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'पाकिस्तान के मुहाजिरों को बचाएं'

Posted By: BBC Hindi
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    अमरीका में फ़्री कराची नाम की एक मुहिम शुरू की गई है जिसकी शुरुआत मार्टिन लूथर किंग दिवस के रोज़ की गई.

    इस मुहिम के तहत पाकिस्तान में रहने वाले मुहाजिरों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई जा रही है. ये वे लोग हैं जो भारत के विभाजन के समय भारत से पलायन करके पाकिस्तान पहुंचे थे.

    इस मुहिम में वॉशिंगटन शहर में 100 टैक्सियों के ऊपर फ़्री कराची लिखे हुए बैनर और पोस्टर लगाए गए हैं. बैनर पर लिखा है- पाकिस्तान के मुहाजिरों को बचाएं- ये टैक्सियां शहर भर के अहम इलाक़ों जैसे व्हाइट हाउस, अमरीकी कांग्रेस, और विदेश मंत्रालय समेत सांसदों और सीनेटरों के दफ़्तरों के आसपास गश्त लगाती रहती हैं.

    अमरीका में रहने वाले कुछ पाकिस्तानी मुहाजिर लोग इस मुहिम में शामिल हैं. फ़्री कराची मुहिम के प्रवक्ता नदीम नुसरत इस मुहिम के बारे में कहते हैं, "इस मुहिम का कोई राजनीतिक मक़सद नहीं है.

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    इसका मक़सद यह है कि दुनिया को कराची में और सिंध के दूसरे इलाक़ों में रहने वाले शांतिप्रिय मुहाजिरों के हालात के बारे में जानकारी दी जाए, जिन्हें पाकिस्तान के सैन्य और सुरक्षा बल प्रताड़ित कर रहे हैं."

    अमरीकी कांग्रेस की विदेशी मामलों की समिति की बैठक में भी इस मुहिम के प्रतिनिधि शामिल हुए और कराची में मुहाजिरों के साथ कथित ज़्यादती के बारे में बयान दर्ज कराए.

    इस हफ़्ते अमरीकी कांग्रेस की प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के एक सदस्य डेना रोरबाकर ने भी कराची में रहने वाले मुहाजिरों के हक़ में बात की.

    पाकिस्तान मुहाजिर
    Getty Images
    पाकिस्तान मुहाजिर

    डेना रोरबाकर ने कहा, "हमें उन सभी गुटों की मदद करनी चाहिए जिन्हे पाकिस्तान में प्रताड़ित किया जा रहा है. हमें बलोचों और मुहाजिरों की मदद करनी चाहिए. इन लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है."

    पाकिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन के बारे में मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि सुरक्षा बल और ग़ैर-सरकारी गुट कराची, बलुचिस्तान और फ़ाटा के इलाकों में लोगों को प्रताड़ित करते हैं और जान से भी मार देते हैं.

    फ़्री कराची मुहिम क्यों?

    फ़्री कराची मुहिम के नदीम नुसरत का कहना है कि सन 1992 से अब तक पाकिस्तान के सिंध प्रांत में 22 हज़ार उर्दू बोलने वाले मुहाजिरों को सुरक्षा बलों ने मौत के घाट उतारा है.

    उनका कहना है कि सन 2013 से अब तक मुहाजिरों की सैकड़ों लाशें सड़कों पर फेंकी हुई मिली हैं जिनको प्रताड़ित करके मार डाला गया था.

    फ़्री कराची मुहिम का कहना है कि कराची शहर में प्रतिबंधित गुटों के लोग खुले आम नफ़रत की सोच का प्रचार करते हैं और सुरक्षा बल उनको सुरक्षा भी प्रदान करते हैं, वहीं मुहाजिरों की मुख्य राजनीतिक पार्टी मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट या एमक्यूएम पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.

    कराची में क़रीब डेढ़ करोड़ लोग रहते हैं और इनमें सबसे बड़ी संख्या मुहाजिरों की है. कराची शहर से ही पाकिस्तान को 70 प्रतिशत राजस्व मिलता है.

    लेकिन फ़्री कराची मुहिम की मानें तो सरकारों द्वारा मुहाजिरों के साथ भेदभाव किया जाता है. उनका कहना है कि मुहाजिरों को न तो पुलिस में और न ही अर्ध-सैन्य बलों में नौकरी मिलती है.

    इस मुहिम का आरोप है कि कराची में मुहाजिरों को सुरक्षा बल अगवा कर लेते हैं और फ़िरौती देने के बाद रिहा करते हैं, और जो फ़िरौती न दे सकें उनको या तो फ़र्ज़ी केस में फंसा दिया जाता है या बेरहमी से मार दिया जाता है.

    सात करोड़ मुहाजिर

    नुसरत के मुताबिक़ इस मुहिम के ज़रिए अमरीकी प्रशासन को यह संदेश भी दिया जा रहा है कि पाकिस्तान के 7 करोड़ मुहाजिर लोग धार्मिक कट्टरवाद और आतंकवाद के खिलाफ़ लड़ाई में अमरीका के दोस्त हैं. और उन्होंने मांग की कि अमरीका कराची पर तवज्जो दे क्यूंकि इस शहर को तालिबान और इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी गुटों से गंभीर ख़तरा है.

    फ़्री कराची मुहिम के प्रवक्ता नदीम नुसरत ने दावा किया है कि उनकी मुहिम को समर्थन के मामले में अमरीका के ट्रंप प्रशासन से उनको अच्छे इशारे मिल रहे हैं.

    नदीम नुसरत कहते हैं, "जी हां, बिलकुल, मैं पूरी ज़िम्मेदारी से कह सकता हूं कि हमें ट्रंप प्रशासन से इशारे मिले हैं और मिल रहे हैं और आगे भी मिलते रहेंगे क्यूंकि बहुत सारे मामलों में हमारा और उनका रुख़ मिलता जुलता है, और जो हम लोग काम कर रहे हैं उसमें भी काफ़ी समर्थन है."

    नदीम नुसरत ने बताया कि फ़्री कराची मुहिम जारी रहेगी और पाकिस्तान में रह रहे मुहाजिरों के साथ पाकिस्तानी सेना और सरकार के पक्षपात के रवैये के बारे में और मानवाधिकारों के उल्लंघन के बारे में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वह और उनके साथी आवाज़ उठाते रहेंगे.

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    BBC Hindi
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    English summary
    Save Pakistans adversaries

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