अफगानिस्तान में फिर से हालात बिगड़ने की आशंका, तालिबान ने 2021 ब्लास्ट के ISIS आतंकी को मारा, नये जंग का आगाज?

तालिबान और ISIS-K, दोनों के इस्लामी संगठन होने के बावजूद, दोनों के बीच छत्तीस का आंकड़ा है और ISIS-K का मकसद, अफगानिस्तान पर कब्जा कर उसे अपने बेस के तौर पर इस्तेमाल करने का है।

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Afghanistan News: अफगानिस्तान के तालिबान शासकों ने दावा किया है, कि 2021 में काबुल के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के एबे गेट पर हुए भीषण आत्मघाती हमले के मास्टरमाइंड आतंकवादी को मार दिया गया है। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के मुताबिक, घातक आत्मघाती बम विस्फोट की योजना बनाने वाले आईएसआईएस-के नेता को तालिबान ने मार दिया है।

हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने मारे गये आईएसआईएस-के के नेता का नाम नहीं बताया है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के कॉर्डिनेटर जॉन किर्बी ने मारे गये आतंकी को "भयावह हमले का मास्टरमाइंड" कहा है। ये भीषण आतंकी हमला उस वक्त किया था, जब अमेरिकी सैनिक काबुल एयरपोर्ट से वापस लौट रहे थे और काबुल में तालिबान का कब्जा हो गया था।

हालांकि, जॉन किर्बी ने यह नहीं बताया, कि तालिबान ने आईएसआईएस-के नेता को कब मारा, लेकिन इसे "हाई-प्रोफाइल नेतृत्व के नुकसान की श्रृंखला" में से एक बताया, जिसे आईएसआईएस-के ने इस साल झेला है।

ये भीषण बम विस्फोट 26 अगस्त 2012 को काबुल एयरपोर्ट परिसर में किया गया था, जब भारी संख्या में लोग अफगानिस्तान से निकलने की कोशिश कर रहे थे। इस बम धमाके में 170 अफगान और अमेरिकी सेना के 13 जवान मारे गये थे। इस आत्मघाती बम विस्फोट को करने वाला आतंकवादी अब्दुल रहमान अल-लोघरी को इस घटना से कुछ दिन पहले ही जेल से रिहा किया गया था, जब तालिबान ने काबुल पर नियंत्रण कर लिया था।

ISIS के साथ तालिबान की नई लड़ाई

काबुल पर कंट्रोल करने के बाद तालिबान शांति के साथ अफगानिस्तान पर शासन करना चाहता है, ताकि वो मान्यता हासिल कर पाए, लेकिन आईएसआईएस का मकसद पूरी दुनिया में इस्लामिक शासन की स्थापना करना है, लिहाजा वो अफगानिस्तान को अपना बेस बनाना चाहता है, लिहाजा वो तालिबान की जगह खुद को काबुल में देखना चाहता है।

ISIS-K, ISIS-खुरासान का ही एक हिस्सा है, जो उसी के लिए लड़ता है। ISIS-K अफगानिस्तान और आसपास के क्षेत्र में सक्रिय है। अगस्त 2021 में अफगानिस्तान से अमेरिका की वापसी के बाद से तालिबान ने पूरे देश में आईएसआईएस-के पर नकेल कसने की कोशिश की है, लेकिन आतंकी संगठन को नष्ट करने में तालिबान कामयाब नहीं हो पाया है।

वहीं, अमेरिका ने कहा है, कि इस ऑपरेशन में उसका हाथ नहीं है, लेकिन उसने मामले को संवेदनशील बताते हुए ज्यादा जानकारी देने से इनकार कर दिया। अमेरिका ने मारे गये आतंकी की पहचान जाहिर करने से भी इनकार कर दिया।

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अफगानिस्तान में फिर अशांति का आगाज

माना जा रहा है, कि आईएसआईएस अपने आतंकी की मौत का बदला अब तालिबान से लेगा, लिहाजा इस बात की पूरी आशंका है, कि अफगानिस्तान में फिर से अराजगता फैलने वाली है। पिछले दिनों यूएस सेंन्ट्रल कमांड के कमांडर जनरल एरिक कुरिल्ला ने कहा था, कि "आतंकवादी समूह ISIS ने इस क्षेत्र में अपने हमले बढ़ा दिए हैं और अफगानिस्तान के बाहर अमेरिकी मातृभूमि और विदेशों में अमेरिकी हितों के खिलाफ हमलों की योजना बनाने की कोशिश कर रहा है"।

आईएसआईएस-के इस्लामी कानून की अपनी व्याख्या के आधार पर एक वैश्विक खिलाफत बनाने के इस्लामिक स्टेट के लक्ष्य को आगे बढ़ाना चाहता है। इस इस्लामिक आतंकवादी संगठन का लक्ष्य पूरी दुनिया में इस्लामिक शासन की नींव रखना है।

वहीं, ISIS-K पर सालों से नजर रखने वाले एक्सपर्ट्स का मानना है, कि 2015 में संगठन के अस्तित्व में आने के बाद से ही अफगानिस्तान में ISIS-K एक्टिव होने लगा था और हालिया हमलों की संख्या में आने वाले वक्त में तेजी से इजाफा होने वाला है। पिछले साल भी ISIS-K ने राजधानी काबुल में शिया मुसलमानों की मस्जिद में बम धमाके कर कई सौ लोगों की जान ले ली थी, लिहाजा अफगानिस्तान में नये सिरे से जंग का आगाज होने की आशंका जताई जा रही है।

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