SCO Summit: 'ड्रैगन और हाथी का साथ आना जरूरी', PM मोदी से मुलाकात के बाद भारत को लेकर क्या बोले शी जिनपिंग?
SCO Summit 2025: तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से पहले हुई डेलिगेशन लेवल की बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच गर्मजोशी भरा संवाद देखने को मिला। दोनों नेताओं ने पुरानी तनावपूर्ण परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए भारत-चीन संबंधों में नए अध्याय की शुरुआत का संकेत दिया।
शी जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन जैसे दो सभ्य और सबसे अधिक आबादी वाले देशों के बीच मित्रता बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने वैश्विक बदलाव के संदर्भ में कहा कि, 'दुनिया परिवर्तन की ओर बढ़ रही है। हम दोनों ग्लोबल साउथ का हिस्सा हैं। दोनों का दोस्त होना, एक अच्छा पड़ोसी होना और ड्रैगन और हाथी का साथ आना बेहद जरूरी है।'

पिछली उपलब्धियां और कूटनीतिक संकेत
चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करते हुए पिछली मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा, 'पिछले साल कजान में हमारी एक सफल बैठक हुई थी।' उन्होंने इस वर्ष चीन-भारत राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ का हवाला देते हुए कहा कि दोनों देशों को अपने द्विपक्षीय रिश्तों को दीर्घकालिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से संभालना चाहिए।
अंतर्राष्ट्रीय जिम्मेदारी और वैश्विक संदेश
चीनी राष्ट्रपति ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर साझा जिम्मेदारी निभाने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि, 'हमें बहुपक्षवाद, बहुध्रुवीय विश्व और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में अधिक लोकतंत्र बनाए रखने की अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए। एशिया और दुनिया भर में शांति और समृद्धि के लिए मिलकर काम करना होगा।'
'दुनिया के अहम मामलों में चीन और भारत की भी जिम्मेदारी'
चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया के अहम मामलों में चीन और भारत की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, 'हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विभिन्न देशों के बीच सहयोग बना रहे, दुनिया में कई शक्तियों का संतुलन रहे और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में लोकतंत्र मजबूत हो। इसके साथ ही एशिया और पूरी दुनिया में शांति और तरक्की के लिए मिलकर काम करना होगा।'
बैठक का महत्व और आगे की राह
बैठक की शुरुआत हाथ मिलाने के साथ हुई, जो दोनों पुराने प्रतिद्वंदियों के बीच मेल-मिलाप और सहयोग का संकेत देती है। यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को भी संदेश है, जिनके आक्रामक टैरिफ ने नई दिल्ली और बीजिंग दोनों के साथ वाशिंगटन के संबंधों को प्रभावित किया।












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