प्रतिबंधों से रूसी अर्थव्यवस्था पर बहुत बड़ा खतरा, इस तारीख तक नहीं चुकाया कर्ज, तो होगा डिफॉल्टर
रूसी वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को इस संबंध में किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया, लेकिन क्रेमलिन ने इसे रूस के खिलाफ आर्थिक युद्ध करार दिया है।
लंदन/मॉस्को, अप्रैल 16: रूस बार बार दावे कर रहा था, कि उसके खिलाफ जो प्रतिबंध लगाए गये हैं, वो एक 'युद्ध' जैसा है और रूस पर लगाए गये अत्यंत सख्त प्रतिबंधों का बहुत जल्द असर भी हो सकता है और रूस पर डिफॉल्टर होने का खतरा मंडरा रहा है। विश्व प्रसिद्ध रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा है कि, 1917 की बोल्शेविक क्रांति के बाद रूस का फॉरेन बॉन्ड में सबसे बड़ा डिफॉल्ट हो सकता है।

रूस पर डिफॉल्टर होने का खतरा
अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा है, कि रूस डिफॉल्टर हो सकता है। मूडीज ने आशंका जताते हुए कहा है कि, अगर रूस अपने डॉलर बॉन्ड्स को अपनी घरेलू करेंसी रूबल में चुकाता है, तो वो डिफॉल्ट होने की स्थिति में फंस सकता है। पश्चिमी देशों ने रूस के खिलाफ काफी सख्त प्रतिबंध लगाए हैं, जिसमें रूसी कारोबारियों के साथ रूस के तमाम बड़े बैंक्स शामिल हैं। मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, यूक्रेन पर आक्रमण करने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस को प्रतिबंधों में जकड़ दिया है और रूस को पश्चिमी देशों के वित्तीय प्रणाली से बाहर कर दिया है, लिहाजा इसके परिणाम रूस पर विनाशकारी हो सकते हैं।

रूसी अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी परिमाण
मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, यदि मॉस्को को डिफॉल्टर घोषित किया जाता है, तो यह 1917 की बोल्शेविक क्रांति के बाद के वर्षों में विदेशी बांडों पर रूस की पहली बड़ी चूक होगी। वहीं, रूस की तरफ से कहा गया है कि, पश्चिमी देशों ने जानकर ऐसे प्रतिबंधों में उसे धकेला है, ताकि वो डिफॉल्टर घोषित हो जाए।

क्यों है रूस पर डिफॉल्टर होने का खतरा?
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रतिबंधों की वजह से रूस के पास करीब 650 अमेरिकी डॉलर्स फिलहाल के लिए 'बेकार' हो चुके हैं और रूस ने 202 और 2042 में मैच्योर हो रहे दो सॉवरेन बॉन्ड्स के लिए 4 अप्रैल को रूसी मुद्रा रूबल में भुगतान किया है, जबकि सिक्योरिटीज की शर्तों में साफ साफ लिखा है, कि उसे डॉलर में पेमेंट करना होगा और रूबल में पेमेंट कर रूस ने तय शर्तों का उल्लंघन किया है।

अब 4 मई तक है आखिरी तारीख
मूडीज ने गुरुवार को अपने बयान में कहा है कि, अब रूस के पास 4 मई तक की आखिरी तारीख है और अगर रूस 4 मई तक अमेरिकी डॉलर में अपना भुगतान नहीं करता है, तो मूडीज की परिभाषा के अनुसार उसे डिफॉल्टर मान लिया जाएगा। मूडीज ने अपने बयान में कहा है कि, 'बांड अनुबंधों में डॉलर के अलावा किसी अन्य मुद्रा में पुनर्भुगतान का कोई प्रावधान नहीं है।' यानि, अगर रूस को डिफॉल्टर होने से बचना है, तो उसके पास सिर्फ 4 मई तक की तारीख है। मूडीज ने कहा कि, करार के मुताबिक, साल 2018 के बाद रूस को जरूर कुछ यूरोबॉन्ड्स के लिए अपनी लोकल करेंसी रूबल में कुछ शर्तों के साथ भुगतान करने की इजाजत है, लेकिन, 2018 से पहले के पहले के बॉन्ड में ये रूस को ये सुविधा हासिल नहीं है, जो 2022 और 2042 में मैच्योर होने वाले हैं।

रूस ने साधी चुप्पी
वहीं, रूसी वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को इस संबंध में किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। रूसी वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव ने इस महीने की शुरुआत में इजवेस्टिया अखबार को बताया था, कि अगर रूस को डिफ़ॉल्ट करने के लिए मजबूर किया जाता है, तो वह कानूनी कार्रवाई करेगा। यूक्रेन में 24 फरवरी को विशेष सैन्य अभियान चलाने से पहले रूस को निवेश ग्रेड के रूप में विशेष दर्जा दिया गया था। लेकिन क्रेमलिन का कहना है कि, कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने प्रतिबंध लगाकर उसके खिलाफ एक आर्थिक युद्ध छेड़ा है, जिसकी वजह से वो डिफॉल्टर होने के कगार पर खड़ा हो गया है।

1998 में घरेलू कर्ज को रूस ने किया था डिफॉल्ट
आपको बता दें कि, इससे पहले साल 1998 में रूस ने 40 अरब अमेरिकी डॉलर के कर्ज को डिफॉल्ट घोषित किया था। उस वक्त के रूसी राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने रूस की घरेलू मुद्रा रूबल का अवमूल्यन कर दिया था। साल 1998 में एशियाई देशों पर कर्ज का संकट काफी बढ़ गया था और तेल की कीमतों में भारी गिरावट आ गई थी, जिसकी वजह से रूस दिवालिया हो गया था। जिसकी वजह से रूस की घरेलू मुद्रा रूबल पर काफी ज्यादा असर हुआ था।

डॉलर के होते हुए भी क्यों फंसा रूस?
ऐसा नहीं है कि, रूस के पास भुगतान करने के लिए डॉलर नहीं है। इस वक्त भी रूस दुनिया का चौथा ऐसा देश है, जिसके पास सबसे ज्यादा डॉलर हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि, रूस पिछले कई सालों से लगातार डॉलर खरीद कर विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ा रहा था। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि, रूसी राष्ट्रपति ने ऐसे ही संकट के दिनों के लिए देश के खजाने में डॉलर भर दिए थे, लेकिन अमेरिका, यूरोपीय देश और कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे देशों के द्वारा लगाए गये प्रतिबंधों की वजह से रूस का डॉलर भंडार खजाने में ही अटक गया है।

सदी का सबसे बड़ा खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि, रूस के ऊपर प्रतिबंधों की वजह से इस सदी का सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है और वो सदी का सबसे बड़ा डिफॉल्टर घोषित हो सकता है। इससे पहले साल 1918 में रूस के क्रांतिकारी नेता व्लादिमीर लेनिन ने जॉरिस्ट रेड को खारिज कर दिया था, जिसकी वजह से वैश्विक कर्ज बाजार भयानक तौर पर प्रभावित हुआ था और इसने रूसी अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया था, क्योंकि लगातार लड़ाईयों की वजह से रूस के ऊपर विशालकाय कर्ज जमा हो गया था।












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