अफगानिस्तान के एयरपोर्ट का संचालन करेगा UAE, तालिबान ने किया करार
काबुल, 26 मई। अफगानिस्तान पर नियंत्रण हासिल करने के बाद तालिबान के सामने देश को चलाने की मुश्किल चुनौती है। जिस तरह से तालिबान के नियंत्रण के बाद काबुल एयरपोर्ट पर यात्री विमान के विंग्स पर बैठकर देश छोड़ने को मजबूर हुए और आसमान से नीचे गिरे उन तस्वीरों को दुनिया ने देखा था। लोग उन तस्वीरों को भुला नहीं सके हैं। इस बीच तालिबान ने युनाइटेड अरब अमीरात के साथ अफगानिस्तान में एयरपोर्ट के संचालन का करार किया है। कई महीनों तक यूएई, तुर्की और कतर से बातचीत के बाद आखिरकार तालिबान ने यूएई के साथ यह समझौता किया है।

तालिबान के डेप्युटि ट्रांसपोर्ट एवं सिविल एविएशन मंत्री गुलाम जैलानी वफा ने मंगलवार को यूएई के साथ यह करार किया है। यह करार जीएएसी कॉर्पोरेशन के साथ किया गया है। उप प्रधानमंत्री मंत्री मुल्लाह अब्दुल गनी बरादर की उपस्थिति में यह समझौता किया गया है। इस समझौते पर साइन के बाद मुल्ला बरादर ने कहा कि देश की सुरक्षा मजबूत है और इस्लामिक अमीरात हमारे साथ विदेशी निवेशक के साथ काम करने के लिए तैयार है। बरादर ने कहा कि इस समझौते के बाद सभी विदेशी उड़ानें अफगानिस्तान से सुरक्षित उड़ान भरेंगी।
गुलाम जैलानी वफा ने कहा कि जब हम इतनी आपात स्थिति में हैं यूएई ने हमारी मदद के लिए हाथ बढ़ाया है, वह हमे तकनीकी सहायता मुहैया कराएगी और टर्मिनल की मरम्मत में भी मदद करेंगे। बता दें कि जीएएसी कॉर्पोरेशन मल्टिनेशनल कंपनी है जोकि यूएई में एविएशन की सुविधा मुहैया कराती है। गौर करने वाली बात है कि तालिबान ने अफगानिस्तान पर अगस्त 2021 में नियंत्रण हासिल कर लिया था और पिछले सरकार गिर गई थी।
दिसंबर 2021 में तुर्की और कतर की कंपनी ने काबुल एयरपोर्ट के लिए एक एमओयू साइन किया था। यह एमओयू काबुल, सहित बल्ख, हेरात, कंधार, खोस्त एयररोप्ट के लिए भी था, जोकि फिलहाल संचालन में नहीं है और उन्हें फिर से चलाने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। अफगानिस्तान में आर्थिक संकट के चलते इन एयरपोर्ट का संचालन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में यूएई के साथ करार के बाद तालिबान को उम्मीद है कि एक बार फिर से एयरपोर्ट का संचालन हो सकेगा।












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