Taliban Minister In India: भारत आए तालिबान के मंत्री, देवबंद जाने के पीछे क्या मकसद और झंडों पर क्या विवाद?
Taliban Minister In India: अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी गुरुवार को भारत पहुंचे। यह भारत की यात्रा 2021 में अमेरिकी सेना की वापसी और तालिबान की सत्ता में लौटने के बाद किसी शीर्ष तालिबान नेता की पहली यात्रा है। मुत्तकी की यह सात दिवसीय यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत तालिबान सरकार के साथ अपने संबंधों को और बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है।
गर्मजोशी से हुआ स्वागत
मुत्तकी की ये यात्रा यूनाइटेड नेशन्स की अनुमति के बाद हो रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मुत्तकी का गर्मजोशी से स्वागत किया और कहा कि भारत उनके साथ द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत करने की उम्मीद रखता है।

मुलाकातें और दौरे
मुत्तकी इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से चर्चा करेंगे। इसके अलावा वह दारुल उलूम देवबंद मदरसा और आगरा में ताजमहल का दौरा भी करेंगे। इस साल की शुरुआत में, विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने दुबई में मुत्तकी से मुलाकात की थी ताकि अफगानिस्तान की तत्काल विकास संबंधी जरूरतों पर चर्चा की जा सके।
रूस यात्रा के बाद भारत दौरा
मुत्तकी की यह यात्रा रूस में हुई बैठकों के बाद हो रही है। रूस ही एकमात्र देश है जिसने तालिबान प्रशासन को आधिकारिक रूप से मान्यता दी है। भारत ने तालिबान के सत्ता में आने के बाद अफगानिस्तान को मानवीय और विकास सहायता प्रदान की है और हजारों अफगान शरणार्थियों को आश्रय दिया है।
झंडों पर क्या विवाद?
मुलाकात के दौरान झंडों का स्थान एक कूटनीतिक चुनौती बन सकता है। चूंकि भारत तालिबान को आधिकारिक मान्यता नहीं देता है। इसलिए अधिकारियों को यह तय करना होगा कि बैठक में कौन सा झंडा दिखाया जाएगा या फिर झंडे ही नहीं दिखाए जाएंगे। ये गौर करने वाली बात होगी कि जब बैठक होगी तो कौन-सा झंडा बैकग्राउंड में देखने को मिलेगा। काबुल और दुबई में पूर्व बैठक में भी झंडों को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ था।
संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी और यात्रा अवधि
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति ने मुत्तकी को 9 से 16 अक्टूबर के बीच भारत यात्रा की अनुमति दी। अधिकारियों के अनुसार, यह यात्रा पहले से तय योजनाओं के लिए मील का पत्थर साबित होगी, जो प्रतिबंधों के कारण स्थगित हो गई थीं।
भारत-तालिबान संबंध का इतिहास और आज
भारत और तालिबान ने मानवीय और डिवेलपमेंट के जरिए अपने संबंध मजबूत किए हैं। इस महीने की शुरुआत में जयशंकर ने मुत्तकी से अफगानिस्तान में हाल के भूकंप पर संवेदना व्यक्त की और राहत सहायता भी भेजी थी। भारत ने तालिबान-शासित अफगानिस्तान को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है, इसलिए दूतावास में अभी भी इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ अफगानिस्तान का झंडा फहराया जाता है।
बैकडोर डिप्लोमेसी का महत्व
2021 में अमेरिका के अफगानिस्तान छोड़ने और तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद भारत ने काबुल में अपना दूतावास बंद कर दिया था। तब से औपचारिक संबंध नहीं थे, लेकिन भारत लंबे समय से तालिबान के साथ बैकडोर डिप्लोमेसी कर रहा है।
मुलाकात का एजेंडा
विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, मुत्तकी की दिल्ली यात्रा में जयशंकर से अफगानिस्तान में मानवीय सहायता, वीजा, व्यापारियों की सुविधा और अफगान नागरिकों के मामलों पर चर्चा हो सकती है। इसके अलावा ड्राय फ्रूट एक्सपोर्ट, चाबहार-रूट, पोर्ट लिंक, रीजनल सिक्योरिटी और आतंकवाद पर रोक जैसे मुद्दों पर भी बात हो सकती है।
भारत का नजरिया
एसोसिएट प्रोफेसर राजन राज (स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज, JNU) के अनुसार, भारत अब तालिबान सरकार को गंभीरता से ले रहा है। भले ही भारत ने तालिबान को औपचारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन बातचीत और मंत्रीस्तरीय दौरे लगातार हो रहे हैं।
भारत के हित और क्षेत्रीय संतुलन
राजन राज कहते हैं कि यह साफ संदेश देता है कि भारत तालिबान को अफगानिस्तान का प्रतिनिधि संस्था मान रहा है। भारत को यह अनुमान है कि तालिबान अफगानिस्तान में लंबे समय तक रहेगा, इसलिए बातचीत आवश्यक है। इसके जरिए अफगानिस्तान अपने ऊपर लगे कारोबारी और आर्थिक प्रतिबंधों को कम कर सकता है।
एक नया चैप्टर
तालिबान सरकार के करीब 5 साल शासन के बाद, विदेश मंत्री मुत्तकी की भारत यात्रा एक नया चैप्टर खोल रही है। यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों के लिए, बल्कि अफगानिस्तान के लोगों के लिए मानवीय और विकासात्मक सहयोग को मजबूत करने में भी अहम मानी जा रही है।
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