पैंगोग त्सो में चीन ने दिया है भारत को बहुत बड़ा धोखा? सैटेलाइट तस्वीरों से PLA की साजिश का खुलासा
सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि पैंगोंग त्सो के ठीक पीछे चीन ने अपनी सेना को तैनात कर रखा है।
नई दिल्ली, जुलाई 27: पैंगोग त्सो में भारत और चीन के बीच समझौता हो चुका है और समझौते के तहत दोनों देशों की सेना पीछे हट चुकी है। लेकिन, सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि पैंगोग त्सो में चीन भारत को बहुत बड़ा धोखा दे रहा है और किसी भी वक्त वो घात लगाकर फिर से भारत में घुसपैठ कर सकता है। सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि पैंगोंग त्सो से सटे इलाके में चीन ने भारी विध्वंसक हथियारों और सेना के जवानों की तैनाती कर रखी है।
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पैंगोंग त्सो के पीछे PLA
सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि चीन की सेना भारत को धोखा देने की कोशिश में है और चीन का असल इरादा तनाव कम करने का है ही नहीं। दरअसल, 6 महीने पहले भारत और चीन के बीच पैंगोत्स झील से अपनी अपनी सेना को पीछे हटाने को लेकर समझौता हुआ था, जिसके आधार पर दोनों देशों की सेना पैंगोंग त्सो झील से पीछे हट गई थी, लेकिन अब पता चल रहा है कि पैंगोग त्सो, जो फिंगर-4 है, वहां से सेना हटाकर चीन ने उसे फिंगर-8 के ठीक पीछे तैनात कर दिया है। यानि, जो विवादित जगह है, उसके पास ही चीन ने अपनी सेना को जमाकर रखा हुआ है।
सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा
ओपन इंटेलीजेंस सोर्स detresfa की रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने भारी तादात में सैनिकों को पैंगोंग त्सो झील के पास वाले इलाके में तैनात कर रखा है, जिससे साफ साफ पता चलता है कि भारत और चीन के बीच का सीमा विवाद अभी भी बना हुआ है और पीएलए इस विवाद को खत्म करने के मूड में बिल्कुल भी नहीं है। वहीं, ताजा रिपोर्ट्स में ये भी पता चला है कि सांशे में चीन ने यरकांट एयरपोर्ट का संचालन फिर से शुरू कर दिया है, जिसका मकसद पूर्वी लद्दाख में भारतीय एयरफोर्स को काउंटर करना है। सैटेलाइट की ताजा तस्वीरों से पता चलता है कि चीन ने अपने एयरपोर्ट के मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया है।
जवाब देने के लिए तैयार भारत
वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन के तेवरों को देखते हुए भारत ने भी बड़ा कदम उठाया है। भारतीय सेना ने इस्टर्न लद्दाख में काउंटर टेरेरिज्म डिविजन की यू्निट तैनात की हैं। सेना ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए तैयार अपनी इकाइयों को पूर्वी लद्दाख में तैनात किया है। चीन से निपटने के लिए कुछ महीने पहले इन यूनिट के 15,000 सैनिकों को लद्दाख सेक्टर में लाया गया है। इस इलाके में चीन की हरकतों को देखते हुए ये तैनाती की गई है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की ओर से उठाए गए किसी भी कदम का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए ये यूनिट लेह स्थित 14 कोर मुख्यालय की सहायता करेंगी।

उकसाने की कोशिश में चीन की सेना
चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत के साथ मामलों को बातचीत के जरिए सुलझाने के दावे कर रहा है लेकिन सैन्य तैयारियों में भी लगातार कुछ ना कुछ कर रहा है। हाल ही में खबर आई थी कि चीन झिंजियांग प्रांत के शाक्चे टाउन में लड़ाकू विमानों के संचालन के लिए एक एयरबेस बना रहा है। ये इलाका पूर्वी लद्दाख क्षेत्र के करीब है। वहीं चीनी सेना के सीमा के आसपास निर्माण किए जाने की भी खबरें आती रही हैं। बता दें कि भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लंबे समय से तनाव चल रहा है। बीते साल मई जून में तो काफी ज्यादा तनाव देखने को मिला था। बीते साल जून में गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ झड़प में 20 भारतीय सैनिकों की जान भी चली गई थी। एक साल से भी ज्यादा समय से दोनों देशों के बीत कई स्तरों पर बातचीत चल रही है।












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