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चीन वाले RCEP ट्रेड ब्लॉक में शामिल होगा श्रीलंका, राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने की घोषणा, जानिए फायदा-नुकसान

Sri Lanka to Join RCEP: राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने गुरुवार को घोषणा की है, कि श्रीलंका, रिजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप यानि RCEP व्यापार ब्लॉक में शामिल होना चाहता है, जिसमें चीन और जापान जैसी प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं, क्योंकि उनका देश अपनी संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण का प्रयास कर रहा है।

कोलंबो में इंडोनेशिया के दूतावास में आयोजित दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) की 56वीं वर्षगांठ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, कि श्रीलंका आसियान देशों के साथ मिलकर काम करेगा। उन्होंने कहा, कि "क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास को देखते हुए श्रीलंका का आर्थिक ध्यान अब पूर्व की ओर होना चाहिए।"

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RCEP ज्वाइन करेगा श्रीलंका

श्रीलंका के राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने कहा, कि "अब जरूरत सभी क्षेत्रों में मिलकर काम करने की है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उद्देश्य हासिल किया जा सके।"

विक्रमसिंघे ने कहा कि श्रीलंका ने इस विशाल व्यापार ब्लॉक की क्षमता को पहचानते हुए आरसीईपी में शामिल होने के लिए आवेदन किया है।

श्रीलंका वर्तमान में अगले महीने तक आईएमएफ की समय सीमा को पूरा करने के लिए, अपने बाहरी ऋणदाताओं के साथ 40 अरब डॉलर के कर्ज को रीस्ट्रक्चर करने पर बातचीत कर रहा है।

वहीं, श्रीलंका को आसियान सदस्य देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते की स्थापना के लिए बातचीत शुरू करने की भी उम्मीद है।

नई नीति का एक प्रमुख पहलू, आसियान देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों की शुरुआत है।

श्रीलंका ने पहले ही सिंगापुर के साथ एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौता किया है और थाईलैंड के साथ सक्रिय रूप से उसकी बातचीत चल रही है।

आपको बता दें, कि विदेशी मुद्रा भंडार की भारी कमी के कारण, द्वीप राष्ट्र श्रीलंका 2022 में एक अभूतपूर्व वित्तीय संकट की चपेट में आ गया था, जो 1948 में ब्रिटेन से आजादी के बाद सबसे खराब स्थिति थी।

विक्रमसिंघे ने कहा, कि हिंद महासागर के एक राज्य के रूप में श्रीलंका इस क्षेत्र को सैन्य हस्तक्षेप से मुक्त रखने की इच्छा व्यक्त करना चाहता है।

उन्होंने कहा, कि यह नीति हिंद महासागर क्षेत्र के लिए आसियान के उद्देश्यों के अनुरूप है।

RCEP क्या है?

आपको बता दें, कि आरसीईपी में 15 सदस्य, जिसमें 10 आसियान सदस्य देशों के साथ चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं।

आसियान का पूरा नाम Association of Southeast Asian Nations है और इसके सदस्य राज्य इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार और कंबोडिया है, लिहाजा इंडोपैसिफिक के लिए आसियान काफी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है।

आमतौर पर आसियान पर अमेरिका का वर्चस्व रहा है और आसियान की बैठक में आम तौर पर अमेरिका, चीन, भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड, रूस और दक्षिण कोरिया के राष्ट्राध्यक्ष इसमें भाग लेते हैं।

लिहाजा, आरसीईपी पर आसियान का काफी ज्यादा प्रभाव है।

आरसीईपी का मुख्य उद्येश्य सदस्य देशों के बीच व्यापारिक भागीदारी बढ़ाने के लिए मुक्त व्यापार समझौतों को बढ़ावा देना है, लिहाजा इससे श्रीलंका को कई फायदे हो सकते हैं और पूर्वी एशिया के देशों ने आरसीईपी के जरिए अपने व्यापारिक संबंधों को काफी मजबूत किए हैं।

वहीं, आसियान राष्ट्रों के साथ चीन, भारत, कोरिया गणराज्य, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौता है, लिहाजा श्रीलंका को इससे काफी फायदे मिल सकते हैं।

पहले भारत भी आरसीईपी का सदस्य था, लेकिन साल 2019 में भारत इससे बाहर हो गया था, क्योंकि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स, यानि मुक्त व्यापार समझौते के बाद आसियान, कोरिया और जापान के साथ भारत को काफी व्यापारिक घाटा हो रहा था।

नीति आयोग की रिपोर्ट में भी कहा गया है, कि आरसीईपी के ज्यादातर सदस्य देशों के साथ भारत के व्यापार घाटे में इजाफा हो रहा है।

वहीं बात श्रीलंका को लेकर करें, तो आरसीईपी में शामिल होने के बाद श्रीलंका में चीन का प्रभाव और बढ़ेगा, जो भारत के लिए चिंता का विषय हो सकता है।

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