अमेरिका: चुनावों को प्रभावित करने वाले हैकर्स ने न्यूक्लियर प्लांट और पावर ग्रिड को बनाया निशाना

नई दिल्ली: अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हो रहे हैं। इस बीच साइबर सुरक्षा अधिकारियों ने देखा कि चुनाव से ठीक दो महीने पहले रूसी हैकर्स ने दर्जनों अमेरिकी स्टेट और स्थानीय सरकारी कंप्यूटर सिस्टम को खंगालन शुरू कर दिया था। अधिकारियों को ये पहले से अनुमान था कि 2016 में चुनाव प्रभावित करने वाले हैकर्स फिर से वापस आ जाएंगे। जिस वजह से उन्होंने जरूरी कदम उठाए थे। इस बीच कुछ न्यूक्लियर प्लांट और पावर ग्रिड उनके निशाने पर आ गए थे।

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इस दौरान ये भी पता चला कि पावर सेक्टर में हैकिंग करने वाला "ड्रैगनफ्लाई" और "एनर्जेटिक बीयर" ग्रुप 2016 के चुनावी हैकिंग में शामिल नहीं था। हालांकि ये पांच सालों में कई पावर ग्रिड, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और न्यूक्लियर प्लांट में सेंध लगा चुके हैं। इसी ग्रुप ने सैन फ्रांसिस्को इंटरनेशनल एयरपोर्ट का वाई-फाई सिस्टम हैक किया था। सितंबर में हुई घुसपैठ ने इस ओर इशारा किया कि रूस के फेडरल सिक्योरिटी सर्विस ने अमेरिका के जरूरी संस्थानों को निशाना बनाया है। चुनाव के करीब आते ही ये सेंधमारी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है। कुछ हैकर्स ऐसे भी हैं, जो चुनाव और प्लांट दोनों वाली हैकिंग में शामिल हो सकते हैं।

अमेरिकी अधिकारियों ने गुरुवार को एडवाइजरी जारी कर कहा कि ये एक अवसरवादी हमला है, हालांकि उन्होंने माना कि हैकर्स ने स्टेट की कई स्थानीय प्रणालियों को निशाना बनाया है। साथ ही साथ कम से कम दो सर्वर से डेटा चोरी किया। उन्होंने कहा कि एनर्जेटिक बीयर एक वाइड नेट का इस्तेमाल करता है। वो एनर्जी सेक्टर की वेबसाइट में वायरस डाल देते हैं, जिसके बाद जो भी उस पर जाता है, उससे जुड़ी सारी डिटेल उनको मिल जाती है। जिसमें एनर्जी सेक्टर के कर्मचारी भी शिकार बनते हैं।

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