दुनिया के लिए राहत की बात, परमाणु बम नहीं चलाएगा रूस, लेकिन अल्ट्रासोनिक हथियार चलाने की चेतावनी...
रूस ने भले ही कहा हो, कि वो परमाणु युद्ध शुरू करने के पक्ष में नहीं है, लेकिन हाथों हाथ रूस ने अल्ट्रासोनिक हथियार इस्तेमाल करने की चेतावनी भी दे दी है।
मॉस्को, मई 02: यूक्रेन युद्ध का आज 68वां दिन और पिछले दो महीने की लड़ाई के दौरान दुनिया जिस बात से सबसे ज्यादा परेशान थी, वो बात ये थी, कि कहीं परमाणु युद्ध शुरू ना हो जाए। लेकिन, अब ऐसा लग रहा है, कि रूस परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं करने के लिए तैयार हो गया है, लेकिन इसके साथ ही साथ रूस ने अल्ट्रासोनिक हथियार चलाने की चेतावनी दे दी है। ऐसे में आईये जानते हैं, कि युद्ध के 68वें दिन क्या जंग के मैदान में क्या बड़े अपडेट्स हैं और अल्ट्रासोनिक हथियार क्या होते हैं?

झुकने के लिए तैयार नहीं रूस
यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने पर पश्चिमी देशों के दबाव के सामने अभी भी रूस झुकने के लिए तैयार नहीं है, और रविवार को रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने साफ कर दिया है, कि रूस पीछे नहीं हटेगा। मॉस्को ने पश्चिम से संभावित हमले का मुकाबला करने के लिए 'अल्ट्रासोनिक हथियार' विकसित किए हैं, और समाचार एजेंसी रॉयटर्स के हवाले से कहा गया है, कि रूस ने एक साथ परमाणु युद्ध के खतरे को कम कर दिया है। 72 वर्षीय रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने जोर देकर कहा कि, ‘पश्चिमी मीडिया रूसी खतरों को गलत तरीके से पेश करता है। रूस ने उन समझौतों तक पहुंचने के प्रयासों में कभी बाधा नहीं डाली है, जो गारंटी देते हैं कि परमाणु युद्ध कभी शुरू नहीं हो'। इस बीच, युद्ध प्रभावित देश में, मारियुपोल स्टील प्लांट से आंशिक निकासी भी गई है, जहां क्रेमलिन के हमले के बीच बड़ी संख्या में नागरिक फंस गए थे।
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क्या होते हैं अल्ट्रासोनिक हथियार?
रूस ने भले ही कहा हो, कि वो परमाणु युद्ध शुरू करने के पक्ष में नहीं है, लेकिन हाथों हाथ रूस ने अल्ट्रासोनिक हथियार इस्तेमाल करने की चेतावनी भी दे दी है। ऐसे में जानना जरूरी है, कि आखिर अल्ट्रासोनिक हथियार क्या होते हैं। अल्ट्रासोनिक हथियार कई तरह के होते हैं, लेकिन इसका मुख्य काम काफी तेज आवाज के जरिए दुश्मनों को गंभीर घायल करना होता है। अल्ट्रासोनिक हथियार, काफी तेज आवाज को इकट्ठा कर एक केन्द्रित बीम बनाते हैं और फिर दुश्मन पर हमला करते हैं। अत्यधिक उच्च शक्तिशाली ध्वनि तरंगे दुश्मन को गंभीर रूप से घायल कर देते हैं। फिलहाल दुनिया में काफी कमजोर अल्ट्रासोनिक हथियार कई देशों की पुलिस घरेलू प्रदर्शनों को कंट्रोल करने के लिए करती है, लेकिन इसकी क्षमता काफी कम होती है और मकसद प्रदर्शनकारियों को सिर्फ भगाना होता है, उन्हें घायल करना नहीं।

यूक्रेन युद्ध का 68वां दिन
वहीं, यूक्रेन युद्ध का आज 68वां दिन है और यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने आरोप लगाया कि मॉस्को "विनाश का युद्ध" कर रहा है। उन्होंने कहा कि रूसी गोलाबारी ने खार्किव, डोनबास और अन्य क्षेत्रों में खाद्य, अनाज और उर्वरक गोदामों और आवासीय इलाकों को प्रभावित किया है। समाचार एजेंसी एपी ने बताया कि, जेलेंस्की ने कहा है कि, ‘वे जो लक्ष्य चुनते हैं, वे एक बार फिर साबित करते हैं कि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध रूसी सेना के लिए विनाश का युद्ध है। इस युद्ध में रूस की सामरिक सफलता क्या हो सकती है?

अनाज भंडारों को ध्वस्त करता रूस
वहीं, यूक्रेन का दावा है कि, रूस देश के अंदर अनाज गोदामों का बर्बाद कर रहा है और निप्रॉपेट्रोस क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रशासन ने कहा है कि, सिनेलनिकोव्स्की जिले में एक मिसाइल हमले से एक अनाज गोदाम नष्ट कर दिया गया है। हालांकि, क्षेत्रीय अधिकारी वैलेन्टिन रेज्निचेंको ने कहा कि, इस हमले में कोई घायल या हताहत नहीं हुआ है।

युद्ध में 219 बच्चे मरे
यूक्रेन के अभियोजक जनरल के कार्यालय ने बताया है कि 24 फरवरी को रूस ने अपने पूर्ण पैमाने पर आक्रामक अभियान शुरू करने के बाद से यूक्रेन में लगभग 219 बच्चों की मौत हो गई है, और 405 घायल हो गए हैं। अभियोजक जनरल के कार्यालय ने कहा है कि, रूस के हमले में डोनेट्स्क क्षेत्र में 139 बच्चों की मौत हुई है, जबकि राजधानी कीव में 115, खार्किव में 95 और चेर्निहाइव में 68 बच्चों की मौत हुई है। वहीं, ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि, यूक्रेन में युद्ध की शुरुआत में रूस ने अपने 120 बटालियन को लड़ाई करने के लिए भे था, लेकिन उनमें से एक चौथाई बटालियन अब युद्घ करने लायक नहीं बचे हैं और उनके अप्रभावी होने की संभावना है।

यूक्रेनी शरणार्थियों से मिलेंगी जिल बाइडेन
अमेरिका की फर्स्ट लेडी जिल बाइडेन ने यूक्रेनी शरणार्थियों से मिलने का फैसला किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 5 और 6 मई को जिल बाइडेन रोमानिया और स्लोवाकिया का दौरा करने वाली हैं और इस दौरान वो यूक्रेनी शरणार्थियों से मुलाकात करेंगी। इस दौरान वो अमेरिकी अधिकारियों से भी मुलाता करेंगी और यूक्रेनी शरणार्थियों की दी जाने वाली मदद का जायजा लेंगी। माना जा रहा है, कि अमेरिका की फर्स्ट लेडी का यूक्रेनी शरणार्थियों से मिलने का फैसला यूक्रेन के पड़ोसी देशों को यह विश्वास दिलाना है, कि अमेरिका उनके साथ खड़ा है।












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