Trump China Visit: ट्रंप का चीन में ग्रैंड वेलकम, मस्क-हुआंग सहित दिग्गज बिजनेसमैन भी साथ, दौरा क्यों खास?

Trump China Visit 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक दशक के लंबे अंतराल के बाद बुधवार को चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। ईरान संकट, व्यापारिक युद्ध और ताइवान को लेकर बढ़ते तनाव के बीच, राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी यह शिखर वार्ता वैश्विक राजनीति की दिशा तय करेगी।

ट्रंप के साथ एलन मस्क और जेनसन हुआंग जैसे दिग्गज टेक लीडर्स का होना स्पष्ट संकेत है कि अमेरिका का प्राथमिक एजेंडा 'चिप्स' और 'सप्लाई चेन' पर अपनी शर्तें मनवाना है। मिडटर्म चुनावों से ठीक पहले हो रहा यह दौरा न केवल दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक विवादों को सुलझाने की कोशिश है, बल्कि ईरान संघर्ष पर चीन के रुख को परखने की एक बड़ी कूटनीतिक चाल भी है। दुनिया की नजरें अब इस ऐतिहासिक मुलाक़ात से निकलने वाले नतीजों पर टिकी हैं।

Trump China Visit 2026

Donald Trump Beijing: ट्रंप का बीजिंग में भव्य स्वागत

बीजिंग पहुंचने पर डोनाल्ड ट्रंप का जोरदार स्वागत हुआ। चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग ने एयरपोर्ट पर उनकी अगवानी की। इस दौरान दोनों देशों के बड़े राजनयिक और अधिकारी मौजूद रहे। ट्रंप के सम्मान में गुरुवार को एक विशेष राजकीय समारोह का आयोजन किया जाएगा, जिसमें उन्हें 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया जाएगा। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब ट्रंप पर घरेलू मोर्चे पर आर्थिक सुधार और आगामी मिडटर्म चुनावों का दबाव है।

ये भी पढे़ं: Iran Vs America War: दो महीने और युद्ध लड़ सकता है ईरान, न्यूयॉर्क टाइम्स के खुलासे से टेंशन में ट्रंप

Xi Jinping Trump Summit: दिग्गज कारोबारियों की फौज साथ

ट्रंप अकेले चीन नहीं आए हैं, बल्कि उनके साथ अमेरिकी उद्योग जगत के सबसे बड़े नाम मौजूद हैं। टेस्ला के एलन मस्क और एनवीडिया के जेनसन हुआंग का इस प्रतिनिधिमंडल में होना चर्चा का विषय बना हुआ है। मस्क के चीन में बड़े व्यापारिक हित हैं, जबकि हुआंग की कंपनी एनवीडिया चिप निर्यात पर लगी पाबंदियों से जूझ रही है। ट्रंप इन दिग्गजों के जरिए चीन पर अपनी शर्तें मनवाने और टेक सेक्टर में राहत पाने की कोशिश करेंगे।

ईरान संकट और ट्रंप का कड़ा रुख

यात्रा से पहले ट्रंप ने साफ कर दिया कि ईरान के मामले में वे चीन की मदद के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि अमेरिका ईरान संकट को अपने दम पर हल करने में सक्षम है, चाहे इसके लिए शांति का रास्ता अपनाना पड़े या सैन्य ताकत का। हालांकि, पर्दे के पीछे माना जा रहा है कि वैश्विक स्थिरता के लिए ट्रंप चीन से ईरान के मुद्दे पर सहयोग की उम्मीद जरूर कर रहे हैं।

ये भी पढ़ें: Trump China Visit: कैसे 5-T तय करेंगे ग्लोबल पावर बैलेंस? अमेरिका-चीन के बीच इस मीटिंग पर क्यों हैं सबकी नजर?

ट्रेड वॉर और तकनीक पर तकरार

इस बैठक का मुख्य एजेंडा व्यापारिक असंतुलन को कम करना है। अमेरिका चाहता है कि चीन और अधिक बोइंग विमान, अमेरिकी अनाज और ऊर्जा उत्पादों की खरीद करे। वहीं, चीन की नाराजगी अमेरिका द्वारा लगाई गई सेमीकंडक्टर और AI तकनीक के निर्यात पर पाबंदियों को लेकर है। दोनों देश पिछले समझौतों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन तकनीक की रेस में कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा।

ताइवान और सुरक्षा का पेचीदा मुद्दा

व्यापार के अलावा ताइवान का मुद्दा इस शिखर वार्ता की सबसे बड़ी बाधा है। चीन ने अमेरिका द्वारा ताइवान को हथियारों की बिक्री पर सख्त एतराज जताया है। अमेरिका ताइवान की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है, जबकि चीन इसे अपना आंतरिक मामला मानता है। ताइवान और दक्षिण चीन सागर में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दोनों नेता किसी बीच के रास्ते पर सहमत हो पाते हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+