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गाजा पर बमबारी के बीच एक्शन में आया सऊदी अरब, प्रिंस सलमान ने खुद संभाला मोर्चा, इजराइल को झुका पाएंगे?

Saudi arabia on Israel-Hamas War: गाजा पट्टी में चल रही इजराइली बमबारी के बीच सऊदी अरब ने इस्लामिक देशों की असाधारण बैठक बुलाई है। अरब न्यूज के मुताबिक, सऊदी अरब ने रविवार को फिलिस्तीन पर क्षेत्रीय देशों के साथ एक शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने की योजना बनाई है, जिसका मकसद फिलिस्तीन समर्थक राज्यों को एकजुट करना है जो तत्काल युद्धविराम की मांग कर रहे हैं।

इस मुद्दे से परिचित दो लोगों ने मिडिल ईस्ट आई को सऊदी अरब के इस फैसले के बारे में बताया है और रिपोर्ट दी बै, कि यह शिखर सम्मेलन रियाद द्वारा फ़िलिस्तीन पर अरब लीग के विदेश मंत्रियों की आपातकालीन बैठक की मेजबानी के एक दिन बाद आयोजित करने की योजना है।

Saudi Arabia plans gaza summit

सऊदी अरब बुलाएगा असाधारण बैठक

हमास ने 7 अक्टूबर को इजराइल पर हमला किया था, जिसमें 1400 लोग मारे गये थे और हमास ने इजराइल के करीब 240 लोगों को बंधक बनाकर रखा हुआ है, जिनमें से ज्यादातर आम नागरिक और बच्चे हैं। उसके बाद से इजराइल लगातार गाजा पट्टी में बमबारी कर रहा है।

हमास के नियंत्रण वाले गाजा पट्टी के स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया है, कि इजराइली हमले में अभी तक 10 हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें 4 हजार से ज्यादा बच्चे हैं। इज़रायली सेना ने पूरे पड़ोस को नष्ट कर दिया है, और हजारों विस्थापित लोगों को आश्रय देने वाले अस्पतालों, बेकरियों, नागरिक बुनियादी ढांचे, मस्जिदों और स्कूलों को लगातार निशाना बनाया है।

शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने की सऊदी अरब की योजना से परिचित एक व्यक्ति ने कहा, कि इस्लामिक देश विभाजित हैं और जॉर्डन जैसे कुछ देशों की, पश्चिमी समर्थन पर अत्यधिक निर्भरता के कारण संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल के सामने उनका खड़ा होना मुश्किल हो रहा है।

अमेरिका ने इजराइल को खुला समर्थन दे रखा है और अमेरिका के विदेश मंत्री ने साफ शब्दों में कहा है, कि अगर युद्धविराम होता है, तो हमास फिर से एकजुट होगा और इजराइल पर हमला करेगा।

Saudi Arabia plans gaza summit

अरब देश हो पाएंगे एकजुट?

मामले से परिचित व्यक्ति ने कहा, कि "पिछले महीने मिस्र का काहिरा शांति शिखर सम्मेलन युद्धविराम के महत्व को रेखांकित करने के लिए एक अच्छी पहल थी, लेकिन सम्मेलन में भाग लेने वाले पश्चिमी राज्यों ने नागरिकों के खिलाफ इजरायली हमलों का सार्थक विरोध करने के हर कदम को अवरुद्ध कर दिया।"

इस तस्वीर में अगले महीने का मिस्र का राष्ट्रपति चुनाव भी शामिल है, जहां राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी स्थिर अर्थव्यवस्था और घरेलू समस्याओं के बीच एक और कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ेंगे, लेकिन, गाजा पट्टी पर इजराइल के तीव्र हमले ने उनके शासन का समर्थन करने वाले अभिजात वर्ग को भी हिलाकर रख दिया है।

मामले से परिचित एक दूसरे व्यक्ति ने कहा, कि "मिस्र के राष्ट्रपति सिसी एक कठिन स्थिति में हैं, उन्हें वोट आकर्षित करने के लिए गाजा पर लीडरशिप दिखाने की जरूरत है, लेकिन पश्चिमी आर्थिक समर्थन की वजह से उन्हें वाशिंगटन और इजराइल के साथ भी अपने संपर्क को बनाए रखने की जरूरत है।"

यानि, मिस्र दुविधा में है और वो ऐसे किसी विकल्प का समर्थन नहीं कर सकता है, जो इजराइल के खिलाफ जाता हो।

दूसरी तरफ, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोआन ने गाजा में इजरायल के सैन्य अभियानों को "नरसंहार" बताते हुए अमेरिका और इजरायली नेतृत्व के खिलाफ कठोर बयानों से उस शून्य को भरने की कोशिश की है, जो मिस्र और जॉर्डन के कदम पीछे खींचने से बनी है।

तुर्की ने बार बार फिलिस्तीन को लेकर अपने रूख को बदला है, लिहाजा अर्दोआन के ऊपर अरब देशों का यकीन कम हुआ है।

इस बार भी, शुक्रवार को अर्दोआन ने कहा, कि वह इजराइल के प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से संपर्क तोड़ रहे हैं, लेकिन उन्होंने आगे ये भी कहा, कि इसका मतलब यह नहीं है, कि तुर्की इजरायल के साथ संबंध तोड़ रहा है।

फिर भी, दोनों सूत्रों ने कहा है, कि अर्दोआन के सऊदी शिखर सम्मेलन में भाग लेने की संभावना है, क्योंकि तुर्की ने भी इस विचार का समर्थन किया है।

सूत्र ने कहा कि सऊदी नेतृत्व, इज़राइल के साथ संबंधों को सामान्य बनाने के अपने हालिया प्रयासों के बावजूद, इज़राइलियों पर कार्रवाई करने के लिए दबाव डालने को तैयार है, और रविवार को शिखर सम्मेलन यह दिखाने का एक तरीका हो सकता है।

सऊदी विदेश मंत्रालय ने रविवार को गाजा पर परमाणु बम गिराए जाने का सुझाव देने वाले एक इजरायली मंत्री की कड़ी निंदा की और इजरायल को "कब्जे वाली सरकार" कहा है।

अंकारा में अलग-अलग आधिकारिक सूत्रों ने बताया है, कि तुर्की तत्काल युद्धविराम के लिए इजराइल पर दबाव डालने की कोशिश कर रहा है, साथ ही वो एक ऐसा समझौता रखने की कोशिश कर रहा है, जिसके तहत हमास इजराइल के 240 बंधको को रिहा करे और बदले में इजराइल हमास के 6 हजार बंदियों को रिहा करे। हालांकि, इस सौदे पर इजराइल के सहमत होने की संभावना काफी कम है।

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