कोरोना वायरस महामारी के बीच साउथ कोरिया में हुए चुनाव, राष्ट्रपति मून जे की सत्ता में हुई वापसी
सियोल। साउथ कोरिया में कोरोना वायरस महामारी के बीच हुए चुनावों में राष्ट्रपति मून जे इन की डेमोक्रेटिक पार्टी ने विशाल जीत हासिल की है। साउथ कोरिया दुनिया पहला देश है जहां पर महामारी के बीच ही राष्ट्रीय चुनावों को संपन्न कराया गया है। चुनावों के दौरान सुरक्षा अैर सोशाल डिस्टेंसिंग के सभी उपायों को पोलिंग बूथ्स और मतगणना वाली जगह पर अपनाए गए थे। मून की पार्टी को 300 सीटों वाली नेशनल एसेंबली में 163 सीट हासिल हुए हैं।

1987 के बाद पहली बार चुनाव
डेमोक्रेटिक पार्टी की सह पार्टी प्लेटफॉर्म पार्टी को भी 17 सीटें मिली हैं और इस तरह से मून की सरकार के पास कुछ 180 सीटें आ गई हैं। करीब 35 पार्टियों ने उम्मीदवारों को खड़ा किया था। मगर मुकाबला लेफ्ट विचारधारा वाली डेमेाक्रेटिक पार्टी और कंजर्वेटिव विपक्ष और यूनाइटेड फ्यूचर पार्टी के बीच रह गया था। यूनाइटेड फ्यूचर पार्टी और इसके संसदीय साझीदारों के 103 सीटों के जीतने की उम्मीदें हैं। माना जा रहा है कि जिस तरह से देश मून की पार्टी ने कोरोना वायरस महामारी का सामना किया, उसने जनता पर अपना प्रभाव डाला है। महामारी में स्थिति संभालने के बाद पूरी दुनिया में साउथ कोरिया की तारीफ हो रही है और इसका फायदा चुनावों में राष्ट्रपति मून को भी मिला है। साउथ कोरिया में साल 1987 के बाद पहली बार चुनाव हुए हैं। मून की पार्टी 33 सालों बाद हुए चुनावों में बहुमत हासिल करने वाली पहली पार्टी बन गई है। सिर्फ इतना ही नहीं 16 वर्षो में यह पहला मौका है जब लेफ्ट विचाराधारा वाली पार्टी को बहुमत हासिल हो सका है।
इस समय 60,000 लोग क्वारंटाइन में
साउथ कोरिया में मतपत्र के जरिए वोट डाले गए थे। यहां पर वोटर्स को अपने हाथ सैनिटाइजर से साफ करने थे। उन्हें फेस मास्क पहना था और साथ ही प्लास्टिक दस्ताने भी पहनने को दिए गए थे। उन्हें करीब एक मीटर की दूरी पर खड़ा होना था और उनके शरीर का तापमान भी चेक किया गया था। जिसके शरीर का तापमान 37.5 सेंटीग्रेट से ज्यादा आया उन्हें अलग से बने एक बूथ में वोट डालना था। साउथ कोरिया में इस समय 60,000 लोगों को क्वारंटाइन करके रखा गया है। कोरोना वायरस महामारी के बाद भी देश में 66 प्रतिशत से ज्यादा मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। 18 सालों में यह मतदान प्रतिशत सबसे ज्यादा है। इसके अलावा यह भी पहली बार था जब 18 साल की आयु पूरी कर चुके मतदाताओं ने अपना वोट डाला। 26 प्रतिशत जनसंख्या ने अपना वोट या तो पोस्ट से डाला या फिर शुक्रवार और शनिवार क्वारंटाइन स्टेशनों में बने पोलिंग बूथ पर सबसे पहले वोट डाले गए।
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