वर्ल्ड कप में भारत की हार पर बांग्लादेश में जश्न.. तसलीमा नसरीन का फूटा गुस्सा, कहा- वो ऑटोमेटिक हिंदू विरोधी
Taslima Nasrin: बांग्लादेश की प्रसिद्ध और विवादित लेखिका, कवयित्री तस्लीमा नसरीन ने क्रिकेट विश्व कप फाइनल में आस्ट्रेलिया के हाथों मिली भारत की हार का जश्न मना रहे बांग्लादेशियों को देखकर हैरान रह गई हैं और उन्होंने कहा है, कि 'ये ऑटोमेटिक हिंदू विरोधी बन रहे हैं।'
19 अक्टूबर को खेले गये क्रिकेट वर्ल्ड कप फाइल में भारत को ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन हैरानी की बात ये थी, कि बांग्लादेश से कई ऐसे वीडियो सामने आए, जिनमें बांग्लादेश युवाओं को जश्न मनाते देखा गया और उन तस्वीरों ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है, क्योंकि 1971 में पाकिस्तान से मिली आजादी के बाद भारत ने ही बांग्लादेश की सालों तक मदद की है।

बांग्लादेश में भारत से नफरत क्यों?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में तस्लीमा नसरीन ने लिखा है, कि "बांग्लादेश के युवा मुसलमान खुश हैं, क्योंकि भारत विश्व कप हार गया। वे इतने भारत-विरोधी क्यों हैं, जबकि भारत ने उनके देश को आज़ाद कराया था और जरूरत की लगभग हर चीज, स्वास्थ्य देखभाल, मनोरंजन, कपड़े, मांस, प्याज जैसी चीजों के लिए आज भी बांग्लादेश भारत पर ही निर्भर हैं?"
तस्लीमा नसरीन ने इस बात को हैरान करने वाला बताते हुए लिखा है, कि "सरकारें उन्हें इस्लाम का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं, वे ऐसा करते हैं और इसलिए वो ऑटोमेटिक हिंदू विरोधी बन जाते हैं।"
आपको बता दें, कि भारत ने 1971 में बांग्लादेश को पाकिस्तान से आज़ाद कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बांग्लादेश मुक्ति संग्राम, जिसे 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के रूप में भी जाना जाता है, वो पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान के बीच एक संघर्ष था, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश को आज़ादी मिली थी।
ये युद्ध 25 मार्च 1971 को शुरू हुआ था, जब पाकिस्तानी सेना ने पूर्वी पाकिस्तान में बंगाली राष्ट्रवादियों पर क्रूर कार्रवाई शुरू की। लाखों बंगाली शरणार्थी के रूप में भारत भाग गए और भारत सरकार ने उन्हें मानवीय सहायता और सैन्य प्रशिक्षण प्रदान करना शुरू कर दिया।
बांग्लादेशी युवाओं को क्यों पढ़ना चाहिए इतिहास?
पाकिस्तानी सेना ने कम से कम 30 लाख बांग्लादेशी नागरिकों का कत्ल कर दिया था और लाखों बंगाली महिलाओं से बलात्कार किया गया था और तस्लीमा नसरीन समेत कई और बांग्लादेशी विचारक कह रहे हैं, कि बांग्लादेश के आज के युवाओं को नहीं पता है, कि पाकिस्तान ने उनके मां-बाप के साथ क्या किया था, इसीलिए आज वो पाकिस्तान के समर्थक बन रहे हैं।
3 दिसंबर 1971 को भारत ने बंगाली स्वतंत्रता सेनानियों के समर्थन में युद्ध में प्रवेश किया था। भारतीय सेना ने तुरंत बढ़त हासिल कर ली और 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सेना को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर कर दिया। पाकिस्तान के 90 हजार से ज्यादा सैनिकों ने भारत के सामने सरेंडर कर दिया था।
बांग्लादेश की मुक्ति भारत के लिए एक बड़ी जीत थी और दक्षिण एशिया के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था।
लेकिन, भारत की क्रिकेट वर्ल्ड कप में हार के बाद बांग्लादेशी युवाओं के जश्न की तस्वीरें देखकर एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा है, कि "शायद हमें बांग्लादेश को पाकिस्तान के सैन्य शासन के अधीन रहने देना चाहिए था। यदि वे हिंदुओं और भारत के प्रति इतने कृतघ्न और नस्लवादी हैं, तो हमने उन्हें क्यों आजाद कराया? वे शर्मिंदा हैं, कि हिंदुओं को उन्हें बचाना पड़ा और इसलिए मुस्लिमों को खुश करने के लिए हिंदुओं पर हमला करके वो इसकी भरपाई कर रहे हैं।"
आपको बता दें, कि 1990 के दशक की शुरुआत में लेखिका तस्लीमा नसरीन के लेखन ने आलोचनात्मक प्रशंसा और वैश्विक ध्यान जीता था। हालांकि, प्रोपेगेंडा के साथ-साथ कट्टरवाद को उजागर करने वाले कट्टरपंथ के खिलाफ उनके लेखन ने उनकी मातृभूमि में रूढ़िवादी मुस्लिमों को गुस्से से भर दिया, लिहाजा तस्लीमा को बांग्लादेश से भागकर यूरोप में शरण लेना पड़ा।
इस बीच बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों पर सिलसिलेवार हमले हुए हैं। पिछले महीने बांग्लादेश में इसी तरह के सिलसिलेवार हमलों में एक अस्सी वर्षीय हिंदू कवि की पिटाई की गई थी।
अगस्त 2023 में, एनजीओ 'सृष्टि ओ चेटोना' द्वारा जारी एक मानवाधिकार निगरानी रिपोर्ट में कहा गया था, कि "मंदिरों और अन्य सामुदायिक संपत्तियों पर हमले" या सामान्य अल्पसंख्यक विरोधी गालियां, "देश से निष्कासन और दुर्व्यवहार" की धमकियां मिलना हिंदुओं के लिए बांग्लादेश में आम बात हो गई है।
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