नहीं सुधरेगा तालिबान: ट्रिमर से दाढ़ी बनाने पर लगाया प्रतिबंध, स्टायलिश हेयरस्टाइल रखने पर सजा का फरमान

तालिबान ने हेलमंद प्रांत में ट्रिमर से दाढ़ी बनाने और स्टाइलिश हेयरस्टाइल रखने पर प्रतिबंध लगा दिए हैं।

काबुल, सितंबर 27: अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। अब लोग किस तरह की दाढ़ी रखें, बाल कैसा बनाएं, इसको लेकर भी पाबंदियां लगाने लगा है। अफगानिस्तान की मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान ने हेलमंद प्रांत में दाढ़ी और बाल को लेकर नये नियम लागू किए हैं और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त सजा के प्रावधान किए गये हैं।

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    Afghanistan: Taliban का फरमान- दाढ़ी शेव करने और हेयरस्टाइल करने पर लगाया बैन | वनइंडिया हिंदी
    बाल-दाढ़ी को लेकर नियम

    बाल-दाढ़ी को लेकर नियम

    अफगानिस्तान की मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि तालिबान ने हेलमंद प्रांत में दाढ़ी बनाने या दाढ़ी काटने के लिए हेयरड्रेसर इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। द फ्रंटियर पोस्ट ने तालिबान द्वारा जारी किए गये एक चिट्ठी का हवाला देते हुए कहा है कि, "तालिबान ने दक्षिणी अफगानिस्तान के हेलमंद प्रांत में स्टाइलिश हेयर स्टाइल और दाढ़ी बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया है।" अखबार ने आगे कहा है कि, ''इस्लामिक ओरिएंटेशन मंत्रालय के अधिकारियों ने प्रांतीय राजधानी लश्कर गाह में पुरुषों के हज्जामख़ाना सैलून के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक में बालों को लेकर नये नियम बनाए हैं। जिसमें कहा गया है कि सभी लोगों को अपने बाल के स्टाइल साधारण रखने होंगे और दाढ़ी बढ़ाने के लिए सैलून वाले ट्रिमर का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।

    सैलूनों में गाना नहीं बजाने का हुक्म

    सैलूनों में गाना नहीं बजाने का हुक्म

    द फ्रंटियर पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान ने अपने इस आदेश के साथ सैलून चलाने वालों से ये भी अपील की है कि वो हेयरड्रेसिंग सैलून के परिसर में किसी भी तरह का म्यूजिक या फिर इस्लामिक गीत ना सने। इन सबके साथ ही तालिबान ने पूरे देश में अपने पहले शासन की तरह ही दमनकारी शासन लागू कर चुका है। अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों के उल्लंघन की खबरों के बीच, तालिबान ने पिछले हफ्ते हेरात शहर में कथित किडनैपिंग के आरोप में चार लोगों को पहले चौराहे पर सैकड़ों लोगों के सामने मार दिया और फिर उनकी लाशों को चौराहे पर क्रेन से बांधकर लटका दिया। जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

    'हाथ काटना बेहद जरूरी'

    'हाथ काटना बेहद जरूरी'

    तालिबान के संस्थापकों में से एक और इस्लामी कानून की कठोर व्याख्या करने के लिए कुख्यात तालिबान ने जब 1996 में अफगानिस्तान की सत्ता संभाली थी, उस वक्त ये क्रूर शासन के लिए पूरी दुनिया में कुख्यात था। तालिबान के लिए किसी को फांसी देना, पत्थर से पीटकर मार देना और हाथ काट देना कोई बड़ी बात नहीं थी, लेकिन इस बार काबुल पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने 'उदार' होने का दावा किया था। लेकिन, हर वादे की तरह, तालिबान ने अपने इस वादे को भी तोड़ दिया है। एसोसिएटेड प्रेस के साथ एक इंटरव्यू में मुल्ला नूरुद्दीन तुराबी ने कहा है कि 'हाथ काटना बेहद जरूरी है।'

    स्टेडियम में फांसी नहीं

    स्टेडियम में फांसी नहीं

    तालिबान के मंत्री बने मुल्ला नूरूद्दीन तुराबी ने हालांकि इस बार कहा है कि वो सार्वजनिक जगहों पर किसी कैदी को फांसी नहीं देगा। बल्कि, कैदियों को फांसी अब जेल में ही दी जाएगी। पहले तालिबान किसी स्टेडियम में या फिर सड़कों पर किसी शख्स को फांसी देकर उसकी लाश को चौराहों पर लटका देता था। तुराबी ने एसोसिएटेड प्रेस से काबुल में बात करते हुए कहा कि, "स्टेडियम में दंड के लिए सभी ने हमारी आलोचना की, लेकिन हमने उनके कानूनों और उनकी सजा के बारे में कभी कुछ नहीं कहा।" उसने कहा कि, "कोई हमें नहीं बताएगा कि हमारे कानून क्या होने चाहिए। हम इस्लाम का पालन करेंगे और हम कुरान पर अपने कानून बनाएंगे"

    1990 के दशक में लौटा तालिबान

    1990 के दशक में लौटा तालिबान

    जब से तालिबान ने 15 अगस्त को काबुल पर कब्जा किया और अफगानिस्तान पर राज कायम किया है, तब से अफगानिस्तान के लोग और दुनिया यह देख रही है, कि क्या वे 1990 के दशक के अंत के अपने कठोर शासन को फिर से बनाएंगे या नहीं। तुराबी की टिप्पणियों ने साफ कर दिया है कि, तालिबान बिल्कुल भी नहीं बदला है और वो उसी तरह से बर्बरता करता रहेगा, जैसा कि वो पहले करता था। तालिबान ने पश्चिमी देशों के द्वारा बनाए गये टेक्नोलॉजी को भले ही जहर उगलते उगलते हुए भी स्वीकार कर लिया हो, लेकिन उसकी कट्टरपंथी सोच अब भी वही है।

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