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Trump Venezuela Oil: रूस से नहीं वेनेजुएला से तेल खरीदेगा भारत! ट्रंप के इस ऑफर से पुतिन की बढ़ेगी टेंशन

Trump Venezuela Oil Offer to India: डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता संभालते ही वैश्विक तेल बाजार की बिसात बिछा दी है। व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि वह भारत की विशाल ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए उसे वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने की अनुमति देने के लिए तैयार है।

यह खबर भारत के लिए किसी लॉटरी से कम नहीं है, क्योंकि वेनेजुएला का 'भारी कच्चा तेल' भारतीय रिफाइनरियों के लिए सबसे उपयुक्त है। हालांकि, इस 'जी-टू-जी' व्यापार की राह में ट्रंप प्रशासन ने एक ऐसी शर्त रखी है, जिसने न केवल पुतिन बल्कि पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है।

Trump Venezuela Oil Offer to India
(AI Image)

Trump 500 Percent Tariff: अमेरिकी नियंत्रण की कड़ी शर्त

ट्रंप प्रशासन के ऊर्जा सचिव क्रिस्टोफर राइट ने स्पष्ट कर दिया है कि वेनेजुएला का तेल भारत को सीधे नहीं मिलेगा। इस सौदे की सबसे बड़ी शर्त यह है कि तेल का पूरा विपणन (Marketing) अमेरिकी सरकार करेगी। तेल की बिक्री से मिलने वाला पैसा वेनेजुएला की तिजोरी में जाने के बजाय सीधे अमेरिका के नियंत्रण वाले बैंक खातों में जमा होगा। वाशिंगटन यह सुनिश्चित करेगा कि इस पैसे का उपयोग केवल वेनेजुएला की जनता के कल्याण के लिए हो, न कि रूसी हितों या पुरानी सत्ता के किसी गुट के लिए।

रूस के 'सस्ते तेल' का विकल्प और पुतिन की चिंता

यह डील रूस के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है। वर्तमान में भारत रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार है, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने भारत को चेतावनी दी है कि रूसी तेल खरीदने पर 500% तक का टैरिफ लगाया जा सकता है। ऐसे में अमेरिका भारत को वेनेजुएला के रूप में एक 'सुरक्षित' विकल्प दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पुतिन को आर्थिक रूप से घेरने की ट्रंप की एक सोची-समझी रणनीति है, ताकि भारत अपनी रूसी निर्भरता को खत्म कर दे।

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भारतीय रिफाइनरियों के लिए 'गोल्डन चांस'

बैन लगने से पहले भारत वेनेजुएला का तीसरा सबसे बड़ा ग्राहक था। रिलायंस और नायरा जैसी भारतीय कंपनियों की रिफाइनरियां जटिल भारी कच्चे तेल को प्रोसेस करने के लिए ही बनी हैं। ट्रंप का यह प्रस्ताव भारत को अपनी ऊर्जा सप्लाई में विविधता लाने में मदद करेगा। अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि वे वर्तमान में स्टॉक में मौजूद 30 से 50 मिलियन बैरल तेल को तुरंत बाजार में उतारने की योजना बना रहे हैं, जिससे वैश्विक कीमतों में भी भारी गिरावट आ सकती है।

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100 अरब डॉलर का निवेश और 'न्यू वेनेजुएला'

ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला के टूटे हुए बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए 100 अरब डॉलर का निवेश करेंगी। उनका लक्ष्य वेनेजुएला को फिर से दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक बनाना है, लेकिन इसकी चाबी पूरी तरह वाशिंगटन के पास होगी। भारत के लिए इस डील का हिस्सा बनने का मतलब होगा अमेरिकी कूटनीति के साथ मजबूती से खड़ा होना, जो भविष्य में भारत-अमेरिका संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जा सकता है।

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