Russia-Ukraine: 'एक भी सैनिक नहीं बचेगा’ 26 देशों ने यूक्रेन को दी सुरक्षा की गारंटी तो आग-बबूला हुए पुतिन
Russia-Ukraine: यूक्रेन को यूरोपियन देशों की तरफ से बढ़ी बढ़त मिली है। जिसके बाद युद्ध खत्म होने के बाद उसकी सुरक्षा की गारंटी का अंदाजा लगाया जा रहा है। लेकिन पुतिन इस कदम से बौखला गए हैं। उन्होंने सभी यूरोपियन देशों को धमकी दे दी है।
क्या मिला गारंटी में?
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गुरुवार को ऐलान किया कि यूक्रेन को 26 सहयोगी देशों ने सुरक्षा की गारंटी दी है। ये गारंटी रूस के साथ युद्ध समाप्त होने के बाद लागू होगी। जिसमें "रिएश्योरेंस फोर्स" के रूप में इन 26 देशों के सैनिक रूस-यूक्रेन बॉर्डर पर तैनात होंगे। मैक्रों ने पेरिस में एक खास बैठक (Coalition of the willing) की बैठक के बाद यह बात कही। इस समूह में यूक्रेन का समर्थन करने वाले 35 देश शामिल हैं।

पुतिन के बगल में यूरोप की सेना
मैक्रों के मुताबिक, इन 26 देशों ने यूक्रेन में सैनिकों की तैनाती के लिए हामी भर दी है। इसका जिसका मकसद सीजफायर या जंग खत्म होने के बाद यूक्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, जिसमें जमीन, समुद्र और वायु में इन 26 देशों केे सैनिक रूस-यूक्रेन बॉर्डर पर तैनात रहेंगे।
बंद कमरे की बैठक
इससे पहले गुरुवार को, मैक्रों और अन्य यूरोपीय नेताओं ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की और अमेरिकी शांति वार्ता के दूत स्टीव विटकोफ से मुलाकात की। इस बैठक में युद्ध खत्म होने के बाद यूक्रेन के लिए लंबे वक्त तक के लिए सैन्य सहायता और अमेरिकी समर्थन सुनिश्चित करने के तरीकों पर चर्चा की गई। ज़ेलेंस्की ने विटकोफ के साथ एक बंद कमरे में भी बैठक की।
अमेरिका ने अभी नहीं कहा 'हां'
मैक्रों ने ज़ेलेंस्की के साथ एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह रिएश्योरेंस फो्स "रूस के खिलाफ युद्ध छेड़ने का इरादा नहीं रखती।" इसका लक्ष्य "किसी भी नई बड़ी आक्रामकता को रोकना और यूक्रेन की स्थायी सुरक्षा में 26 राज्यों को स्पष्ट रूप से शामिल करना" है। हालांकि सुरक्षा गारंटी में किसी भी अमेरिकी भागीदारी का विवरण अभी पुख्ता नहीं हुआ है, मैक्रों और ज़ेलेंस्की दोनों ने कहा कि वाशिंगटन ने इस योजना का हिस्सा बनने की इच्छा व्यक्त की है।
पुतिन पर दबाव बनाने की कोशिश
यूरोपीय नेताओं, जिनमें से कुछ ने वर्चुअली बैठक में भाग लिया, उन्होंने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अब लड़ाई समाप्त करने की दिशा में काम करना चाहिए। जर्मन सरकार ने संकेत दिया कि यदि मॉस्को देरी करता है तो रूस पर यूरोपीय प्रतिबंध बढ़ेंगे।
बैठक के बाद यूरोपीय नेताओं ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी फोन पर बात की। स्टार्मर के कार्यालय ने कहा कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने "जोर दिया कि समूह की यूक्रेन के प्रति एक अटूट प्रतिज्ञा है, राष्ट्रपति ट्रंप के समर्थन के साथ, और यह स्पष्ट था कि उन्हें अब पुतिन पर दबाव डालने के लिए और आगे बढ़ने की जरूरत है ताकि जंग समाप्त हो सके।"
पुतिन ने सख्त लहजे में दिया जवाब
फ्रांस के राष्ट्रपति के यूक्रेन में सैनिकों की तैनाती के इस ऐलान के बाद रूस की तरफ से सख्त जवाब आया है। क्रेमलिन ने कहा है कि "वह किसी भी हालात में यूक्रेन में विदेशी सैनिकों की तैनाती को स्वीकार नहीं करेगा। अगर यूक्रेन की धरती पर कोई भी बाहरी सैनिक आता है रूस उस पर हमला करने से गुरेज नहीं करेगा। हम नहीं चाहते कि इस युद्ध में कोई तीसरा देश आए, अगर कोई भी सैनिक आता है तो बख्शा नहीं जाएगा"।
एस्टोनिया से संबंध खत्म कर चुका रूस
इसके अलावा रूस ने गुरुवार को घोषणा की कि वह एक एस्टोनियाई राजनयिक को जवाबी कार्रवाई के रूप में निष्कासित कर रहा है, क्योंकि एस्टोनिया ने पिछले महीने एक रूसी राजनयिक को 'पर्सोना नॉन ग्रेटा' घोषित किया था।
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