बांग्लादेश में बार बार रोहिंग्या रिफ्यूजी कैंप में क्यों लगती है आग? 2 साल में 222 घटनाएं साजिश तो नहीं?
रोहिंग्या मुसलमानों की समस्या पिछले कई सालों से मौजूद हैं, जिन्हें म्यांमार से भगा दिया गया था। इनकी तादाद करीब 10 लाख से ऊपर है। करीब 7 लाख 40 हजार रोहिंग्या म्यांमार की सीमा अगस्त 2017 में पार कर बांग्लादेश चले गये थे।

Bangladesh Refugee camp Fire: बांग्लादेश में रोहिंग्या रिफ्यूजी कैंप में लगी भीषण आग के बाद सवाल उठ रहे हैं, कि आखिर दुनिया की सबसे बड़ी शरणार्थियों के निवास क्यों धधक जाती है। बांग्लादेश सरकार ने कहा है, कि रोहिंग्या शरणार्थी शिविर में आग लगने की वजहों की जांच के आदेश दे दिए गये हैं, जिसमें करीब 12 हजार शरणार्थी बेघर हो गये हैं। हालांकि, बांग्लादेशी अधिकारियों ने कहा है, कि आग लगने की वजह से किसी की जान नहीं गई है, लेकिन शुरूआती जांच के बाद अधिकारियों का कहना है, कि रसोई गैस सिलेंडर के जरिए शरणार्थी कैंप में आग फैली, जिससे 2 हजार से ज्यादा आश्रयस्थल जलकर खाक हो गये।

दुनिया का सबसे बड़ा शरणार्थी शिविर
रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश के रोहिंग्या शरणार्थी शिवर में पिछले 2 सालों में 222 बार आग लग चुकी है, लिहाजा अब सवाल ये उठ रहे हैं, कि आखिर बार बार आग क्यों लग रही है? पुलिस इस बात की जांच कर रही है, कि कहीं आग तोड़फोड़ की हरकत से तो नहीं लगी है? स्थानीय मीडिया ने बताया कि एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है। दक्षिण-पूर्व में स्थित रोहिंग्या शिविर को दुनिया का सबसे बड़ा शरणार्थी शिविर माना जाता है। इसके ज्यादातर निवासी रोहिंग्या शरणार्थी हैं, जो पड़ोसी देश म्यांमार में उत्पीड़न से डरकर भाग गए थे। सोमवार को सैकड़ों लोग कॉक्स बाजार इलाके में यह देखने के लिए लौटे थे, कि वे आग के बाद जल चुके खंडहरों से क्या बचा सकते हैं। एक अधिकारी ने कहा, कि आग स्थानीय समयानुसार रविवार पर लगभग 14:45 बजे लगी हुई थी और बांस-और-तिरपाल के जरिए से तेजी से फैलती चली गई।

आग से कितना नुकसान हुआ?
बांग्लादेशी अधिकारियों के मुताबिक, तीन घंटे के भीतर आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन आग लगने से शरणार्थियों के लिए बनाए गये कम से कम 35 मस्जिदें और 21 शिक्षण केंद्र भी नष्ट हो गए। अब सामने आने वाली तस्वीरें तबाही की हद बयां कर रही हैं। वहां रहने वालों में से कई लोगों को जले हुए क्षेत्र से गुजरते हुए देखा जा सकता है, जहां केवल धातु के खंभे और गाढ़ी नालीदार छत बनी हुई है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेशनल फ़ेडरेशन ऑफ़ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज़ के हृसिकेश हरिचंदन ने बताया, कि कैंप को "भारी नुकसान" हुआ है। उन्होंने कहा, कि जल केंद्रों और परीक्षण सुविधाओं जैसी बुनियादी सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। वहीं, एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, 30 साल के रोहिंग्या व्यक्ति मामून जौहर ने बताया, कि "मेरा आश्रय जल गया है, मेरी दुकान भी जल गई है।" उन्होंने कहा, कि "आग ने मुझसे सब कुछ ले लिया, सब कुछ।"
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10 लाख से ज्यादा शरणार्थियों की निवासस्थली
आग लगने के बाद कैंप 11 के ऊपर घने काले बादल दिखाई दे रहे थे, जो सीमावर्ती जिले के कई इलाकों में से एक है, जहां दस लाख से अधिक रोहिंग्या शरणार्थी रहते हैं। रिफ्यूजीज इंटरनेशनल के हार्डिन लैंग ने कहा, कि आग से प्रभावित अनुमानित 12,000 लोगों को फिर से बसाना काफी मुश्किल होगा, क्योंकि कैंप में काफी ज्यादा भीड़ है और जगह काफी कम है। शिविर के अन्य हिस्सों में उन लोगों को बुनियादी सेवाएं देना भी एक चुनौती होगी, क्योंकि कई सेवाएं - स्वास्थ्य क्लीनिक, स्कूल नष्ट हो गए हैं। उन्होंने बीबीसी से कहा, कि "संक्षेप में कहें, तो यह एक गंभीर घटना है, जो पहले से ही बहुत कमजोर और अनिश्चित रूप से तैयार हो रही आबादी के लिए गंभीर है।" ये कैंप खचाखच भरा है और यहां काफी ज्यादा गंदगी भरी है। बांग्लादेश के रक्षा मंत्रालय की पिछले महीने जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2021 और दिसंबर 2022 के बीच रोहिंग्या शिविरों में आग लगने की 222 घटनाएं हुईं, जिनमें आगजनी के 60 मामले भी शामिल हैं।

मार्च 2021 में मारे गये थे 15 लोग
मार्च 2021 में, आग लगने से कम से कम 15 लोग मारे गए थे और करीब 50,000 लोग बस्ती में एक शिविर के माध्यम से एक बड़ी आग लगने के बाद विस्थापित हो गये थे। आपको बता दें, कि शरणार्थी शिविर में वे लोग रहते हैं, जो रोहिंग्या जातीय अल्पसंख्यक के खिलाफ एक सैन्य कार्रवाई के बाद म्यांमार से भाग गए थे। रोहिंग्या बड़े पैमाने पर बौद्ध म्यांमार में मुसलमान हैं, जहां उन्हें पीढ़ियों से उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। रोहिंग्या मुस्लिमों के ऊपर म्यांमार की सेना ने उस वक्त क्रूर कार्रवाई की थी, जब अगस्त 2017 में रोहिंग्या विद्रोही समूह ने कई पुलिस चौकियों पर हमले किए थे और उसके बाद सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए रोहिंग्या मुसलमानों को देश से भगाना शुरू कर दिया था।

बांग्लादेश बता चुका है रोहिंग्या को बोझ
पिछले साल सितंबर महीने में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारत दौरे से पहले रोहिंग्या मुसलमानों को बांग्लादेश के ऊपर एक बोझ बताया था। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा था, कि रोहिंग्या प्रवासी बांग्लादेश पर एक "बड़ा बोझ" हैं और बांग्लादेश इस समस्या के समधान के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय तक अपनी बात पहुंचा रहा है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे अपनी मातृभूमि में लौट सकें। उन्होंने कहा कि, उन्हें लगता है कि भारत इस मुद्दे को हल करने में एक प्रमुख भूमिका निभा सकता है। एनआई के साथ बातचीत में शेख हसीना ने कबूल किया, कि बांग्लादेश में लाखों रोहिंग्याओं की मौजूदगी ने उनके शासन के लिए चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। उन्होंने कहा कि, "आप जानते हैं, कि ये हमारे लिए यह एक बड़ा बोझ है। भारत एक विशाल देश है, जहां आप इन्हें समायोजित कर सकते हैं, लेकिन हमारे पास बहुत कुछ नहीं है। हमारे देश में... हमारे पास 11 लाख रोहिंग्या हैं, जो देश के लिए खतरा हैं।












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