Uddhav Thackeray की Shiv Sena में सेंध, कौन हैं वो 6 सांसद? 'शिवसेना स्थापना दिवस' के पहले दे सकते हैं झटका
Uddhav Thackeray, Shiv Sena UBT: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर होने के संकेत मिल रहे हैं। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी में टूट के बाद अब महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना (यूबीटी) में बड़ी टूट की खबरें सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद नेतृत्व से नाराज हैं और अपनी अलग राह चुनने की ठान ली है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ये बागी रुख अपना रहे दो सांसद दिल्ली पहुंच चुके हैं, जबकि अन्य पांच सांसदों के भी आज या कल तक पहुंचने की चर्चा है। बगावती सांसदों में भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय देशमुख हैं जो दिल्ली पहले से ही पहुंच चुके हैं। आइए जानने इनके अलावा और कौन सांसद बगावती खेमे में शामिल हैं?

अलग गुट बनाकर शिंदे सेना में विलय की तैयारी?
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार ये 6 नाराज सांसद पहले अपना अलग गुट बनाने की तैयारी में हैं। इसी लिए इसके बाद इनके एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल होने की संभावना बताई जा रही है। अगर ऐसा होता है तो शिवसेना (UBT) को स्थापना दिवस से ठीक पहले उद्धव की पार्टी को बड़ा झटका लग सकता है। हालांकि इस टूट की खबर लगते ही पार्टी को किसी भी नुकसान से बचाने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद अनिल देसाई तथा संजय राउत दिल्ली मंगलवार को पहुंचकर चुके हैं।
अगर सांसद बगावत करते हैं तो क्या होगा?
इस संभावित बगावत को दलबदल विरोधी कानून के चश्मे से भी देखा जा रहा है। लोकसभा में उद्धव गुट के कुल 9 सांसद हैं। कानूनी तौर पर बिना अयोग्यता के अलग होने के लिए दो-तिहाई सांसदों का साथ होना जरूरी है। अगर 7 सांसद बगावत करते हैं, तो वे दलबदल कानून के दायरे से बाहर रहकर आसानी से शिंदे गुट के साथ जा सकते हैं।
7 सांसदों की क्यों हो रही चर्चा?
इस पूरे घटनाक्रम को दलबदल विरोधी कानून के चश्मे से भी देखा जा रहा है। लोकसभा में उद्धव गुट के कुल 9 सांसद हैं। कानूनी तौर पर बिना अयोग्यता के अलग होने के लिए दो-तिहाई सांसदों का साथ होना जरूरी है। अगर 7 सांसद बगावत करते हैं, तो वे दलबदल कानून के दायरे से बाहर रहकर आसानी से शिंदे गुट के साथ जा सकते हैं।
कौन हैं वो 6 सांसद जो कर सकते हैं बगावत?
महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा चल रही है कि इस सीक्रेट मिशन तहत उद्धव गुट के सांसदों को एकनाथ शिंदे के खेमे में लाने की योजना है। हालांकि शिंदे गुट ऐसे किसी भी ऑपरेशन से इनकार कर रहा है इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में बागी सांसदों के नाम शामिल भी सर्कुलेट हो रहा है।
मीडिया में सूत्रों के हवाले से आई खबरों के अनुसार बगावत की राह पर चल रहे सांसदों में अरविंद सावंत, संजय जाधव, संजय पाटिल, नागेश बापूराव अष्टिकर, ओमप्रकाश राजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय देशमुख शामिल हैं। यदि ये नाम सच साबित होते हैं, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए लोकसभा चुनाव के बाद का सबसे बड़ा झटका होगा।
19 जून को है शिवसेना 60वां स्थापना दिवस
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आ रहा है जब 19 जून को शिवसेना का 60वां स्थापना दिवस मनाया जाना है। स्थापना दिवस से ठीक पहले इस तरह की टूट उद्धव ठाकरे के लिए न केवल राजनीतिक बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से भी बहुत नुकसानदेह साबित हो सकती है। शिंदे गुट इस बगावत के जरिए खुद को असली शिवसेना साबित करने की लड़ाई में एक कदम और आगे बढ़ाना चाहता है।
चार साल में दूसरी बड़ी टूट की आशंका
अगर सांसदों की बगावत की अटकलें हकीकत में बदलती हैं तो यह पिछले चार वर्षों में उद्धव ठाकरे के लिए दूसरा बड़ा राजनीतिक झटका होगा। इससे पहले जून 2022 में एकनाथ शिंदे की अगुवाई में बड़ी बगावत हुई थी, जिसमें अधिकांश विधायक उद्धव खेमे से अलग हो गए थे। बाद में संख्या बल के आधार पर चुनाव आयोग ने शिवसेना का नाम और चुनाव चिह्न 'धनुष-बाण' शिंदे गुट को सौंप दिया था। अब एक बार फिर पार्टी के भीतर संभावित टूट की चर्चा महाराष्ट्र की राजनीति को गर्मा रही है।
मातोश्री की बैठक में नहीं पहुंचे कई सांसद
संभावित असंतोष की झलक उस समय भी देखने को मिली जब उद्धव ठाकरे ने सभी नौ सांसदों को 'मातोश्री' में बैठक के लिए बुलाया। बैठक में केवल चार सांसद ही व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे। कुछ सांसद ऑनलाइन जुड़े, जबकि कुछ ने दूरी बनाए रखी। इसके बाद उद्धव ठाकरे ने भावुक अंदाज में कहा कि जिसे जाना है वह जा सकता है, लेकिन समय आने पर सच्चाई सबके सामने होगी और पार्टी छोड़ने वाले अपने फैसले पर पछताएंगे।
केंद्र में एनडीए की मिलेगी ताकत, शिंदे गुट का बढ़ेगा कद
यदि यह तय योजना के अनुसार होता है, तो केंद्र की राजनीति में भी इसके बड़े प्रभाव देखने को मिलेंगे। वर्तमान में एकनाथ शिंदे की शिवसेना के पास लोकसभा में 7 सांसद हैं, जिससे वह केंद्र सरकार में भाजपा की तीसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी है। अगर उद्धव गुट के 7 सांसद इसमें शामिल होते हैं, तो शिंदे गुट के सांसदों की संख्या दोगुनी होकर 14 हो जाएगी, जो उनकी सौदेबाजी की ताकत को काफी बढ़ा देगी।
लोकसभा चुनाव में एनवीए ने किया था बेहतरीन प्रदर्शन
दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले महाविकास अघाड़ी (एमवीए) के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। हालिया लोकसभा चुनावों में एमवीए ने महाराष्ट्र में बेहतरीन प्रदर्शन किया था, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह था। इस संभावित टूट के बाद गठबंधन के हौसले पस्त हो सकते हैं, खासकर तब जब राज्य में कुछ ही महीनों बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।














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