तालिबान का कट्टरपंथी ज्ञान, महिलाओं का काम सिर्फ बच्चे पैदा करना, कैबिनेट में उनके लिए जगह नहीं
तालिबान ने कहा है कि महिलाओं का काम बच्चों को जन्म देना है, उनके लिए सरकार में कोई जगह नहीं है।
काबुल, सितंबर 10: 15 अगस्त को काबुल पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने 7 सितंबर को अफगानिस्तान में अंतरिम सरकार की घोषणा कर दी। जिसमें एक भी महिला को स्थान नहीं दिया गया। जिसकी वजह से दुनियाभर में कहा गया कि तालिबान ने जिस तरह की सरकार बनाने का वादा किया था, उसे वो बिल्कुल नहीं निभा रहा है। ऐसे में अब तालिबान की तरफ से बयान आ गया है और तालिबान ने कहा है कि महिलाओं का काम सिर्फ बच्चे पैदा करना है और सरकार में उनके लिए कोई जगह नहीं है।
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महिलाओं पर तालिबान का ज्ञान
तालिबान शासन के तहत अफगानिस्तान में सरकार में महिलाओं को शामिल किए जाने की सभी संभावनाओं को खारिज करते हुए आतंकवादी संगठन तालिबान के एक प्रवक्ता ने गुरुवार को कहा कि महिलाओं को खुद को सिर्फ बच्चों को जन्म देने तक ही सीमित रखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को कैबिनेट में मंत्रियों के रूप में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। तालिबान की ओर से यह बयान ऐसे समय में आया है जब सैकड़ों अफगान महिलाएं अपनी जान जोखिम में डालकर तालिबान के शासन के विरोध में सड़कों पर उतर आई हैं।

महिलाओं का दुश्मन तालिबान
तालिबान के प्रवक्ता सैयद जेकरुल्ला हाशिमी ने टोलो न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में अफगानिस्तान में मौलवियों की सरकार पर कहा कि तालिबान की कैबिनेट में महिलाओं के लिए कोई स्थान नहीं है। और तालिबान में जो भी मंत्री बनेंगे वो सभी पुरूष होंगे। तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि 'ये एक तरह से बड़ी जिम्मेदारी है, जिसे महिलाएं किसी भी हाल में धारण नहीं कर सकती हैं।' तालिबानी की तरफ से साफ करते हुए कहा गया है कि महिलाओं का कैबिनेट में होना बिल्कुल जरूरी नहीं है और महिलाओं का काम सिर्फ बच्चों को जन्म देना है। तालिबान ने कहा है कि जो महिलाएं अफगानिस्तान में प्रदर्शन कर रही हैं, वो अफगानिस्तान की सभी महिलाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं। आपको बता दें कि, अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने हाल ही में महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करने की कसम खाई थी और कहा था कि उन्हें सरकारी नौकरी दी जाएगी। लेकिन, तालिबान अपने वादे से पलट चुका है।

1996 में महिलाओं की स्थिति
आपको बता दें कि, 1996 से 2001 तक अफगानिस्तान में अपने तालिबान शासन के दौरान महिलाएं काम नहीं कर सकती थीं, लड़कियों को स्कूल जाने की अनुमति नहीं थी और महिलाओं को अपना चेहरा और शरीर पूरी तरह से ढंकना पड़ता था। अगर महिलाओं को घर से निकलने की जरूरत पड़ती थी तो उनके साथ कोई ना कोई पुरूष रिश्तेदार का होना जरूरी था। वहीं, इस बार भी तालिबान ने महिलाओं को घर से अकेले बाहर निकलने पर शर्त रखा है। तालिबान ने कहा है कि अगर कोई महिला अपने घर से तीन दिनों से ज्यादा वक्त के लिए निकलती हैं, तो उनके साथ पुरूष रिश्तेदार का होना जरूरी है। महिलाएं 3 दिनों से ज्यादा वक्त के लिए अकेले घर से बाहर नहीं निकल सकती हैं।

महिलाओं के खेल पर प्रतिबंध
इसके साथ ही तालिबान महिलाओं के खेलने पर प्रतिबंध लगा चुका है। तालिबान ने बुधवार को कहा कि अफगान महिलाएं क्रिकेट सहित दूसरे खेलों में भाग नहीं ले सकतीं क्योंकि खेलने की वजह से उनके जिस्म का हिस्सा कपड़ों से बाहर आता है। तालिबान के सांस्कृतिक आयोग के उप प्रमुख अहमदुल्ला वासिक ने मीडिया को बताया कि महिलाओं के लिए किसी खेल में हिस्सा लेना कोई जरूरी नहीं है, इसीलिए अब अफगानिस्तान की महिलाएं कोई खेल नहीं खेलेंगी। इसी हफ्ते की शुरुआत में तालिबान ने फैसला किया था कि केवल महिला शिक्षक ही महिला छात्रों को पढ़ा सकती है। और अगर शिक्षकों की कमी होती है तो बूढ़े आदमी महिलाओं को पढ़ा सकते हैं।












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