NATO ने रूसी सेना को लेकर कही चौंकाने वाली बात, रेड आर्मी को हुए नुकसान का दिया ये आंकड़ा
नई दिल्ली, 24 मार्च। रूस और यूक्रेन के संघर्ष (Russia Ukraine Conflict) में दोनों देशों का भारी नुकसान हो रहा है। लेकिन इसकी सबसे अधिक कीमत यूक्रेन को चुकानी पड़ रही है। वहीं नाटो (NATO) की ओर से कहा जा रहा है कि ब्लादिमीर के रुख से उनकी सेना का भारी नुकसान हो रहा है। इसका रेड आर्मी पर विपरीत असर पड़ रहा है। यूक्रेन को युद्ध की आग में झोंकने वाले नाटो ये दावे कितने सच है यह तो कहना मुश्किल है लेकिन यूक्रेन की तबाही को रोकना शायद अब किसी के बस की बात नहीं रही। नाटो ने रूस यूक्रेन युद्ध को लेकर कुछ ताजा आंकड़े पेश किए हैं। आइए जानते हैं कि नाटो की नजर में युद्ध में किसको कितना नुकसान अब तक के युद्ध में हुआ है।

वर्तमान में यह सबको पता है कि यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध का का मुख्य कारण क्या है। इसके पीछे नाटो का बहुत बड़ा हाथ माना जा रहा है। वहीं नाटो आज यूक्रेन के युद्ध में रूसी सेना को हुए नुकसान के आंकड़े दे रहा है। नाटो (NATO) यानी The North Atlantic Treaty Organization, जिसे हम उत्तर अटलांटिक संधि संगठन भी कह सकते हैं। साल 1949 में इस संगठन के मूल सदस्य बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, आइसलैंड, इटली, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड, नॉर्वे, पुर्तगाल, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका थे। लेकिन वर्तमान में इस संगठन में सदस्य देशों की संख्या 30 के करीब पहुंच गई है। यह एक तथ्य है कि यूक्रेन और नाटो के बीच औपचारिक रूप से संबंध वर्ष 1992 में स्थापित हुए थे।
1994 में, यूक्रेन सोवियत संघ के बाद पहला देश था जिसने नाटो में शामिल होने के लिए मध्य और पूर्वी यूरोपीय देशों की पहल का समर्थन किया था। इसके लिए यूक्रेन ने उस वक्त शांति पहल के लिए नाटो के साथ एक प्रारुप पर सहमति भी जताई थी। जून 2021 में ब्रसेल्स शिखर सम्मेलन में, नाटो नेताओं ने कहा कि कि यूक्रेन प्रक्रिया के एक अभिन्न अंग के रूप में सदस्यता कार्य योजना के साथ गठबंधन का सदस्य बन जाएगा। इस तरह नाटो यूक्रेन को सदस्य बनाने की बात करता रहा लेकिन यूक्रेन नाटो का सदस्य नहीं बन पाया। नाटो का सदस्य बनने के प्रयास के साथ ही यूक्रेन की रूस के साथ दूरी बढ़ती गई और यह दूरी आज युद्ध तक आ पहुंची। अब नाटो रूस और यूक्रेन के युद्ध (Russia Ukraine Conflict) में रूस को हुए नुकसान के आंकड़े दे रहा है। वहीं यूक्रेन में हुए नुकसान के आंकड़ो का नाटो ने जिक्र तक नहीं किया।
रूस की आर्मी ने खोए 40,000 सैनिक: NATO
नाटो की ओर कहा गया है कि रेड आर्मी ( Russian Army) ने अब तक 40,000 सैनिकों को खो दिया है। संगठन की ओर से यह कहा गया कि इतने सैनिक युद्ध के 4 सप्ताह के दौरान मारे गए हैं। नाटो की ओर से यह भी कहा गया कि घायल या पकड़े गए रूसी सैनिकों की कुल संख्या से पता चलता है कि अब रूसी सेना का मनोबल गिर रहा है।
रूसी सेना के मनोबल पर पड़ रहा असर: NATO
नाटो ने यह कहा है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सेना के मनोबल पर इसका प्रभाव पड़ रहा है। संगठन की ओर से कहा गया कि रूस के एक अधिकारी ने बताया कि मारे गए रूसी सैनिकों की संख्या 7,000 से 15,000 के बीच है। घायलों और बंदी बनाए गए लोगों को जोड़ा जाए तो ऐसे सैन्य अभियान पर निकाले गए सैनिकों की संख्या 30,000 से 40,000 के बीच हो जाती है।
नुकसान बढ़ने पर स्थिति गंभीर होने की आशंका
वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नुकसान 30 प्रतिशत यानी 60,000 तक हो गया तो स्थिति गंभीर हो सकती है। दोनों पक्षों की ओर से आक्रमण बढ़ने की संभावना है। अनुमान लगाया जा रहा है कि अब तक युद्ध कुल 40,000 से अधिक रूसी सैनिक या तो मारे गए या फिर घायल हुए या यूक्रेन में पकड़े गए हैं। सैन्य कार्रवाई में मास्को के एक और सेनापति की मृत्यु हो चुकी है।












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