Suella Braverman: भारतीय मूल की होकर भी भारतियों के खिलाफ हुईं UK की गृहमंत्री, खोला मोर्चा

Suella Braverman ने भारत के साथ हो रहे free trade agreement को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। ब्रिटेन की गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने कहा कि इस डील की वजह से यूके में आने वाले भारतीय लोगों की संख्या बढ़ सकती है।

Suella Braverman ने भारत के साथ हो रहे free trade agreement को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। ब्रिटेन की गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने कहा कि इस डील की वजह से UK में आने वाले भारतीय लोगों की संख्या बढ़ सकती है। सुएला ब्रेवरमैन भारतीय मूल की हैं लेकिन उनका बयान पूरी तरह से भारत विरोधी है। 42 साल की सुएला ब्रेवरमैन भारत के गोवा की रहने वाली हैं और अटॉर्नी जनरल रही हैं। सुएला ब्रेवरमैन, ट्रस खेमे की हैं। पीएम पद के लिए सुएला ने Rishi Sunak के खिलाफ जाकर Liz Truss का समर्थन किया था।

Image- File

पीएम Liz Truss के खिलाफ है बयान

पीएम Liz Truss के खिलाफ है बयान

भारतीय मूल की सुएला ब्रेवरमैन ने यह बयान द स्पेक्टेटर पत्रिका को दिए गए इंटरव्यू में दिया है। प्रधानमंत्री लिज ट्रस चाहती थीं कि दिवाली तक भारत के साथ एक व्‍यापार समझौता साइन कर लिया जाए। लेकिन सुएला ब्रेवरमैन का मानना है कि ब्रिटेन अगर इस फैसले पर आगे बढ़ता तो यह कदम ब्रेक्जिट के मकसद को नुकसान पहुंच सकता है। प्रीति पटेल के बाद ब्रिटेन में गृहमंत्री का पद संभालने वाली सुएला ब्रेवरमैन का ये बयान प्रधानमंत्री लिज ट्रस के रूस से एकदम उलट है। इससे एक दिन पहले भी ब्रेवरमैन ने ब्रिटेन के लिस्टर में हुए दंगों के लिए प्रवासियों को जिम्मेदार ठहराया था।

व्यापार समझौता को बताया Brexit के उद्देश्य के खिलाफ

व्यापार समझौता को बताया Brexit के उद्देश्य के खिलाफ

सुएला ब्रेवरमैन ने कहा के भारत के साथ खुली सीमा की नीति को लेकर उनके पास कई आशंकाएं हैं क्योंकि लोगों ने जब ब्रेग्जिट को चुना था, तब इसलिए वोट नहीं किया था। सुएला ने कहा कि प्रीति पटेल जो उनसे पहले गृहमंत्री का पद संभाल रही थीं, वह गैरकानूनी अप्रवासियों की संख्‍या बढ़ाना चाहती थीं। सुएला ने कहा कि भारत के साथ यह समझौता बिल्कुल भी जरूरी नहीं है और यह सही तरह से काम करेगा, ऐसा कहा नहीं जा सकता है। गौरतलब है कि भारत सरकार की तरफ से लगातार यह मांग की जा रही है कि भारतीय नागरिकों के लिए वर्क और स्‍टडी वीजा की संख्‍या बढ़ाई जाए।

UK में बढ़ रही भारतीय प्रवासियों की संख्या

UK में बढ़ रही भारतीय प्रवासियों की संख्या

जब उनसे यह पूछा गया कि क्‍या वह ऐसे समझौते का पक्ष लेंगी जो सिर्फ छात्रों और व्‍यवसायियों के लिए हो? इस पर सुएला ने कहा, 'लेकिन मुझे कुछ आपत्ति है। जरा इस देश में अप्रवासियों की संख्या पर गौर कीजिए। ब्रिटेन में सबसे अधिक विदेशी, भारतीय ही हैं। हमने ब्रिग्जेट के पक्ष में वोट दिया लेकिन इसके बाद भी ब्रिटेन में आने वाले प्रवासियों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है। यह उसी स्तर पर है जो ब्रेग्जिट से पहले था।' हालांकि सुएला ने कहा कि छात्रों और व्यापारियों के लिए कुछ नरमी बरती जा सकती है।

बोरिस जॉनसन ने भी जताई थी आशंका

बोरिस जॉनसन ने भी जताई थी आशंका

वहीं इस साल की शुरुआत में पूर्व पीएम बोरिस जॉनसन ने भी इस समझौते के विषय में कहा था कि भारत के साथ होने वाले इस समझौते के बाद अप्रवासन की गति तेज हो सकती है। यूके के गृह मंत्रालय की मानें तो वर्ष 2020 में 20,706 भारतीय ऐसे थे जो अपना वीजा खत्‍म होने के बाद भी ज्‍यादा दिन तक रुके थे। यानी 4.4 फीसदी भारतीय वीजा खत्‍म होने के बाद भी ब्रिटेन में रुके थे। ब्रिटिश मीडिया की मानें तो किसी और देश के नागरिकों की तुलना में यह सबसे अधिक है।

भारत के साथ व्यापार समझौता करना चाहता है UK

भारत के साथ व्यापार समझौता करना चाहता है UK

ब्रेग्जिट के बाद भारत के साथ कारोबारी समझौता ब्रिटेन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। ब्रिटेन भी दुनिया में सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था वाले देश भारत की क्षमता का लाभ उठाना चाहता है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर के कारोबार को बढ़ावा देना है। विश्लेषकों के मुताबिक इस समझौते से भारत के लिए होने वाला ब्रिटेन का निर्यात लगभग दोगुना हो जाएगा। इतना ही नहीं 2035 तक दोनों देशों के बीच सालाना कारोबार 28 अरब पाउंड और बढ़ जाएगा।

बोरिस जॉनसन ने पीएम मोदी संग शुरू की थी वार्ता

बोरिस जॉनसन ने पीएम मोदी संग शुरू की थी वार्ता

भारत और ब्रिटेन ने जनवरी 2022 में दिल्ली में मुक्त व्यापार समझौते के लिए वार्ता शुरू की थी। इस समझौते पर तत्कालीन प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हस्ताक्षर किया था। समझौते के मुताबिक इस व्यापार समझौते पर दीपावली से पहले मुहर लग जाने वाली थी। जब यह वार्ता शुरू हुई थी तब लिज ट्रस ब्रिटेन की विदेश मंत्री थीं। इस समझौते से ब्रिटेन और भारत के बीच प्रोफेशनल और छात्रों के लिए प्रवास आसान हो सकता है। अभी दोनों देशों की तरफ से अंतिम फैसले का इंतजार है।

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