रूस ने अप्रैल में ही रोकी सेना में भारतीयों की भर्ती, यूक्रेन में मारे गये भारतीय नागरिक पर जताया शोक

Russia-Ukraine War: रूस ने शनिवार को कहा है, कि उसने इस वर्ष अप्रैल से अपने सशस्त्र बलों में भारतीय नागरिकों की भर्ती बंद कर दी है और अधिकारी उन भारतीयों की शीघ्र रिहाई के लिए काम कर रहे हैं, जिन्होंने "स्वेच्छा से सैन्य सेवा के लिए कॉन्ट्रैक्ट किया था।"

नई दिल्ली स्थित रूसी दूतावास ने रूसी सेना में सेवारत भारतीयों के संबंध में स्थिति की जानकारी सार्वजनिक की है। इससे एक दिन पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को संसद को बताया था, कि रूसी सेना में भर्ती 91 भारतीयों की स्थिति पर दोनों पक्षों के विचार अलग-अलग हैं।

Russia-Ukraine War

रूसी सेना में भारतीयों की भर्ती बंद

जयशंकर ने प्रश्नकाल के दौरान लोकसभा में कहा था, कि भारत इस मामले को बहुत गंभीरता से लेता है और उसने रूस पर दबाव डाला है, कि वह रूसी सशस्त्र बलों में सेवारत अपने सभी नागरिकों की रिहाई और स्वदेश वापसी सुनिश्चित करे। यूक्रेन के साथ युद्ध की अग्रिम पंक्ति में रूसी इकाइयों के साथ सेवा करते हुए अब तक आठ भारतीय मारे गए हैं। रूसी दूतावास ने एक बयान में कहा है, कि "इस साल अप्रैल से, रूसी संघ के रक्षा मंत्रालय ने भारत सहित कई विदेशी देशों के नागरिकों को रूसी सशस्त्र बलों में सैन्य सेवा में प्रवेश देने से रोक दिया है।"

बयान में कहा गया है, कि "दोनों देशों की संबंधित एजेंसियां ​​रूस में सैन्य सेवा के लिए स्वेच्छा से अनुबंध करने वाले भारतीय नागरिकों की शीघ्र पहचान और रिहाई के लिए नजदीकी कॉर्डिनेशन में काम करती हैं।"

दूतावास ने कहा है, कि वह रूसी सशस्त्र बलों में सेवारत भारतीय नागरिकों पर टिप्पणी करने के लिए मीडिया के अनुरोधों का जवाब दे रहा है, "क्योंकि यूक्रेन में विशेष सैन्य अभियान के दौरान उनके बीच हताहत होने की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुई हैं।"

बयान में कहा गया है, कि "दूतावास भारत सरकार और मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता है।" इसमें कहा गया है, "सभी मृतकों को मुआवजा भुगतान पूरी तरह से पूरा किया जाएगा।"

हरियाणा के युवक की हुई है मौत

आपको बता दें, कि पिछले दिनों रूस में हरियाणा के एक नागरिक की यूक्रेन युद्ध में लड़ते हुए मृत्यु हुई है और रूस ने कहा है, कि वो मृतक के परिवार को मुआवजा देगा। पिछले महीने मॉस्को में भारतीय दूतावास ने हरियाणा के कैथल जिले के मटौर गांव के रहने वाले रवि मौन की मौत की पुष्टि की थी।

उनके भाई अजय मौन ने दावा किया, कि रवि मौन 13 जनवरी को रूस में ट्रांसपोर्टेशन की नौकरी देने के लिए बुलाया गया था, लेकिन उन्हें सेना में भर्ती कर लिया गया। अजय मौन ने अपने भाई के ठिकाने के बारे में जानकारी के लिए 21 जुलाई को दूतावास को लिखा था। उन्होंने कहा, "दूतावास ने हमें बताया, कि उनकी मृत्यु हो गई है।" परिवार ने कहा कि दूतावास ने उनसे शव की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट रिपोर्ट भेजने को भी कहा है। अजय ने यह भी आरोप लगाया कि रूसी सेना ने उनके भाई से यूक्रेनी सेना के खिलाफ लड़ने या 10 साल जेल की सजा भुगतने की धमकी दी थी।

उन्होंने अपने भाई के शव को भारत वापस लाने में प्रधानमंत्री मोदी से मदद का अनुरोध भी किया है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "हमारे पास उनके शव को वापस लाने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं।"

उन्होंने कहा, कि परिवार ने एक एकड़ जमीन बेचकर रवि मौन को रूस भेजने के लिए 11.50 लाख रुपये खर्च किए। 11 जून को भारत ने कहा, कि रूसी सेना द्वारा भर्ती किए गए दो भारतीय नागरिक हाल ही में चल रहे रूस-यूक्रेन संघर्ष में मारे गए हैं, जिससे ऐसी मौतों की संख्या चार हो गई है।

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