Love Story: एक वैज्ञानिक को दिल दे बैठी थीं Sheikh Hasina, शादी की सालगिरह पर मिली मौत की सजा
Sheikh Hasina Love Story Updates: बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना को सोमवार को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने मौत की सजा सुनाई है, उन्हें ICT ने मानवता के खिलाफ गए अपराध का दोषी माना गया है, हालांकि शेख हसीना ने फैसले को 'धांधली से स्थापित एक पक्षपातपूर्ण और अलोकतांत्रिक ट्रिब्यूनल' बताया है।
शेख हसीना का कहना है कि 'ये फैसला ये संकेत देता है कि चरमपंथी तत्व बांग्लादेश की निर्वाचित पीएम को खत्म करना चाहते हैं और जनता क आवाज को दबाना चाहते हैं लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाएगा।'

गौरतलब है कि शेख हसीना वाजेद देश की ही नहीं बल्कि विश्व के चर्चित नेताओं में शामिल हैं, उन्होंने 1996 से 2001 और 2009 से 2024 तक बांग्लादेश के प्रधान मंत्री की कुर्सी संभाली थी, कुल मिलाकर 20 वर्षों से अधिक समय तक सेवा करते हुए, वह देश की आजादी के बाद से बांग्लादेश की सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रही हैं।
Sheikh Hasina मानवता के खिलाफ अपराधों की दोषी हैं
देश में 15 महीने पहले हुए तख्ता पलट के बाद आज 17 नंवबर को 2025 को, उन्हें बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराया गया है। न्यायाधिकरण ने उन्हें भड़काऊ भाषण देने और जुलाई क्रांति के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक बल के इस्तेमाल का आदेश देने सहित कई आरोपों में दोषी पाया और उन्हें मौत की सजा सुनाई।
दिल्ली की कोठी नंबर 56 से Sheikh Hasina का खास कनेक्शन
आपको बता दें कि शेख हसीना का भारत से भी खास कनेक्शन है, यहां की दिल्ली की कोठी नंबर 56 ने उनके जीवन में काफी अहम रोल निभाया है। दरअसल 1975 से 1977 तक शेख हसीना अपने पति वाजिद मियां के साथ दिल्ली के लाजपत नगर-3 में 56 नंबर की कोठी में तीन साल तक रही थीं वो भी 'मिसेज मजूमदार' बनकर।
होटल डिप्लोमैट रिजेंसी चल रहा
एनडीटीवी की खबर के मुताबिक ये फैसला सुरक्षा कारणों से लिया गया था। खबर के मुताबिक साल 2022 में शेख हसीना ने खुद एक इंटरव्यू में इस बारे में खुलासा किया था। मालूम हो कि अब इस कोठी में होटल डिप्लोमैट रिजेंसी चल रहा है।

भारत हमारे लिए महफूज था: Sheikh Hasina
उन्होंने कहा था कि 'जब मेरे पिता की हत्या हुई तो अपनी बहन और पति के साथ थीं लेकिन तब ही उन्होंने फैसला किया कि वो इंडिया में रहेंगी, इसके दो कारण थे, पहला ये कि ये जगह महफूज थी और दूसरा ये ही यहां से यह पता करना आसान था कि मेर परिवार के कितने लोगों को मारा गया है।'
Sheikh Hasina ने वैज्ञानिक वाजेद मियां से की शादी
शेख हसीना के पिता और बांग्लादेश के संस्थापक नेता शेखमुजीबुर रहमान हैं, जिनकी पढ़ाई लिखाई ढाका से हुई, शैक्षिक प्रमाणपत्रों में उनका नाम हसीना शेख है।
एमए.वाजेद मियां से शादी की, ये प्रेम विवाह था!
1967 में, उन्होंने एमए.वाजेद मियां से शादी की, जो डरहम से भौतिकी में डॉक्टरेट के साथ एक बंगाली परमाणु वैज्ञानिक थे। कहते हैं कि उस वक्त हसीना अपने कॉलेज में छात्र संघ की उपाध्यक्ष थीं और एक इवेंट में उनकी मुलाकात वाजेद मियां से हुई थी, दोनों ही एक -दूसरे से प्रभावित हुए और फिर जिंदगी साथ बिताने का फैसला कर लिया। अब इसे भाग्य कहिए या संजोग कि 17 नवंबर को जिस दिन शेखहसीना को सजाए मौत हुई उसी तारीख को उन्होंने वाजेद मियां से शादी की थी।

Sheikh Hasina के पति ने लिखी कई किताबें
वाजेद मियां ने परमाणु भौतिकी , रिएक्टर भौतिकी , इलेक्ट्रोमैग्नेटिक्स आदि में काम किया। उन्होंने कई वैज्ञानिक पुस्तकें लिखीं, जिसमे Fundamentals of Thermodynamics, Elementary Nuclear and Reactor Physics प्रमुख हैं। 9 मई 2009 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया था।
Sheikh Hasina को शादी से दो बच्चे सजीब और साइमा
इस शादी से उन्हें दो बच्चे सजीब वाजेद और साइमा वाज़ेद हैं। सजीब बिजनेसमैन और IT विशेषज्ञ हैं जबकि साइमा एक मनोवैज्ञानिक और स्वास्थ्य कार्यकर्ता हैं। मालूम हो कि पति, बच्चों और बहन शेख रेहाना को छोड़कर, हसीना के पूरे परिवार की 15 अगस्त 1975 को बांग्लादेशी तख्तापलट के दौरान हत्या कर दी गई थी, हत्या के समय हसीना, वाजेद और रेहाना यूरोप का दौरा कर रहे थे।
16 फरवरी 1981 को शेख हसीना की हुई थी घर वापसी
भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से राजनीतिक शरण का प्रस्ताव स्वीकार करने के बाग उनके परिवार के सभी जीवित सदस्य छह साल तक भारत के नई दिल्ली में निर्वासन में रहे। 16 फरवरी 1981 को बांग्लादेश अवामी लीग की अध्यक्ष चुने जाने के बाद, हसीना 17 मई 1981 को वतन लौटी थीं।












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