Russia Ukraine War 4 Years: लाखों मौतें- बेहिसाब बर्बादी, रूस-यूक्रेन युद्ध का पूरा हिसाब, कितने भारतीय मरे?
Russia Ukraine War 4 Years: 24 फरवरी 2022 का वो दिन था, यूक्रेन में सुबह के 5 बजे बज रहे थे। रूस के राष्ट्रपति टीवी पर आए और यूक्रेन के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया। जिसके कुछ ही देर बाद यूक्रेन पर एक के बाद एक मिसाइलों की बारिश हो गई। सभी को यही लग रहा था कि 2-3 हफ्ते या फिर ज्यादा से ज्यादा एक महीने में ये झड़प खत्म हो जाएगी, लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूरोप का सबसे बड़ा सैन्य संघर्ष बन गया। इस युद्ध ने न सिर्फ दो देशों को बल्कि पूरे यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था को झकझोर दिया। कोल्ड वॉर के बाद जो संतुलन बना था, वह बिखर गया। अब यह संघर्ष अपने पांचवें साल में प्रवेश कर चुका है और फिलहाल इसके खत्म होने के कोई साफ संकेत दिखाई नहीं देते।
शांति की कोशिशें बेनतीजा, अभी और तबाही बाकी...
पिछले एक साल में डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने मॉस्को और कीव के बीच बातचीत की कोशिश की। प्रतिनिधिमंडल मिले, लंबी बातचीत भी हुई, लेकिन असली मुद्दे वहीं के वहीं रह गए। रूसी कब्जे वाली यूक्रेनी जमीन का भविष्य, युद्ध के बाद यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी और NATO से जुड़े सवाल-इन सब पर कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। कूटनीति की टेबल पर बातें हुईं, लेकिन जमीनी हालात नहीं बदले।

रिकॉर्ड में 18 लाख सैनिक हताहत
अमेरिका के थिंक टैंक Center for Strategic and International Studies (CSIS) की रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी 2022 से दिसंबर 2025 के बीच रूस और यूक्रेन दोनों के मिलाकर लगभग 18 लाख सैनिक मारे गए, घायल हुए या लापता हैं। रिपोर्ट बताती है कि रूस के करीब 12 लाख सैनिक हताहत हुए, जिनमें 3.25 लाख की मौत शामिल है। यह संख्या दूसरे विश्व युद्ध के बाद किसी भी देश द्वारा झेले गए सबसे बड़े सैन्य नुकसान में गिनी जा रही है। रूस ने जनवरी 2023 के बाद आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए। रूस पर आंकड़े छुपाने के भी आरोप लगे हैं, इसलिए नुकसान कहीं ज्यादा हो सकता है।
यूक्रेन का नुकसान
CSIS के मुताबिक यूक्रेन के 5 से 6 लाख सैनिक हताहत हुए। दोनों देशों की ओर से नियमित और पारदर्शी डेटा जारी न होने के कारण सही डेटा हासिल करना मुश्किल है, जिससे युद्ध की तस्वीर और धुंधली हो रही है।
आम यूक्रेनियों ने क्या-क्या झेला?
यूनाइटेड नेशन्स के मानवाधिकार मिशन के मुताबिक, जंग शुरू होने के बाद से यूक्रेन में 14,999 नागरिकों की मौत हो चुकी है और 40,600 से अधिक घायल हुए हैं। यूनाइटेड नेशन्स मानता है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है। कम से कम 763 बच्चों की जान गई है। साल 2025 नागरिकों के लिए 2022 के बाद सबसे घातक रहा, जिसमें 2,514 नागरिक मारे गए और 12,142 घायल हुए। यह 2024 की तुलना में 31 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है।
13 भारतीयों की भी गई जान
इस युद्ध की शुरुआत में ही एक भारतीय छात्र, जो यूक्रेन में MBBS की पढ़ाई कर रहा था, वह मारा गया। इसके बाद कई भारतीय जो रूस डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए गए थे, उन्होंने वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि उन्हें जबरन युद्ध की आग में झौंक दिया गया है। जिनमें से कई ने वीडियो जारी कर भारत सरकार से मदद भी मांगी। इनमें एक दर्जन लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। जबकि कई छात्र या रूस में रहने वाले भारतीय लोग अभी भी लापता हैं।

यूक्रेन के 19.4% क्षेत्र पर कब्जा
Institute for the Study of War के अनुसार यूक्रेन की लगभग 19.4 प्रतिशत जमीन रूस के कब्जे में है। लेकिन 2025 में रूस ने केवल 0.79 प्रतिशत अतिरिक्त क्षेत्र पर कब्जा किया। इसका मतलब है कि भारी सैन्य नुकसान और संसाधनों की लागत के बावजूद जमीन पर बहुत कम जमीन हासिल हुई है। युद्ध से पहले रूस लगभग 7 प्रतिशत यूक्रेनी क्षेत्र नियंत्रित करता था, जिसमें क्रीमिया और डोनेट्स्क-लुहांस्क के हिस्से शामिल थे।
यूक्रेन की मदद से पश्चिम ने खींचे हाथ
जर्मनी के Kiel Institute for the World Economy के अनुसार 2025 में यूक्रेन को मिलने वाली विदेशी सैन्य सहायता में 13 प्रतिशत की गिरावट आई। ट्रंप की सरकार आते ही, अमेरिका द्वारा हथियार भुगतान रोके जाने का असर पड़ा। हालांकि यूरोपीय देशों ने इस कमी को पूरा करने की कोशिश में अपनी सैन्य सहायता में 67 प्रतिशत की वृद्धि की। मानवीय और वित्तीय सहायता में भी पिछले साल 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
59 लाख शरणार्थी और 37 लाख विस्थापित- ज्यादातर बेघर
यूनाइटेड नेशन्स के आंकड़ों के मुताबिक 59 लाख यूक्रेनी नागरिक देश छोड़ चुके हैं, जिनमें से 53 लाख यूरोप में रह रहे हैं। इसके अलावा लगभग 37 लाख लोग अपने ही देश के भीतर विस्थापित हुए हैं। युद्ध से पहले यूक्रेन की आबादी 4 करोड़ से अधिक थी। यह जनसांख्यिकीय बदलाव आने वाले सालों में देश की सामाजिक और आर्थिक संरचना पर गहरा असर डाल सकता है। जिन लोगों ने भी अपने घर छोड़े या पलायन किया, उनमें से ज्यादातर आज भी बेघर हैं।
अस्पतालों को ज्यादा किया टारगेट
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार फरवरी 2022 के बाद से यूक्रेन में चिकित्सा सेवाओं को प्रभावित करने वाले 2,881 हमले दर्ज किए गए हैं। इनमें से कम से कम 2,347 हमले सीधे स्वास्थ्य सुविधाओं पर थे। 2025 में ऐसे हमलों में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई। अस्पताल, एंबुलेंस और मेडिकल स्टोरेज भी इस हिंसा का शिकार बने।
रूस में लगे सैनिक भर्ती के पोस्टर, पैसों का लालच
रूस में कई नामचीन जगहों पर यूक्रेन में लड़ने वालों को 15,000 पाउंड यानी लगभग 15.5 लाख रुपये की एकमुश्त राशि देने का वादा किया जा रहा है। पास ही एक सैनिक की तस्वीर के साथ लिखा है, 'हम वहीं हैं जहां हमें होना चाहिए।'
दीवारों पर शहीदों के चेहरे
येलेट्स शहर के एक नौ मंजिला अपार्टमेंट ब्लॉक पर पांच स्थानीय सैनिकों के चेहरे पेंट किए गए हैं, जो यूक्रेन में मारे गए। ऊपर लिखा है, 'रूस के नायकों को गौरव।' पिछले दो सालों में छोटे कस्बों में स्मारक, संग्रहालय और अलग कब्रिस्तान बनाए गए हैं। युद्ध अब सीमा से निकलकर शहर की दीवारों तक पहुंच चुका है।
आर्थिक दबाव और VAT में बढ़ोतरी
रूस ने बढ़ते बजट घाटे के बीच वैट को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 22 प्रतिशत कर दिया। वैट से होने वाली कमाई रक्षा और सुरक्षा पर खर्च होगी। जिसका सीधा असर रूस के छोटे व्यवसायों पर दिख रहा है। लोग महंगाई की मार से परेशान होकर अब देशभक्ति के साथ-साथ शिकायतें भी करने लगे हैं।
4 साल के युद्ध का हासिल क्या?
चार साल में लाखों सैनिक हताहत, हजारों नागरिक मौतें, करोड़ों लोग प्रभावित हो चुके हैं। रूस ने यूक्रेन की 19 प्रतिशत जमीन पर कब्जा जरूर कर लिया है पर इसकी कीमत भी चुकाई है। इस युद्ध ने ये भी बताया कि फौजें अपने हिस्से की लड़ाई लड़ती हैं और आम आदमी अपने हिस्से की। किसकी जान जाएगी और किसकी बचेगी यह सब भाग्य का खेल है, पर खतरा सैनिक को ही ज्यादा होता है। युद्ध अपने पांचवे साल में प्रवेश कर चुका है लेकिन इसका अंत फिलहाल नजर नहीं आता।
इस विश्लेषण पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में जरूर बताएं।












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