अफगान लड़कियों की पढ़ाई पर पाबंदी, अपनी बेटियों को विदेशों में पढ़ाते हैं तालिबानी नेता, कबूलनामा

तालिबान के दो दर्जन से अधिक शीर्ष नेता अपनी बेटियों को दोहा, पेशावर और कराची के स्कूलों में शिक्षा दे रहे हैं और कई तालिबान नेताओं की बेटियां अब डॉक्टर भी बन चुकी हैं।

काबुल, मई 13: पिछले साल अगस्त में अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान में लड़कियों की पढ़ाई पर पाबंदी लगा दी है और तालिबान शासन हर रोज महिलाओं की स्वतंत्रता खत्म करने के लिए नये फरमान जारी कर रहा है। अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति सेक्स गुलाम जैसी कर दी गई है, लेकिन तालिबानी नेता खुद अपनी बेटियों को विदेश में पढ़ाते हैं और इसका कबूलनाना खुद तालिबान के मुख्य प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने की है।

सुहैल शाहीन का कबूलनामा

सुहैल शाहीन का कबूलनामा

तालिबान के मुख्य प्रवक्ता सुहैल शाहीन, जो लगातार मीडिया के सामने आते हैं, और अफगानिस्तान की महिलाओं पर लगने वाली नई नई पाबंदियों का ऐलान करते हैं, उन्होंने स्वीकार किया है कि, अफगानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा पर प्रतिबंध के बावजूद उनकी बेटियां स्कूल जाती हैं। उन्होंने टीवी एंकर पियर्स मॉर्गन के टॉक टीवी पर नए शो में यह खुलासा किया है। सुहैल शाहीन के इस खुलासे के बाद तालिबान की हिप्पोक्रेसी जाहिर होती है, कि एक तरह वो अफगानिस्तान की तमाम लड़कियों को इस्लामी आदेश के नाम पर मुर्ख बनाकर रखना चाहता है, लेकिन यही तालिबानी नेता अपनी बेटियों को पढ़ा-लिखा रहे हैं, ताकि उनकी तरक्की हो सके।

तालिबान की हिप्पोक्रेसी की हद

टीवी एंकर पीयर्स मॉर्गन अनसेंसर्ड द्वारा ट्विटर पर पोस्ट किए गए शो की एक क्लिप के मुताबिक, मॉर्गन ने तालिबान के प्रवक्ता से पूछा था, कि क्या उनकी बेटियों को शिक्षा प्राप्त करने की अनुमति दी गई है। जिसके जवाब में तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा कि, 'हां बिल्कु्ल। वे हिजाब में दिख रहे हैं, और इसका मतलब है कि हमने अपने लोगों के लिए इनकार नहीं किया है। टीवी शो में तनावपूर्ण बातचीत के दौरान पीयर्स मॉर्गन ने तालिबान के मुख्य प्रवक्ता और बड़े नेता सुहैल शाहीन को कहा कि, 'तो आपकी बेटियों को शिक्षा मिलती है क्योंकि वे वही करती हैं जो आप उन्हें बताते हैं'। आपको बता दें कि, सुहैल शाहीन की दो बेटियां हैं और दोनों कतर की राजधानी दोहा में पढ़ाई करती हैं। इतना ही नहीं, जिस स्कूल में सुहैल शाहीन की बेटियां पढ़ती हैं, उसमें लड़कियां फुटबॉल तक खेलती हैं और लड़कियों को अलग अलग तरह की शिक्षा दी जाती है।

तालिबान के पाखंड का खुलासा

तालिबान के पाखंड का खुलासा

सोशल मीडिया यूजर्स ने क्लिप पर प्रतिक्रिया देते हुए तालिबान को पाखंडी करार 0दिया है और एक ट्विटर यूजर ने कहा, 'इस आदमी की बेटियां हिजाब पहनती हैं, और शिक्षा प्राप्त करती हैं। इस शख्स की एक बेटी कतरी फुटबॉल टीम में खेलती है और इस शख्स की एक बेटी का बॉयफ्रेंड भी है। लेकिन, अफगान लड़कियों के लिए हिजाब पहनना अनिवार्य है और उनकी पढ़ाई-लिखाई बंद करवा दी गई है, और वे खेल नहीं खेल सकतीं'। वहीं, एक और ट्विटर यूजर ने कहा कि, तालिबान अपने बच्चों को स्कूल जाने और दूसरों की शिक्षा पर प्रतिबंध लगाने की अनुमति देता है। आपको बता दें कि, तालिबान के पिछले वादों के बावजूद अफगानिस्तान में स्कूल अभी भी लड़कियों के लिए फिर से नहीं खोले गए हैं कि वे अपनी शिक्षा फिर से शुरू कर पाएंगे।

सुहैल शाहीन की हैं दो बेटियां

सुहैल शाहीन की हैं दो बेटियां

आपको बता दें कि, तालिबान के दो दर्जन से अधिक शीर्ष नेता अपनी बेटियों को दोहा, पेशावर और कराची के स्कूलों में शिक्षा दे रहे हैं, जिसका खुलासा द प्रिंट बात करते हुए पिछले दिनों तालिबान के ही कुछ नेताओं ने किया था। इन नेताओं में स्वास्थ्य मंत्री कलंदर एबाद, उप विदेश मंत्री शेर मोहम्मद अब्बास स्टानिकजई और प्रवक्ता सुहैल शाहीन शामिल हैं। सुहैल शाहीन की दो बेटियां इस्लामिक अमीरात के राजनीतिक कार्यालय दोहा में पढ़ाई करती हैं, वहीं उनके तीन बेटे भी उसी स्कूल में पढ़ते हैं। परिवार से परिचित एक सूत्र ने कहा कि, सुहैल शाहीन की बड़ी बेटी ने अपने स्कूल की टीम के लिए फुटबॉल भी खेला है।

डॉक्टरी की पढ़ाई करती तालिबान की बेटियां

डॉक्टरी की पढ़ाई करती तालिबान की बेटियां

सूत्रों ने कहा कि, पाकिस्तान के नंगरहार विश्वविद्यालय और पाकिस्तान आयुर्विज्ञान संस्थान में तालिबान के नेताओं की बेटियां डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही हैं और तालिबानी नेताओं ने सुनिश्चित किया है, कि उनकी बेटियां डॉक्टर बने। द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने कहा कि स्टैनिकजई की बेटी ने एक प्रसिद्ध स्कूल में हाई स्कूल की शिक्षा के बाद, दोहा में अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी की है। और अब खुद सुहैल शाहीन ने इसकी पुष्टि कर दी है, कि उसकी बेटियां दोहा में पढ़ाई कर रही हैं, फुटबॉल खेलती हैं। यानि, जिस इस्लामी कानून की जंजीर में तालिबान ने अफगानिस्तान की आम लड़कियों को जकड़ दिया है, वो कानून खुद तालिबानी नेताओं की बेटियों पर लागू नहीं होते हैं।

महिलाओं पर पाबंदियों में जकड़ा

महिलाओं पर पाबंदियों में जकड़ा

आपको बता दें कि, इस्लामिक अमीरात अफगानिस्तान ने महिलाओं के नौकरी करने पर पाबंदी लगा दी है, जिसके बाद अफगानिस्तान की महिलाओं को नौकरी से निकाल दिया गया है। वहीं, महिलाओं को अपने पुरुष रिश्तेदार के बिना यात्रा करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। वहीं, अब अफगानिस्तान में सभी महिलाओं के लिए बुर्का पहनना अनिवार्य कर दिया गया है और कहा गया है कि, महिलाओं की आंख भी नहीं दिखनी चाहिए। वहीं, ताजा आदेश में तालिबान ने महिलाओं और पुरूषों के एक साथ रेस्टोरेंट में खाना खाने पर भी पाबंदी लगा दी है और तालिबान ने कहा है कि, अफगानिस्तान में कट्टर शरिया कानून लागू किया जाएगा।

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