Russia Ukraine war में 5 भारतीयों की मौत, धोखे से रूसी सेना में हुए थे भर्ती, बचे लोगों ने सरकार से लगाई गुहार
Indian youth trapped in Russia: रूस-यूक्रेन युद्ध तीन साल से अधिक समय से जारी है और इसमें अब भारतीय युवक भी फंसते जा रहे हैं। पंजाब और जम्मू के दर्जनों युवा एजेंटों के जाल में फंसकर रूस पहुंचे, जहां उन्हें छात्र या विज़िटर वीज़ा पर भेजा गया, लेकिन सीधे सेना में भर्ती कर दिया गया। बिना किसी प्रशिक्षण और तैयारी के इन्हें हथियार थमा कर मोर्चे पर भेजा जा रहा है।
कई युवाओं की मौत हो चुकी है, जबकि बाकी अब अग्रिम मोर्चे पर तैनाती के लिए तैयार हैं। परिवारों ने बार-बार शिकायत की है, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वीडियो जारी कर युवाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।

रूसी सेना में धोखे से भर्ती हुए
रूसी सेना में धोखे से भर्ती किए गए भारतीय युवाओं में से एक ने मीडिया को बताया कि उन्हें शुरुआत में विज़िटर वीज़ा पर रूस आने के लिए कहा गया था। उनका मकसद केवल पढ़ाई या नौकरी तलाशना था, लेकिन जैसे ही वे रूस पहुंचे, उन्हें सीधे सेना के कैंप में भर्ती कर लिया गया। उनके पास न तो कोई प्रशिक्षण था और न ही युद्ध के लिए कोई तैयारी। उन्हें सीधे हथियार थमा दिए गए और मोर्चे पर भेज दिया गया।
इस युवक ने बताया कि न तो उन्हें खाने-पीने की पर्याप्त व्यवस्था मिली और न ही स्वास्थ्य या सुरक्षा के उचित साधन उपलब्ध कराए गए। इसके चलते कई युवा अब मुश्किल हालात में फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास ना तो पर्याप्त भोजन है, ना ही आराम की सुविधा, और लगातार तनाव में रहना उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रहा है।
15 में से 5 की मौत
यूक्रेन युद्ध में फंसे भारतीय युवाओं की स्थिति गंभीर है। युवाओं का कहना है कि 15 में से 5 की मौत पहले ही हो चुकी है, जबकि आठ को अग्रिम मोर्चे पर भेजा गया है। अब शेष छह युवाओं को आगे की तैनाती के लिए तैयार किया जा रहा है। ये सभी छात्र या विज़िटर वीज़ा पर रूस गए थे, लेकिन उन्हें बिना किसी प्रशिक्षण और तैयारी के सीधे सेना में भर्ती कर दिया गया। परिवार और युवा लगातार केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद की गुहार लगा रहे हैं ताकि उन्हें इस खतरनाक स्थिति से सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
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डंकी रूट और एजेंटों का झांसा
युवाओं का दावा है कि उन्हें विदेश में नौकरी दिलाने का वादा किया गया था, लेकिन एजेंटों ने उन्हें धोखे से 'डंकी रूट' के जरिए रूस भेज दिया। प्रत्येक युवक से लगभग 40 लाख रुपये वसूल किए गए। जम्मू निवासी सुमित शर्मा ने बताया कि, वह मॉस्को स्टेट लिंग्विस्टिक यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे, तभी एक महिला एजेंट ने उन्हें छलपूर्वक सेना में भर्ती कर लिया। अब उन्हें यूक्रेन के कब्जे वाले डोनेट्स्क क्षेत्र में रखा गया है और वहां से निकलने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
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