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थाइलैंड में राजशाही के खिलाफ हो रहे जोरदार प्रदर्शन के बीच देश में आपातकाल की घोषणा

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बैंकॉक। थाइलैंड (Thailand) में पिछले तीन महीने से चल रहे छात्रों को विरोध को बंद करने के लिए देश में इमजेंसी लागू कर दिया गया है। बता दें थाईलैंड में राजतंत्र में सुधार और प्रधानमंत्री प्रयुत चान ओचा के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले तीन महीने से छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं।

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पिछले तीन महीनों से थाइलैंड (Thailand) में राजशाही के खिलाफ लोग सड़कों पर हैं। र हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर राजा महा वजिरलांगकोर्न (Thai King Maha Vajiralongkorn) की राजशाही को खुली चुनौती दे रहे हैं। प्रदर्शनकारी राजशाही की शक्तियों पर लगाम लगाने के लिए देश में सुधारों की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों की मांग है कि राजशाही में सुधार किया जाए। साथ ही प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री प्रयुथ चान-ओखा को हटाए जाने के साथ ही नया संविधान और चुनाव की मांग भी कर रहे हैं छात्रों के प्रदर्शन को बंद करवाने के लिए देश में आपातकाल की घोषणा की गई है। देश की पुलिस ने इस मामले में अब तक लगभग 20 प्रदर्शनकारियों को अरेस्‍ट कर चुकी है।

5 लोगों के एकत्र होने पर भी लगाई गई रोक

बैंकाक में इमरजेंसी के दौरान 5 से अधिक लोगों के इकट्ठा होने और राष्‍ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाली न्‍यूज के पब्लिश करने पर बिलकुल रोक लगा दी गई है। बैंकाक पुलिस रात भर पीएम कार्यालय के बाहर तैनात रही और लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों के समूह को गुरुवार की तड़के तितर-बितर कर दिया। थाईलैंड के पीएम ने राजधानी बैंकाक में आपातकाल लागू कर दिया है, ताकि प्राधिकारी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर सके। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया गया।

कोरोना के चलते पहले ही बेहाल हैं यहां के निवासी

बता दें दुनिया भर में थाईलैंड ऐसा देश है जहां सर्वाधिक कोरोना संक्रमण का प्रकोप है यही कारण है कि कोरोना के चलते पहले ही वहां आपातकालीन जैसा माहौल है फ पुलिस कार्रवाई से पहले ही प्रदर्शनकारियों के एक नेता ने प्रधानमंत्री कार्यालय 'गवर्नमेंट हाउस' में रैली समाप्त करने की घोषणा की इसके ृबाद कई प्रदर्शनकारी पहले ही वहां से जा चुके थे। इसके बावजूद सौ से अधिक लोग वहां मौजूद थे। प्रदर्शनकारियों ने ऐलान किया कि राजधानी बैंकाक में अब किसी अन्य स्थान पर गुरुवार दोपहर को रैली होगी, लेकिन उप पुलिस प्रवक्ता कर्नल किस्साना फाथानाचारोएन ने उन्हें ऐसा नहीं करने के लिए चेतनावनी दी।

जानिए थाईलैंड में क्यों हो रहे हैं विरोध प्रदर्शन

गौरतलब है कि थाइलैंड में राजशाही के खिलाफ हो रहा ये विरोध प्रदर्शन अपने आपमें अभूतपूर्व है। थाइलैंड में प्रदर्शनकारी थाईलैंड के संवैधानिक राजतंत्र में सुधार की मांग कर रहे हैं। जबकि देश में राजशाही की आलोचना और उसके खिलाफ प्रदर्शन पूरी तरह से अवैध है। बावजूद इसके पिछले दो महीने में कई बार प्रदर्शनकारियों ने शाही महल और सैन्य प्रभुत्व वाले शासन के खिलाफ कई बार प्रदर्शन किया है। इसके पहले देश में राजशाही के खिलाफ कभी भी विरोध प्रदर्शन नहीं हुआ है। प्रर्दशनकारियों का दावा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में उचित तरीके से काम नहीं करता। पहले थाईलैंड की सेना प्रमुख रहे प्रयुत्त चान-ओ-चा 2014 में तख्तापलट कर देश की सत्ता हथिया ली थी। उनके ही नेतृत्व में 2016 में थाईलैंड का नया संविधान तैयार हुआ था। जिसमें कई ऐसे नियम बनाए गए थे जो मानवाधिकार के खिलाफ थे। इसमें सरकार और राजा की आलोचना करने वालों को गंभीर सजा देने का प्रावधान भी है। थाईलैंड में 2019 में चुनाव भी हुए थे जिसमें प्रयुत्त की पार्टी को जीत मिली थी। हालांकि, लोगों का आरोप है कि सरकार ने अपनी ताकत के बल पर गड़बड़ी करवा कर चुनाव में जीत हासिल की थी, ये विरोध-प्रदर्शन तभी से जारी है। इस पूरे घटनाक्रम पर थाईलैंड महल की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजा जो अक्सर अपना समय यूरोप में बिताते हैं वर्तमान समय में देश में नहीं हैं।

राजशाही के खिलाफ प्रदर्शन देश में अवैध

गौरतलब है कि थाइलैंड में राजशाही के खिलाफ प्रदर्शन और बयान देना कानूनन अवैध है। इस पर 15 साल तक जेल की सज़ा हो सकती है। हालांकि कहा जा रहा है कि राजा ने किसी पर भी इस कानून के तहत कार्रवाई न करने का आदेश दे रखा है। सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि पुलिस प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग नहीं करेगी। वहीं ये पुलिस पर है कि वह तय करे कि प्रदर्शन के दौरान भाषणों में किसी तरह का कानून का उल्लंघन हुआ है अथवा नहीं।

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English summary
Strong protest against monarchy in Thailand, declaration of strong emergency in the country
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