'गधी के दूध से मिलती सुंदरता, महारानी भी नहाती', बयान देने वाले UP सरकार के मंत्री कौन हैं? कितने पढ़े-लिखे?
UP Minister Dharam Pal Singh Explain Singh Donkey Milk Benefits: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। ऐसे में सत्ताधारी भाजपा के मंत्री लगातार जनसंपर्क और योजनाओं का प्रचार कर रहे हैं। इसी क्रम में पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह का एक बयान वायरल हो गया, जिसमें उन्होंने गधी के दूध के सौंदर्य गुण गिनाए और दावा किया कि ब्रिटेन की महारानी गधे के दूध से स्नान करती थीं।
मंत्री ने महिलाओं से कहा कि क्रीम लगाना मत छोड़ना। बयान के दौरान उन्होंने मिस्र की रानी क्लियोपेट्रा की जगह ब्रिटेन की महारानी बता दिया, जिस पर विपक्ष ने मजाक उड़ाया। यह घटना शिक्षा, बोलने की शैली और सियासी बयानबाजी की बहस छेड़ गई है। आइए विस्तार से जानते हैं कि मंत्री असल में कितने पढ़े-लिखे?

Who Is Dharam Pal Singh: धर्मपाल सिंह कौन हैं? पूरा परिचय
धर्मपाल सिंह उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक जाना-पहचाना नाम हैं और वर्तमान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। वे बरेली जिले की आंवला विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक हैं। उनका जन्म 15 जनवरी 1953 को हुआ था। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने एमए, एलएलबी, बीएड और बीटीसी की डिग्रियां एमजेपी रोहिलखंड विश्वविद्यालय, बरेली से प्राप्त की हैं।
राजनीति में आने से पहले वे कृषि और शिक्षण कार्य से जुड़े रहे। संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर लंबे अनुभव के कारण उन्हें भाजपा के प्रमुख ओबीसी नेताओं में गिना जाता है। उनके पिता का नाम मिश्री सिंह है। उनकी पत्नी वंदना सिंह हैं, जिनसे उनका विवाह वर्ष 1970 में हुआ था। उनके तीन पुत्र हैं और परिवार आमतौर पर सक्रिय राजनीति से दूर रहता है। वर्ष 2022 के चुनावी हलफनामे के अनुसार उनकी कुल संपत्ति 2 करोड़ रुपये से अधिक थी, जबकि उन पर कोई देनदारी नहीं थी।
Dharam Pal Singh Political Career: राजनीतिक सफर - टाइमलाइन
- 1953: जन्म, बरेली जिले के गुलड़िया गौरीशंकर गांव में।
- 1996: आंवला से पहली बार विधायक निर्वाचित।
- 1997: मायावती सरकार में लोक निर्माण एवं पर्यटन राज्य मंत्री।
- 1997-2002: कल्याण सिंह, रामप्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह सरकारों में पंचायती राज मंत्री।
- 2002-2003: मायावती सरकार में श्रम मंत्री।
- 2012: आंवला से पुनः विधायक।
- 2017: योगी सरकार 1.0 में सिंचाई मंत्री बने।
- 2022: योगी सरकार 2.0 में पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री बनाए गए। (वर्तमान पद)
वे पांच बार आंवला से विधायक रह चुके हैं। पंचायती राज, श्रम, सिंचाई और अब पशुधन विभाग संभालने का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वे निराश्रित गोवंश संरक्षण, डेयरी विकास और पशु कल्याण योजनाओं पर फोकस कर रहे हैं।
गधी के दूध के बारे में सच को समझें...
ऐतिहासिक किंवदंती: मिस्र की रानी क्लियोपेट्रा (Cleopatra VII) के बारे में प्रचलित है कि वे अपनी त्वचा को नरम और जवां रखने के लिए गधी के दूध से स्नान करती थीं। यह कहानी सदियों से चली आ रही है, हालांकि समकालीन दस्तावेजों में इसका मजबूत प्रमाण नहीं मिलता।
वैज्ञानिक आधार: गधी के दूध में लैक्टिक एसिड होता है, जो त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद करता है। यह मानव दूध के सबसे करीब माना जाता है। आज कई स्किनकेयर उत्पादों में Donkey Milk का इस्तेमाल होता है। हालांकि, यह चमत्कारी इलाज नहीं है। अस्थमा या अन्य बीमारियों के दावे पूर्ण रूप से सिद्ध नहीं हैं।
कीमत क्यों इतनी ज्यादा?
- एक गधी प्रतिदिन सिर्फ 0.5-1.5 लीटर दूध देती है।
- भारत में कीमत: ₹1,500 से ₹7,000 प्रति लीटर (औसत ₹3,000-₹6,000)।
- विदेशों में $40 से $250+ प्रति लीटर तक।
भारत में डेयरी उद्योग मजबूत है, लेकिन गधी का दूध कॉस्मेटिक और औषधीय बाजार में लोकप्रिय है। गधी के दूध का वैज्ञानिक महत्व है, लेकिन इसे चमत्कारी बताना उचित नहीं। मंत्री का बयान एक बार फिर याद दिलाता है कि सार्वजनिक जीवन में तथ्यों की सटीकता और बोलने की शैली दोनों महत्वपूर्ण हैं।













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