Sheikh Hasina को मौत की सजा के बाद बांग्लादेश ने तत्काल प्रत्यर्पण का आग्रह किया, जानें भारत का रुख क्या?
Sheikh Hasina News: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मौत की सजा सुनाए जाने के कुछ घंटों बाद ही भारत से उनका तत्काल प्रत्यर्पण करने की औपचारिक मांग की है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने एक कूटनीतिक पत्र में भारत के साथ 2013 की प्रत्यर्पण संधि का हवाला देते हुए कहा कि हसीना की वापसी नई दिल्ली की 'अनिवार्य जिम्मेदारी' है।
मंत्रालय ने चेतावनी दी कि 'मानवता के खिलाफ अपराधों के दोषी ठहराए गए इन व्यक्तियों को किसी अन्य देश द्वारा शरण प्रदान करना अत्यंत अमित्रतापूर्ण कार्य होगा तथा न्याय के प्रति उपेक्षा होगी।' यह बयान अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल (ICT) के फैसले के ठीक बाद आया, जिसमें हसीना को 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हिंसा के लिए दोषी ठहराया गया।

यह घटनाक्रम बांग्लादेश की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है, खासकर फरवरी 2026 में होने वाले पहले आम चुनाव से ठीक पहले। हसीना, जो अगस्त 2024 से दिल्ली में निर्वासन में हैं, ने फैसले को 'धांधलीपूर्ण' बताते हुए खारिज कर दिया है। भारत ने अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि नई दिल्ली संधि के प्रावधानों का हवाला देकर प्रत्यर्पण से इनकार कर सकती है। आइए, इस विवादास्पद मुद्दे की पूरी तस्वीर समझते हैं...
What Is ICT Verdict: क्या है ICT का फैसला? तीन प्रमुख आरोपों में फांसी की सजा
17 नवंबर को ढाका के ICT ने शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए फांसी की सजा सुनाई। ट्रिब्यूनल ने उन्हें तीन मामलों में दोषी पाया:- (1) छात्र आंदोलन के दौरान उकसावा, (2) हत्याओं के आदेश देना, और (3) हिंसा रोकने में विफलता। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई-अगस्त 2024 की हिंसा में करीब 1,400 लोग मारे गए थे, जिसमें ज्यादातर छात्र थे।
साथ ही, पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को भी फांसी और पूर्व पुलिस महानिदेशक चौधरी अब्दुल्लाह अल-मामुन को 5 वर्ष की कैद की सजा दी गई। मुकदमा हसीना की अनुपस्थिति में चला, क्योंकि वे भारत में हैं। कोर्ट में फैसला सुनते ही पीड़ित परिवारों ने तालियां बजाईं और ढाका यूनिवर्सिटी पर मिठाइयां बांटी गईं। लेकिन अवामी लीग ने इसे 'राजनीतिक साजिश' करार दिया और देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया। ढाका में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, पुलिस को 'फायर एट साइट' के आदेश हैं।
Sheikh Hasina Extradition Demand: विदेश मंत्रालय का पत्र, संधि का हवाला - 'तत्काल सौंपें'
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने सोमवार सुबह ही भारत को नोट वर्बल (औपचारिक कूटनीतिक पत्र) भेजा। इसमें कहा गया, 'भारत सरकार को इन दोषी व्यक्तियों - शेख हसीना और असदुज्जमान खान कमाल - को तुरंत बांग्लादेश प्राधिकारियों के हवाले करना होगा।' मंत्रालय ने 2013 की द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के अनुच्छेद 8 का जिक्र किया, जो हत्या जैसे अपराधों को प्रत्यर्पण योग्य मानता है।
कानून सलाहकार आसिफ नजरुल (Asif Nazrul) ने कहा, 'यह संधि के तहत बाध्यकारी कर्तव्य है। भारत को न्याय का सम्मान करना चाहिए।' मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि शरण देना 'अमित्रतापूर्ण' होगा, जो द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर सकता है। दिसंबर 2024 में भी ऐसा अनुरोध भेजा गया था, लेकिन भारत ने चुप्पी साधी। अब ICT के फैसले के बाद दबाव बढ़ गया है।
Sheikh Hasina Exile: शेख हसीना का निर्वासन- दिल्ली में सुरक्षित घर, भारत के प्रति आभार
78 वर्षीय हसीना अगस्त 2024 में छात्र विद्रोह के बाद हेलीकॉप्टर से भारत भाग आईं। उनके बेटे साजिब वाजेद के अनुसार, वे दिल्ली के एक सुरक्षित घर में हैं, जहां भारतीय सुरक्षा एजेंसियां 24x7 पहरा दे रही हैं। हसीना ने हाल ही में हिंदुस्तान टाइम्स को ईमेल में कहा था, 'पिछले साल मुझे सुरक्षित आश्रय देने के लिए मैं भारतीय लोगों के प्रति हृदय से आभारी हूं।' लेकिन उन्होंने बांग्लादेश कोर्ट के समन को नजरअंदाज किया, जो मुकदमे में पेश होने का आदेश दे चुका था।
वाजेद ने रॉयटर्स को बताया कि अपील तभी दायर होगी, जब अवामी लीग के साथ लोकतांत्रिक सरकार बने। हसीना ने भारत को 'मित्र राष्ट्र' बताया, लेकिन बांग्लादेश की अंतरिम सरकार (मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में) पर 'चरमपंथी ताकतों' का आरोप लगाया।
हसीना की कड़ी प्रतिक्रिया: 'धांधलीपूर्ण ट्रिब्यूनल, राजनीतिक बदला' - अवामी लीग का आरोप
फैसले पर हसीना ने लंबा बयान जारी किया। कहा कि 'यह धांधलीपूर्ण न्यायाधिकरण का फैसला है, जिसकी स्थापना और अध्यक्षता एक अनिर्वाचित सरकार ने की है, जिसके पास कोई लोकतांत्रिक जनादेश नहीं। यह पक्षपाती और राजनीति से प्रेरित है। मौत की सजा के घृणित आह्वान से अंतरिम सरकार के चरमपंथी तत्वों के जानलेवा इरादे उजागर होते हैं, जो बांग्लादेश की आखिरी निर्वाचित प्रधानमंत्री को हटाना और अवामी लीग को नेस्तनाबूद करना चाहते हैं।'
अवामी लीग ने इसे 'कंगारू कोर्ट' कहा और कहा कि हसीना सभी आरोपों से बरी हैं। पार्टी ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया, एनजीओ और आईएमएफ के हवाले से दावा किया कि यूनुस सरकार ने पत्रकारों को जेल में डाला है और चुनाव टाले हैं। ह्यूमन राइट्स वॉच जैसी संस्थाओं ने भी ट्रायल की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
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2024 का छात्र विद्रोह - हसीना सरकार का पतन
यह सब 2024 के जुलाई-अगस्त में शुरू हुआ, जब नौकरी कोटा के खिलाफ शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शन हुए। हसीना सरकार ने इसे कुचलने के लिए सेना और पुलिस तैनात की, जिसमें 1,400 से ज्यादा मौतें हुईं। संयुक्त राष्ट्र ने इसे 'मानवता के खिलाफ अपराध' कहा। हिंसा के चरम पर हसीना को सत्ता से हटना पड़ा, और यूनुस की अंतरिम सरकार बनी। हसीना पर आरोप है कि उन्होंने 'घातक कार्रवाई' का आदेश दिया।
पीड़ित परिवारों का कहना है, 'हसीना के अपराधों के लिए हजार फांसी भी कम हैं।' एक भाई ने कहा, 'मेरे भाई की मौत का बदला लिया जाना चाहिए।'
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आगे क्या? चुनाव से पहले दबाव, भारत की चुप्पी
यह फैसला फरवरी 2026 के चुनाव से महीनों पहले आया, जो यूनुस सरकार के लिए 'न्याय का संदेश' दे सकता है, लेकिन अवामी लीग को कमजोर करेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत प्रत्यर्पण से इनकार कर सकता है, क्योंकि संधि राजनीतिक अपराधों को छूट देती है। पूर्व राजनयिक ने कहा, 'भारत हसीना को सहयोगी मानता रहा है; संबंधों को खतरे में नहीं डालेगा।' लेकिन इससे बांग्लादेश में भारत-विरोधी भावनाएं भड़क सकती हैं।
हसीना ICC (अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय) में अपील की बात कर रही हैं, लेकिन बांग्लादेश ICT के सदस्य न होने से जटिल है। कुल मिलाकर, यह द्विपक्षीय संबंधों के लिए परीक्षा है - न्याय बनाम कूटनीति।
(अपडेट के लिए बने रहें। सभी तथ्य आधिकारिक स्रोतों पर आधारित।)
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