Monkey Attack on US Navy: अमेरिकी नेवी पर बंदरों का 'सर्जिकल स्ट्राइक', नाविक अस्पताल में भर्ती
Monkey Attack on US Navy: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में बारूदी सुरंगें हटाने के मिशन पर भेजे गए एक नौसैनिक जहाज, यूएसएस चीफ, के सैनिक पर थाईलैंड में एक बंदर ने हमला कर दिया। यह घटना तब हुई जब जहाज थाईलैंड के फुकेत में रुका था।
हालांकि सैनिक अब खतरे से बाहर है और उसे इलाज के लिए जापान स्थित बेस पर भेजा गया है, लेकिन इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर ली हैं।

बंदरों ने कैसे किया हमला
जब अमेरिकी नौसेना का माइंस्वीपर जहाज 'यूएसएस चीफ' फुकेत के तट पर था, तब वहां के स्थानीय बंदरों ने एक नाविक पर अचानक हमला कर दिया। हमले के बाद घायल सैनिक को तुरंत चिकित्सा सहायता दी गई और बाद में उसे बेहतर इलाज के लिए जापान के सासेबो स्थित अमेरिकी सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया। गनीमत यह रही कि इस अप्रत्याशित हमले के बावजूद नौसेना के मिशन में कोई देरी नहीं हुई और घायल नाविक की हालत अब स्थिर बताई जा रही है।
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थाईलैंड के खतरनाक 'मैकॉक बंदर'
थाईलैंड के 'मैकॉक' बंदर अपनी आक्रामकता के लिए पूरी दुनिया में कुख्यात हैं। ये बंदर अक्सर पर्यटकों और राहगीरों से खाने-पीने का सामान छीनने के चक्कर में हिंसक हो जाते हैं। स्थानीय प्रशासन भी इनसे परेशान रहता है क्योंकि ये न केवल चोट पहुंचाते हैं, बल्कि इनके जरिए 'हर्पस बी' जैसे खतरनाक वायरस फैलने का भी डर रहता है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सैन्य अभियानों में केवल दुश्मन सेना ही नहीं, बल्कि जंगली जानवर भी बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में बढ़ता तनाव
यह पूरा मिशन ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे भारी तनाव का हिस्सा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में बारूदी सुरंगें बिछाने वाली किसी भी ईरानी नाव पर सीधे गोली चलाई जा सकती है। यह इलाका वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच एक नाजुक सीजफायर यानी युद्धविराम की स्थिति बनी हुई है, लेकिन समुद्री सीमा पर दोनों देशों की नौसेनाएं एक-दूसरे के सामने पूरी तरह मुस्तैद खड़ी हैं।
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ईरान-अमेरिका संघर्ष का बैकग्राउंड
इस तनाव की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी, जब अमेरिका और इजराइल ने एक संयुक्त सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया था। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत हो गई थी, जिसके बाद से पूरे मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में हालात विस्फोटक बने हुए हैं। शांति वार्ताएं विफल होने के बाद अब अमेरिका अपनी समुद्री ताकत के जरिए ईरान की घेराबंदी कर रहा है। इसी सैन्य तैनाती के दौरान बंदर द्वारा किए गए हमले ने सैन्य जगत को हैरान कर दिया है।












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