पुतिन के इस कदम से यूरोप को लगा तगड़ा झटका, जर्मनी समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था का डूबना तय!
मंगलवार को यूक्रेनी सेना ने दावा किया है, कि रूसी क्रूज मिसाइलों ने यूक्रेन के दक्षिणी हिस्सों पर हमला किया है और इसका जवाब यूक्रेनी सेना की तरफ से भी दिया गया है।
मॉस्को, जुलाई 26: यूक्रेन का समर्थन करने वाले देशों को पुतिन ने तगड़ा झटका दिया है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने रूस को प्रतिबंधों के जाल में ये सोचकर घेरा था, कि रूस यूक्रेन से अपने सैनिकों को बुला लेगा और पश्चिमी देशों के सामने रूसी राष्ट्रपति पुतिन घुटनों पर होंगे, लेकिन ऐसा लगता है, कि अमेरिका और यूरोप के खिलाफ पुतिन ने पहले से ही सारी प्लानिंग कर रखी थी और यही वजह है, कि पुतिन ने अब जो कदम उठाए हैं, उससे यूरोपीय देशों में खलबली मच गई है।

पुतिन के कदम से यूरोप में खलबली
यूक्रेन का साथ देने वाले और रूस पर प्रतिबंधों की बौछार करने वाले यूरोपीय देशों को बड़ा झटका देते हुए रूस ने एक बार फिर से यूरोपीय देशों की गैस आपूर्ति को बंद करने का फैसला लिया है। पिछले हफ्ते जब रूस और यूक्रेन के बीच काला सागर के रास्ते अनाज निर्यात को फिर से शुरू करने पर सहमति बनी थी, तो इस बात की उम्मीद बंधी थी, कि यूरोपीय देशों की आर्थिक बाधाएं कम हो जाएंगी, लेकिन अब रूस ने फिर से यूरोपीय देशों की गैस आपूर्ति को बंद करने का फैसला लिया है। यूक्रेनी शहर ओडेसा में इस हफ्ते रूस ने फिर से हमले किए हैं, बावजूद इसके अमेरिका ने कहा था, कि समझौते के तहत ओडेसा बंदरगाह से अनाज लेकर जहाज रवाना हो जाएंगे। दूसरे विश्व युद्ध के बाद से यूरोप में सबसे बड़े संकट में फंसा हुआ है और यूक्रेन युद्ध को शुरू हुए अब 6 महीने हो चुके हैं, लेकिन शांति की संभावना दूर दूर तक नहीं दिखाई दे रही है। लेकिन, इसका असर विश्व के कई देशों पर पड़ रहा है, खासकर कई अफ्रीकी देशों में गंभीर खाद्यान्न संकट पैदा हो गया है।

अभी भी हमले कर रहा है रूस
मंगलवार को यूक्रेनी सेना ने दावा किया है, कि रूसी क्रूज मिसाइलों ने यूक्रेन के दक्षिणी हिस्सों पर हमला किया है और इसका जवाब यूक्रेनी सेना की तरफ से भी दिया गया है। हालांकि, रूसी रक्षा मंत्रालय की तरफ से इस हमले को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इस महीने की शुरुआत में, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिम को चेतावनी दी थी, कि प्रतिबंधों से विश्व तेल की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि का खतरा है।

जर्मनी पर पड़ेसा सबसे ज्यादा असर
रूसी ऊर्जा कंपनी गज़प्रोम ने सोमवार को घोषणा की है, कि नॉर्ड स्ट्रीम 1 पाइपलाइन के माध्यम से जर्मनी को गैस की आपूर्ति बुधवार तक घटकर 33 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रति दिन हो जाएगी। लिहाजा, इससे जर्मनी पर काफी ज्यादा प्रभाव पड़ेगा और जर्मनी कई उद्योग बंद हो सकते हैं। जर्मनी भारी मात्रा में ऊर्जा का आयात रूस से करता आया है और जर्मनी की पूर्व चांसलर एंजला मर्केल और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच काफी अच्छे संबंध थे और उसी वजह से रूस और जर्मनी के बीच नॉर्ड स्ट्रीम-1 गैस पाइपलाइन की शुरूआत हुई थी और नॉर्ज स्ट्रीम पाइपलाइन प्रोजेक्ट-2 के लिए भी काम शुरू हो गया था। लेकिन, एंजला मर्केल के चांसलर पद छोड़ने के बाद जब यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ, तो अमेरिकी प्रेशर की वजह से जर्मनी को पाइपलाइन-2 का प्रोजेक्ट बंद करना पड़ा, जिसकी वजह से रूस बौखलाया हुआ है और अब रूस ने जर्मनी की कुल जरूरत का सिर्फ 40 प्रतिशत ही गैस सप्लाई कर रहा है और आने वाले हफ्तों में उसे भी बंद कर देगा। जिससे जर्मनी बुरी तरह से घबराया हुआ है। आपको बता दें कि, यूरोप की लगभग 40% गैस और 30% तेल युद्ध से पहले रूस से आयात किया जाता था।

क्रेमलिन का बड़ा दावा
क्रेमलिन का दावा है कि रखरखाव के मुद्दे और पश्चिमी प्रतिबंध गैस आउटेज के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन यूरोपीय संघ ने रूस पर ऊर्जा जबरन वसूली का आरोप लगाया है। जर्मनी के अनुसार नवीनतम कटौती का कोई तकनीकी औचित्य नहीं है। वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने चेतावनी जारी की है, कि रूस ने यूरोप के खिलाफ 'गैस युद्ध' शुरू कर दिया है।

यूरोप को रहना होगा तैयार
यूरोपीय संघ आयोग ने कहा कि प्राकृतिक गैस की शुरुआती कटौती स्वैच्छिक होगी, लेकिन रूस द्वारा अचानक सप्लाई बाधित करने की स्थिति में पूरे ब्लॉक में अनिवार्य कटौती लागू की जाए। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय आयोग ने एक बयान में कहा, "क्रेमलिन के गैस निर्यात के हथियारकरण के कारण यूरोपीय संघ को रूस से गैस आपूर्ति में और कटौती का खतरा है। ऐसे में अभी कार्रवाई करने से आगे या पूर्ण व्यवधान की स्थिति में यूरोप के लिए जोखिम और लागत दोनों कम हो सकते हैं।"

चरमरा सकती है यूरोप की अर्थव्यवस्था
जर्मनी यूरोपियन यूनियन के अंदर सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। अगर जर्मनी की अर्थव्यवस्था ढहती है तो इससे यूरोप ही नहीं पूरी दुनिया में आर्थिक तबाही मच जाएगी। इस महीने की शुरूआत में एसएंडपी ग्लोबल ने अपना परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स जारी किया था, जिसके मुताबिक, जर्मन कंपनियों को मिलने वाले ऑर्डर का सूचकांक गिर कर 43.3 पर आ गया, जबकि मई में यह 47 अंक पर था। इस इंडेक्स में 50 से कम अंक का मतलब यह समझा जाता है कि संबंधित उद्योग की वृद्धि दर नकारात्मक हो गई है।












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