंडरी शुल्क लगाने की अपील की है।
अमेरिका पहले ही लगा चुका 50 प्रतिशत टैरिफ
अमेरिका पहले ही भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा चुका है। 25 प्रतिशत बेस टैरिफ 7 अगस्त से प्रभावी हो चुका है, जबकि रूस से तेल खरीदने के कारण 25 प्रतिशत टैरिफ (पेनल्टी) 27 अगस्त 2025 से लागू होगा। हालांकि भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन कह चुके हैं कि अमेरिका की ओर से लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ का असर लंबे समय तक नहीं रहेगा।
अमेरिका ने रूस को भी दी चेतावनी
अलास्का वार्ता से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस को चेतावनी दे चुके हैं। पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि मॉस्को अगर यूक्रेन के साथ शांति वार्ता में बाधा डालने की कोशिश करता है तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। वार्ता में कोई ठोस परिणाम नहीं निकला तो रूस के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे, संभव है आर्थिक प्रतिबंध भी लगाए जाएं। रूस-यूक्रेन जंग रोकने की दिशा में यह पहली बैठक सकारात्मक रही तो जल्द दूसरी बैठक होगी, जिसमें यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की भी शामिल होंगे।
युद्ध रोकने के लिए रूस की 7 शर्तें
अलास्का में ट्रंप-पुतिन की बैठक से पहले, यूक्रेन से जंग रोकने के बदले रूस की ओर से ये 7 शर्तें रखी जा चुकी हैं।
- 1. कानूनी छूट: युद्ध अपराध, मानवाधिकार उल्लंघन या मुआवजे का कोई दावा न हो।
- 2. सीमित सैन्य क्षमता: भारी हथियार, लंबी दूरी की मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्टम पर रोक और अंतरराष्ट्रीय निगरानी।
- 3. नीति पर नियंत्रण: यूक्रेन की विदेश नीति, रक्षा रणनीति व कानून रूस के अनुरूप हों।
- 4. नाटो से दूरी: नाटो या किसी पश्चिमी सैन्य गठबंधन से हमेशा दूर रहना; जमीन पर कोई नाटो बेस न बने।
- 5. रूसी भाषा अधिकार: रूसी बोलने वालों को संवैधानिक सुरक्षा।
- 6. कब्जे वाले क्षेत्र की मान्यता: लुहान्सक, जापोरिज्जिया, खेरसॉन, क्रीमिया, डोनटस्क को अंतरराष्ट्रीय मान्यता।
- 7. प्रतिबंध हटाना: सभी आर्थिक-राजनीतिक प्रतिबंध खत्म करना और 25 लाख करोड़ रुपये की संपत्तियां लौटाना।












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