पर्यावरण संरक्षण को लेकर काम करेगा तालिबान, जलवायु परिवर्तन को बताया विश्व की सबसे बड़ी समस्या
तालिबान ने कहा कि ग्लोबल वॉर्मिंग के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में शामिल होने के लिए वो तैयार है और एक साथ मिलकर काम करना चाहता है।
काबुल, अगस्त 26: काबुल पर कब्जा करने और मानवाधारिक को कुचलने के बाद अब तालिबान एक और प्रोपेगेंडा किया है। अपने आप को एक अच्छा ऑर्गेनाइजेशन बताने की कोशिश करते हुए तालिबान ने ग्लोबल वॉर्मिंग को पूरी दुनिया के लिए बहुत बड़ी समस्या बताया है और तालिबान ने कहा है कि वो दुनिया के साथ मिलकर इस वैश्विक आपदाओं से निपटने के लिए काम करना चाहता है।

ग्लोबल वॉर्मिंग से लड़ेगा तालिबान
तालिबान के सांस्कृतिक आयोग के सदस्य अब्दुल कहर बल्खी ने कहा है कि इस्लामिक संगठन तालिबान वैश्विक मंच पर ग्लोबल वॉर्मिंग और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एक भूमिका निभाना चाहता हैं। अब्दुल कहर बल्खी ने न्यूजवीक अखबार को बताया कि, 'हम उम्मीद करते हैं कि न केवल क्षेत्रीय देशों द्वारा बल्कि पूरी दुनिया के द्वारा अफगानिस्तान के लोगों की वैध प्रतिनिधि सरकार को मान्यता दी जाएगी, क्योंकि तालिबान ने एक लंबे संघर्ष के बाद पूरे अफगानिस्तान के लोगों की मदद से तमाम बाधाओं को पार करते हुए अफगानी सरकार बनाने का काम किया है। इसके लिए तालिबान ने अपार बलिदान दिया है।

जलवायु परिवर्तन से लड़ना जरूरी
तालिबानी नेता अब्दुल कहर बल्खी ने कहा कि ''हमारा विश्वास है कि विश्व के पास एक अद्भुत मौका है कि एक साथ आकर इस वैश्विक चुनौती का सामना करें''। तालिबानी नेता ने कहा कि '''हम मानते हैं कि न केवल हमारे सामने बल्कि पूरी मानवता के सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए दुनिया के पास तालमेल बनाने और एक साथ आने का एक अनूठा अवसर है। अफगानिस्तान में सत्ता से बेदखल किए जाने के दो दशक बाद तालिबान की अधिक उदार छवि पेश करने के प्रयासों के बीच तालिबानी नेता की तरफ से यह टिप्पणी आई है। माना जा रहा है कि तालिबान लगातार प्रोपेगेंडा कर रहा है, ताकि उसकी वैश्विक छवि अच्छी हो सके।

कथनी-करनी में फर्क ही फर्क
अचानक ग्लोबल वॉर्मिंग और जलवायु परिवर्तन की बात करने वाले तालिबान का क्या हृदय परिवर्तन हो रहा है। बिल्कुल नहीं, क्योंकि पिछले 10 दिनों में ही अफगानिस्तान में पुराना वाला जंगलराज कायम हो चुका है। 1996 से 2001 तक अपने शासन के दौरान तालिबान ने भारी नरसंहार किया। महिलाओं के अधिकारों को रौंद कर रख दिया। उपजाई जमीन के विशाल भूखंडों को तालिबानी आतंकियों ने जला डाला, विश्वभर के आतंकियों को पनाह दी और महिलाओं को कठोर शरीयत कानून के जाल में फंसाकर उन्हें सेक्स गुलाम बना डाला, जिनके पास कमरे से बाहर जाने की इजाजत तक नहीं थी और बर्बर जाहिल तालिबानी आतंकी उनके साथ सेक्स गुलामों जैसा सलूक करते थे। और इस बार अचानक से तालिबान ने ग्लोबल वॉर्मिंग और जलवायु परिवर्तन पर बात करना शुरू कर दिया है, जो प्रोपेगेंडा के अलावा कुछ और नहीं है।

लकड़ियों की भारी कटाई
तालिबान ने जलवायु परिवर्तन को रोकने का लक्ष्य बनाया है, लेकिन वनों को काटना और लकड़ियों की अवैध सप्लाई करना उसके बड़े धंधों में से एक है। लाखों एकड़ की जमीन से लकड़कियों को काटकर तालिबान उसकी सप्लाई पाकिस्तानी बाजारों में करता है। फिर से सत्ता पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने अब एक अधिक 'समावेशी' समाज बनाने की कसम खाई है और दावा किया है कि महिलाओं के अधिकारों का सम्मान किया जाएगा और लड़कियां अभी भी स्कूल जा सकेंगी। लेकिन संयुक्त राष्ट्र पहले ही चेतावनी दे चुका है कि महिलाओं के अधिकारों का गंभीर तरीकों से हनन किया जाएगा। लोगों को बीज बाजार फिर से फांसी पर लटकाया जाएगा, कोड़े मारे जाएंगे...कामकाजी महिलाओं को तो अभी से ऑफिस नहीं जाने का फरमान सुना दिया गया है। यानि, सौ बात की एक बाद शरिया कानून लगाकर तालिबान ने अफगानिस्तान को सैकड़ों साल पीछे कबीलों वाले युग में ले जाने की पूरी प्लानिंग कर दी है।

लोगों से बर्बर सलूक
इस बीच देश के पूर्व गृह मंत्री मसूद अंदाराबी ने दावा किया है कि मासूम बच्चों की हत्या की जा रही है। कई अफगान स्पष्ट रूप से तालिबान के नए वादों पर संदेह कर रहे हैं और देश छोड़ने के लिए भाग रहे हैं, जिससे काबुल के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अफरा-तफरी मच गई है। अभी भी कई हजार अफगान नागरिक काबुल हवाई अड्डे पर मौजूद हैं और माना जा रहा है कि लाखों ऐसे अफगान हैं, जो देश छोड़ना चाहते हैं।

कैसे सरकार चलाएगा तालिबान?
इस वक्त अफगानिस्तान में कोई सरकार नहीं है और हजारों बंदूकधारियों ने पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर रखा है। इसके साथ ही तालिबान की विदेश नीति क्या होगा, वो अफगानिस्तान में निवेश लाने के लिए क्या करेगा, बैंकों का कैसे चलाएगा, लोगों को कैसे खिलाएगा...अभी तक कुछ भी साफ नहीं किया है। तालिबान के प्रवक्ता सुलैह शाहीन और जबीहुल्ला मुजाहिद ने दावा किया है कि विदेशी निवेशकों को लुभाने की उनकी कोशिशों में उनकी नई सरकार में महिलाओं की हिस्सेदारी होगी। लेकिन पिछले हफ्ते ऐसी चौंकाने वाली खबरें आई थीं कि इस्लामिक आतंकवादी पूरे अफगानिस्तान के शहरों में महिलाओं और लड़कियों का पीछा कर रहे हैं। जिहादी कमांडर कथित तौर पर उन क्षेत्रों में इमामों को आदेश दे रहे थे जिन पर उन्होंने कब्जा कर लिया है, ताकि वे अपने लड़ाकों के निकाह के लिए 12 से 45 वर्ष की अविवाहित महिलाओं की लिस्ट तालिबान को सौंपे।












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