Trump Tariff: 'हमारी नीति किसी के दवाब में नहीं बदलेगी', ट्रंप की धमकी पर भारत का करारा जवाब
MEA India On Trump Tariff: भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने हालिया प्रेस वार्ता में वैश्विक और क्षेत्रीय भू-राजनीति पर भारत का कड़ा रुख स्पष्ट किया है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अमेरिका द्वारा रूस से ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर प्रस्तावित 500% टैरिफ के मुद्दे पर जवाब देते हुए कहा कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
इसके साथ ही, मंत्रालय ने बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा और ताइवान जलडमरूमध्य में बढ़ते सैन्य तनाव पर भी अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और क्षेत्रीय स्थिरता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।

US 500 percent tariff on Russia oil: ट्रंप को भारत का करारा जवाब
अमेरिका के प्रस्तावित 500% टैरिफ बिल पर भारत ने साफ कर दिया है कि उसकी ऊर्जा नीति किसी बाहरी दबाव में नहीं बदलेगी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि 1.4 अरब भारतीयों की जरूरतों के लिए 'सस्ती ऊर्जा' जुटाना प्राथमिकता है। भारत ग्लोबल मार्केट के बदलते स्वरूप के अनुसार अलग-अलग स्रोतों से तेल और यूरेनियम खरीदना जारी रखेगा। भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक संप्रभु मुद्दा है, जिसे बाजार की गतिशीलता और घरेलू जरूरतों के आधार पर ही तय किया जाएगा।
PM मोदी और ट्रंप के बीच 2025 में 8 बार फोन पर बातचीत हुई- MEA
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक के भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर दिए गए बयानों का खंडन किया है। MEA प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि दोनों देश पिछले साल फरवरी से एक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते के लिए निरंतर बातचीत कर रहे हैं। भारत ने लुटनिक की टिप्पणियों को 'गलत' बताते हुए कहा कि हम कई बार समझौते के बेहद करीब रहे हैं। भारत अब भी दो पूरक अर्थव्यवस्थाओं के बीच सकारात्मक डील के लिए इच्छुक है। गौर करने वाली बात यह है कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच 2025 में 8 बार फोन पर बातचीत हुई है, जो द्विपक्षीय साझेदारी की मजबूती को दर्शाती है।
भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम- MEA
विदेश मंत्रालय के बयानों से यह स्पष्ट है कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम है। चाहे वह रूस से व्यापार का मुद्दा हो या क्षेत्रीय पड़ोसियों के साथ संबंध, भारत का रुख 'नेशन फर्स्ट' (राष्ट्र प्रथम) की भावना से प्रेरित है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत अब एक ऐसे शक्ति केंद्र के रूप में उभर रहा है जो अपने हितों की रक्षा के लिए किसी भी महाशक्ति के आर्थिक या राजनीतिक दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है।
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बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर MEA ने जताई चिंता
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों पर भारत ने सख्त लहजे में चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि चरमपंथियों द्वारा घरों और व्यापारों को निशाना बनाना गंभीर मामला है। भारत ने इसे 'निजी दुश्मनी' बताकर खारिज करने की प्रवृत्ति की आलोचना की, क्योंकि इससे अपराधियों के हौसले बढ़ते हैं। MEA ने बांग्लादेशी प्रशासन से आग्रह किया है कि वह इन सांप्रदायिक मामलों पर तेजी से कार्रवाई करे ताकि अल्पसंख्यकों में व्याप्त डर और असुरक्षा को कम किया जा सके।
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ताइवान और इंडो-पैसिफिक में तनाव
ताइवान के पास चीन की सैन्य गतिविधियों पर भारत ने संयम बरतने की अपील की है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति भारत के समुद्री व्यापार और आर्थिक हितों के लिए अनिवार्य है। भारत ने स्पष्ट किया कि किसी भी पक्ष को 'एकतरफा कार्रवाई' या बल प्रयोग से बचना चाहिए। भारत इस क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रहा है और चाहता है कि सभी विवादों का समाधान शांतिपूर्ण और कूटनीतिक तरीकों से ही निकाला जाए।












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