ICJ में भारतीय जज ने रूस के खिलाफ किया वोट, यूक्रेन का किया समर्थन
नई दिल्ली, 17 मार्च। युनाइटेड नेसंश की शीर्ष अदालत ने बुधवार को रूस को निर्देश दिया कि वह यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को रोक दे। कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से रूस यूक्रेन के खिलाफ सेना का इस्तेमाल कर रहा है वह काफी गंभीर है। इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने अपने आदेश में कहा कि रूस तत्काल प्रभाव से 23 फरवरी को यूक्रेन के खिलाफ शुरू किए गए सैन्य ऑपरेशन को रोके। जज जोआन डोंगे ने कहा कि अदालत रूसी संघ द्वारा बल के प्रयोग के बारे में काफी चिंतित है जोकि अंतरराष्ट्रीय कानून में बहुत गंभीर मुद्दों को उठाता है।

भारतीय जज ने रूस के खिलाफ किया वोट
गौर करने वाली बात है कि रूस के हमले के बाद यूक्रेन ने इस मसले को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के सामने उठाया है। वहीं दिलचस्प बात यह है कि इस केस की सुनवाई के दौरान भारतीय जज जस्टिस दलवीर भंडारी ने भी रूस के खिलाफ वोट किया है। जस्टिस भंडारी को भारत की ओर से आईसीजे में नियुक्त किया गया है। जस्टिस भंडारी ने रूस के खिलाफ वोट किया, जोकि भारत के आधिकारिक रुख से बिल्कुल अलग है। भारत ने अभी तक इस पूरे मसेल पर किसी भी देश का पक्ष नहीं लिया है। लेकिन जस्टिस भंडारी ने कोर्ट में रूस-यूक्रेन के बीच मुद्दे पर स्वतंत्र राय जाहिर की है।
भारत का रुख है अलग
बता दें कि भारत ने यूएन में यूक्रेन-रूस के मसले पर वोटिंग से खुद को अलग कर लिया था और कहा था कि दोनों ही पक्षों को बातचीत के जरिए मसले का समाधान निकालना चाहिए। गौर करने वाली बात है कि यूक्रेन रूस पर गैरकानूनी तरह से युद्ध शुरू करने का आरोप लगाता आ रहा है। यूक्रेन का कहना है कि रूस गैरकानूनी तरह से डोनेस्क और लुगांस्क क्षेत्र में नरसंहार का बहाना बनाकर यूक्रेन के खिलाफ युद्ध लड़ रहा है। यूक्रेन ने आईसीजे से अपील की है कि कोर्ट रूस को तत्काल प्रभाव से युद्ध को रोकने के लिए कहे।
यूक्रेन ने मांगी सुरक्षा की गारंटी
आईसीजे में यूक्रेन के प्रतिनिधि एंटोन कोरिनेवेच ने कहा कि रूस को युद्ध रोकना चाहिए और इसे रोकने में कोर्ट को अपनी भूमिका निभानी चाहिए। बता दें कि बुधवार को इस मामले की सुनवाई ऐसे वक्त शुरू हुई जब बड़ी संख्या में यूक्रेन के शरणार्थी देश छोड़ रहे हैं और रूस लगातार रिहाइशी इलाकों में हमले तेज कर रहा है। यूक्रेन ने कहा कि हम चाहते हैं कि हमे सुरक्षा की गारंटी दी जाए। वहीं रूस की ओर से यूक्रेन को यह प्रस्ताव दिया गया कि वह ऑस्ट्रिया और स्वीडन की तरह न्यूट्रल स्टेटस को स्वीकार करे, जिसे यूक्रेन ने खारिज कर दिया।
रूस ने दी ये दलील
इससे पहले रूस ने 7 और 8 मार्च को आईसीजी की सुनवाई में हिस्सा नहीं लिया था। रूस का कहना था कि यह आईसीजे का अधिकार क्षेत्र नहीं है क्योंकि यूक्रेन की अपील जिनोसाइड कंवेशन 1948 के दायरे में नहीं आती है। रूस ने यूक्रेन के खिलाफ सैन्य बल के प्रयोग का भी बचाव किया है, रूस का कहना है कि हम यह आत्मरक्षा में कर रहे हैं। लेकिन आईसीजे की ओर से कहा गया है कि उसका यह अधिकार क्षेत्र है। जस्टिस डोंगे ने कहा कि अभी तक रूस की ओर से इस बात के सबूत नहीं पेश किए गए हैं कि यूक्रेन में नरसंहार किया गया है।












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