...जब अपने ही कानों पर विश्वास नहीं कर पा रहा था कोई!
आप घूम रहे हों या दोस्तों से बात कर रहे हों या फिर रजाई में बैठे संगीत की धुनों पर लहरती सुरीली आवाज का आनंद ले रहे हों। शायद यह कई दशकों पहले नामुमकिन सा था। लेकिन एक ऐसा दिन आया जब लोगों को अपने ही कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था। आज ही के दिन यानी 21 नवम्बर 1877 को थॉमस एल्वा एडिसन ने एक ऐसा अविष्कार कर डाला जिसमें इंसान खुद की आवाज को रिकॉर्ड कर सकता था।

एडिसन ने दुनिया के सामने पहला फोनोग्राफ पेश किया। जिस में खुद की आवाज को रिकॉर्ड करने के बाद सुना जा सकता था। यह अविष्कार अचानक से हुआ था। दरअसल, एडिसन टेलीग्राफ और टेलीफोन से जुड़ी किसी अद्भुत चीज का अविष्कार करना चाहते थे। लेकिन इस बीच जब वह संदेशों को पेपर टेप पर उतारने और फिर उन्हें टेलीग्राफ के जरिए भेजने वाली मशीन तैयार कर रहे थे, तभी उन्होंने अपनी ही रिकॉर्ड की हुई आवाज को दोबारा सुना तो वह अपने इस अविष्कार पर अचंभा हुआ।
बताया जाता है कि पहला फोनोग्राफ टिन की परत से ढका हुआ सिलेंडर के आकार का उपकरण था जो आवाज को रिकॉर्ड कर फिर से सुना सकता था।
इसके बाद थॉमस एल्वा एडिसन इतना प्रेरित हुए कि वह अपने दूसरे अविष्कार बिजली के बल्ब की दिशा में आगे बढ़ते चले गए। उन्होंने अविष्कार कर दुनिया को एक बल्ब दिया। जिसके बाद फिर से उन्होंने फोनोग्राफ को एक मनोरंजक बनाने की सुझी। उन्होंने फोनोग्राफ मशीन को एक संगीत या आवाज सुनाने वाली मनोरंजक मशीन के रूप में 1887 विकसित कर दिया।












Click it and Unblock the Notifications