रूस की तरह हमला करना चीन को पड़ेगा भारी, यूक्रेन से सबक लेकर ताइवान ने बनाया चक्रव्यूह, डूब मरेगा ड्रैगन!

Taiwan National Defense Report: कम्युनिस्ट चीन के खतरनाक इरादे से सौ फीसदी वाकिफ ताइवान ने यूक्रेन युद्ध से सबक लेते हुए, ड्रैगन को बीच समंदर में ही डूबोकर मारने का प्लान तैयार किया है। ताइवान ने ऐसा व्यूह तैयार किया है, कि हमला करने के बाद चीन के पास पछताने के अलावा, कोई और विकल्प मौजूद नहीं होगा।

चीन लगातार ताइवान को हड़पने के लिए 'ग्रे जोन' तैयार कर रहा है और 'हाइब्रिड वारफेयर' की तेजी से तैयारी कर रहा है, लिहाजा अब द्विप देश ताइवान ने, अपने से कई गुना विशाल चीनी सैनिकों की फौज का मुकाबला करने की तैयारी शुरू कर दी है।

Taiwan National Defense Report

ताइवान की नेशनल डिफेंस रिपोर्ट

ताइवान ने 12 सितंबर को अपना लेटेस्ट नेशनल डिफेंस रिपोर्ट जारी किया है, जिसमें कहा गया है, कि ताइवान सेना अपने लंबे समय से आयोजित "दृढ़ रक्षा और मल्टी-डोमेन डेटरेंस" रणनीतिक मार्गदर्शन को बरकरार रख रही है और अपनी "असममित युद्ध क्षमताओं" को बढ़ाना जारी रख रही है।

ताइवान ने माना है, कि उसके सामने में "बहुत मजबूत प्रतिद्वंद्वी" है, लेकिन ताइवान ने हथियार डालने के किसी भी इरादे से इनकार कर दिया है।

इसके साथ ही, रिपोर्ट में कहा गया है, ताइवान लचीलापन और आत्मनिर्भरता बढ़ाएगा, घरेलू रक्षा उद्योग को प्राथमिकता देगा, और कम-पारंपरिक हथियार प्राप्त करके, अपनी सेनाओं को फिर से संगठित करके और समग्र सुरक्षा को बढ़ावा देकर अपने "ऑल-ऑउट डिफेंस पावर" को बढ़ाएगा।"

एक्सपर्ट्स का कहना है, कि ताइवान के लिए चीन को हराना तो नामुमकिन की तरह होगा, लेकिन ताइवान की डिफेंस रिपोर्ट में जो नीति बनाई गई है, वो चीनी आक्रमण को इतना महंगा बना देगा, कि इसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता।

ताइवान की यह राष्ट्रीय रक्षा रिपोर्ट का 17वां एडिशन है, जिसे समय-समय पर राष्ट्रीय रक्षा अधिनियम के अनुच्छेद 30 के तहत, द्वीप राष्ट्र के वर्तमान सुरक्षा माहौल, सशस्त्र बलों की युद्ध तैयारी की स्थिति और प्रदर्शन के बारे में विस्तार से बताया जाता है।

188 पन्नों की ये रिपोर्ट, पांच भागों विभाजित है और ये भाग हैं-- क्षेत्रीय रुख, राष्ट्रीय रक्षा क्षमताएं, नीति सुधार, राष्ट्रीय रक्षा प्रशासन, और सम्मान और गौरव की विरासत।

ताइवान की रिपोर्ट की शुरुआत में, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर विस्तार से बात की गई है और चीन को क्षेत्र के लिए उभरते खतरे के रूप में पेश किया गया है, जिससे ताइवान के मित्र माने जाने वाले कई देशों को अपनी सैन्य तैयारी बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। अनुमानतः, इन देशों की सूची में अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया और आसियान देश शामिल हैं।

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ताइवान की रिपोर्ट में भारत अहम

लेकिन, दिलचस्प बात यह है कि रिपोर्ट में भारत को भी जगह दी गई है। इसमें बताया गया है, कि कैसे चीन ने भारत को अपना रक्षा खर्च बढ़ाने के लिए मजबूर किया है।

इसमें कहा गया है, कि "पीआरसी की लगातार बढ़ती सैन्य शक्ति और पाकिस्तान के साथ ऐतिहासिक झगड़ों और अंतहीन संघर्षों का सामना करते हुए, भारत सरकार को अपनी सेना को बनाए रखने के लिए सालाना अरबों अमेरिकी डॉलर खर्च करने पड़ते हैं।"

रिपोर्ट में कहा गया है, कि "2014 से, भारत के प्रधान मंत्री, श्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी, निवेश को प्रेरित करने, इनोवेशन को प्रोत्साहित करने, कौशल के विकास को मजबूत करने और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए मेक इन इंडिया की पहल को बढ़ावा दे रहे हैं। लिहाजा, वित्त वर्ष 2022 में भारत में उद्योग के लिए एफडीआई 83.6 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो वित्त वर्ष 2014 में 45.15 अरब अमेरिकी डॉलर था।"

ताइवान की डिफेंस रिपोर्ट में कहा गया है, कि "रिसर्च एंड डेवलपमेंट को विस्तार देने के लिए भारत ने कई सैन्य प्रणालियों के आयात को बैन कर दिया है। इसके अलावा, भारत के रक्षा मंत्रालय ने सैन्य वस्तुओं की लंबी लिस्ट तैयार कर रखी है, ताकि सैन्य उत्पादों पर विदेशी निर्भरता कम से कम की जाए।"

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चीन की नाक में कैसे दम करेगा ताइवान?

डिफेंस रिपोर्ट में कहा गया है, कि "मजबूत डिफेंस और मल्टी डोमेन डेटरेंस" रणनीति पर ताइवान काम कर रहा है, जिसमें ताइवान के डिफेंस को अलग अलग स्तर पर इतना ज्यादा मजबूत किया जाएगा, कि दुश्मन के लिए उस किले को भेदना असंभव जैसा हो जाए।

इसके लिए, ताइवान ने अलग अलग स्तर के लिए अलग अलग रणनीतियों पर काम शुरू करना अपना लक्ष्य बताया है।

ताइवान के पास जलडमरूमध्य पार करने से पहले, दुश्मन पर हमला करने के लिए अत्याधुनिक हथियार और मिसाइलें तैनात की जाएंगी। वहीं, ताइवानी सशस्त्र बल जलडमरूमध्य को पार करने के चरण के दौरान दुश्मन को सबसे कमजोर बना देंगे, जिसे ताइवान जलडमरूमध्य के भौगोलिक लाभों से मदद मिलती है।

आपको बता दें, कि चीन और ताइवान के बीच की समुद्री दूरी भले ही सिर्फ डेढ़ सौ किलोमीटर की है, लेकिन इस क्षेत्र की भौगोलिक संरचना ऐसी है, कि चीन के लिए चढ़ाई करना काफी मुश्किल होगा और ताइवान इसी का लाभ हासिल करना चाहता है।

लिहाजा, उन क्षेत्रों में ताइवान सक्रिय रूप से मोबाइल हथियार, छोटे, पोर्टेबल और एआई-सक्षम हथियार, यूएवी और काउंटर-यूएवी सिस्टम तैनात किए हैं।

इसके अलावा, डिफेंस को मल्टी लेयर बनाने के लिए भौगोलिक स्थिति का भरपूर फायदा उठाने की कोशिश ताइवान करेगा, वहीं शहरी क्षेत्र में लड़ाई जीतने के लिए करीब करीब सभी इमारतों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए इमारतों में स्पेशल डिजाइन किए जाएंगे।

आपको बता दें, कि शहरी लड़ाई ही सबसे ज्यादा मुश्किल होती है, जहां ज्यादातर सेनाएं हार मान लेती हैं। रूस भी यूक्रेन युद्ध में राजधानी कीव की लड़ाई नहीं जीत पाया था।

एक्सपर्ट्स का कहना है, कि ताइवान कि डिफेंस रिपोर्ट को देखने पर ऐसा लगता है, कि उसने यूक्रेन युद्ध का काफी बारीकी से अध्ययन किया है, लिहाजा युद्ध की स्थिति में चीन को अकल्पनीय नुकसान हो सकता है, जैसा रूस को हुआ है, उससे भी कई गुना ज्यादा।

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