UK General Election: ऋषि सुनक या कीर स्टारमर, किसका पलड़ा भारी? यूके में कल चुनाव, जानें सबकुछ
UK General Election 2024: मई महीने के अंत में जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर बारिश के बीच अचानक आम चुनाव की घोषणा की, तो हर कोई हैरान हो गया था और उसके बाद से ब्रिटेन में चुनाव अभियान तेज होने लगे, जिसमें राजनीतिक घोटाले और ऋषि सुनक सरकार की गलतियों पर विपक्ष बरस रहा है।
राजनीतिक विश्लेषक और सर्वेक्षण, इस बात का संकेत दे रहा है, कि यूके चुनाव एक ऐतिहासिक चुनाव होने वाला है, जिसमें मुख्य विपक्षी पार्टी लेबर, कंजरवेटिव पार्टी को सत्ता से बेदखल करने की तरफ आगे बढ़ रही है। कंजर्वेटिव पार्टी, जो पिछले 14 सालों से सत्ता में है, उसके खिलाफ एक तरह का गुस्सा यूके में एहसास किया जा रहा है।

कल यानि गुरुवार को सब कुछ तय हो जाएगा, जब ब्रिटिश मतदाता 2024 के आम चुनाव में अपने मत डालने के लिए देश भर के मतदान केंद्रों पर जाएंगे।
ब्रिटेन में कैसे चुनाव होते हैं, कौन कौन से मुद्दे इस बार अहम हो गये हैं, कौन कौन से बड़े नेता मैदान में हैं, हम अपनी इस रिपोर्ट में समझने की कोशिश करते हैं।
यूके में आम चुनाव कैसे होते हैं?
यूके में अमूमन चुनाव गुरुवार को ही करवाए जाते हैं और इस बार भी चुनाव का दिन गुरुवार को ही रखा गया है। 4 जुलाई को स्थानीय समय के मुताबिक, सुबह 7 बजे से मतदान की प्रकिया शुरू हो जाएगी, जो रात 10 बजे तक जारी रहेगी।
यूनाइटेड किंगडम में 650 संसदीय सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे, जिसमें रजिस्टर्ड मतदाता अपने पसंदीदा उम्मीदवार के लिए मतदान केंद्रों पर मतदान करेंगे, जो आमतौर पर स्कूलों या सामुदायिक केंद्रों में स्थापित किए जाते हैं। यूके चुनाव बहुत हद तक भारत में होने वाले आम चुनाव की तरह ही होते हैं।
यूके में फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (FPTP) चुनाव प्रणाली का उपयोग किया जाता है, जो मतदान के लिए लागू एक पुरानी रेसिंग रूपक है, जिसमें सबसे ज्यादा वोट पाने वाला उम्मीदवार, उस निर्वाचन क्षेत्र के लिए संसद सदस्य (MP) बन जाता है, भले ही उसे डाले गए वोटों का 50 प्रतिशत प्राप्त हुआ हो या नहीं। यानि, भारत की ही तरह, जिस उम्मीदवार को सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं, वो विजयी ठहराया जाता है, भले ही उसे 20 प्रतिशत वोट मिले, 30 प्रतिशत मिले, या 40 या 50 या 60 प्रतिशत।
यूके में मतदान खत्म होने के बाद, मतों की गिनती की जाएगी और प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र (प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में संसद की एक सीट होती है) में सबसे ज्यादा मत प्राप्त करने वाले सांसदों को 5 जुलाई की सुबह तक विजेता घोषित कर दिया जाएगा।
यदि कोई पार्टी बहुमत प्राप्त करती है, जैसा कि इस बार लेबर पार्टी को बहुमत मिलने की संभावना है, तो उसका नेता प्रधानमंत्री बन जाता है, और दूसरे सबसे ज्यादा सांसदों वाली पार्टी का नेता, आम तौर पर विपक्ष का नेता बन जाता है। कीर स्टारमर लेबर पार्टी के नेता हैं, जबकि ऋषि सुनक चुनाव में कंजर्वेटिव पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं।
यदि कोई भी पार्टी बहुमत प्राप्त नहीं करती है, तो भारत की तरह ही पार्टियों के पास गठबंधन बनाने का विकल्प खुला रहता है।

ऋषि सुनक ने अचानक इलेक्शन 4 जुलाई को क्यों कराए?
भारत की तरह ही यूके में भी हर पांच सालों के अंतराल पर चुनाव होते हैं। पिछला आम चुनाव दिसंबर 2019 में हुआ था, जिसका मतलब था, कि पीएम ऋषि सुनक के पास चुनाव की घोषणा करने के लिए दिसंबर तक का समय था। लेकिन, प्रधानमंत्री ने 22 मई को अचानक चुनाव की घोषणा करके देश को आश्चर्यचकित कर दिया।
स्ट्रैथक्लाइड विश्वविद्यालय में राजनीति के प्रोफेसर जॉन कर्टिस का कहना है, कि यह फैसला ऋषि सुनक के करीबी लोगों के अलावा किसी के लिए भी "पूरी तरह रहस्य" बना हुआ है। कर्टिस ने कहा, कि कई "अटकलें" चल रही हैं, जिसमें यह विचार भी शामिल है, कि कंजर्वेटिवों को लगा होगा, कि इस साल के अंत कर अर्थव्यवस्था में सुधार की संभावना नहीं है।
इसके अलावाल, एक और संभावना यह थी, कि सत्तारूढ़ कंजर्वेटिव पार्टी इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं थी, कि वे रिकॉर्ड संख्या में शरणार्थियों को इंग्लिश चैनल पार करने से रोक पाएंगे, जो दक्षिणी इंग्लैंड को उत्तरी फ्रांस से अलग करता है। कंजर्वेटिवों ने अनियमित प्रवासन को रोकने के लिए कई वादे किए हैं, जिनमें कुछ शरणार्थियों को रवांडा भेजने की अत्यधिक विवादास्पद योजना भी शामिल है।
सर्वे में ऋषि सुनक की कंजर्वेटिव पार्टी क्यों हार रही है?
2019 में प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने के साथ साथ कंजर्वेटिव पार्टी से लोगों का भरोसा टूटने लगा और तब सेपार्टी "विश्वास और क्षमता" के मुद्दों से जूझ रही है। कोविड-19 महामारी से जुड़ा एक घोटाला, जिसे "पार्टीगेट" के रूप में जाना जाता है, उसने सरकार में जनता के विश्वास को हिला दिया है और इस मुद्दे ने 2022 में बोरिस जॉनसन को प्रधान मंत्री के रूप में इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया। बोरिस जॉनसन पर अपने जन्मदिन की पार्टी पर शराब पार्टी करने का आरोप लगा था, जब ब्रिटेन सख्त लॉकडाउन से गुजर रहा था।
बोरिस जॉनसन के इस्तीफे के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच हुई वोटिंग में ऋषि सुनक को हराकर लिज ट्रस यूके की प्रधानमंत्री बनीं, लेकिन वो सरकार का काम संभालने में बुरी तरह से नाकाम हो गईं। उनके 6 हफ्ते के कार्यकाल में ब्रिटिश बाजार अस्तव्यस्त हो गया और शेयर बाजार बुरी तरह से नीचे गिर गई। जिससे घबराकर उन्होंने इस्तीफा दे दिया और फिर ऋषि सुनक को अगला प्रधानमंत्री बनाया गया।
ऋषि सुनक ने बेकाबू हो रही स्थिति पर काबू तो पा लिया, लेकिन महंगाई के मुद्दे को संबोधित करने में वो काफी हद तक फेल हो चुके हैं। वहीं, पार्टी के अंदर भी फूट रोकने में वो नाकाम रहे हैं। लेकिन, उनके लिए एक साल के अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल में उन वादों को पूरा करना मुश्किल था, जो वादे बोरिस जॉनसन को प्रधानमंत्री बनाने से पहले कंरंजवेटिव पार्टी ने लोगों से किए थे।
रिफॉर्म यूके कौन सी राजनीतिक पार्टी है, इसका क्या असर है?
लोकलुभावन नेता निगेल फरेज के नेतृत्व वाली रिफॉर्म यूके ने 2019 के आम चुनावों में ब्रेक्सिट पार्टी के रूप में भाग लिया था, लेकिन कंजर्वेटिव के कब्जे वाले निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव नहीं लड़ा था। हालांकि, उस वक्त कोई भी सीट नहीं जीत पाई थी, लेकिन नवीनतम सर्वेक्षणों के अनुसार, इस वर्ष रीब्रांडेड पार्टी दूसरे स्थान के लिए कंजर्वेटिव पार्टी को चुनौती दे रही है।
निगेल फरेज के उग्र चुनावी अभियान, जिसमें आव्रजन पर केंद्रित कट्टरपंथ की लहर देखी गई है, उसने उनकी पार्टी को रणनीतिक मजबूती दी है। ब्रिटिश राजनीतिक एक्सपर्ट कर्टिस ने कहा, कि फरेज, एक "करिश्माई और स्पष्टवादी" नेता की इमेज बनाने में कामयाब रहे हैं।

यूके चुनाव में कौन बन सकता है विजेता?
नवीनतम सर्वेक्षणों के मुताबिक, लेबर पार्टी बहुमत से सरकार का गठन करने जा रही है। लेबर पार्टी भारी बहुमत से जीत हासिल करने की तरफ बढ़ रही है, जिससे 14 साल के कंजर्वेटिव शासन का अंत हो जाएगा। जनमत सर्वेक्षणों में 20 अंकों का अंतर दोनों पार्टियों में देखा गया है। कुछ जनमत सर्वेक्षणों ने भविष्यवाणी की है, कि लेबर पार्टी के कीर स्टारमर, टोनी ब्लेयर की तुलना में ज्यादा जीत के अंतर से ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर सकते हैं, जिनके नेतृत्व में लेबर ने 1997 में 418 सीटें जीती थीं।
कब आएंगे नतीजे?
यूके आम चुनाव 2024 के नतीजे स्थानीय समय के मुताबिक रात 10 बजे (भारतीय समयानुसार सुबह 2:30 बजे) से आने शुरू हो जाएंगे, और ज्यादातर निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजे शुक्रवार की सुबह तक आने की उम्मीद है। सरकार बनाने के लिए किसी पार्टी को हाउस ऑफ कॉमन्स में 326 सीटों के बहुमत की आवश्यकता होती है। ब्लीथ और एशिंगटन के रात 11:30 बजे के अनुमानित समय पर नतीजे घोषित करने वाला पहला निर्वाचन क्षेत्र होने की उम्मीद है, उसके बाद बेसिलडन और बिलरिके का स्थान है।
अनुमान है कि अंतिम नतीजे शुक्रवार को सुबह 6 से 7 बजे (भारतीय समयानुसार सुबह 10:30 से 11:30 बजे) के बीच आ जाएंगे। मतपत्रों की गिनती या पुनर्गणना में देरी जैसे मुद्दों से समय प्रभावित हो सकता है। शुक्रवार दोपहर तक (भारत में), हम ब्रिटिश संसद की सभी 650 सीटों के नतीजों की उम्मीद कर सकते हैं।
मुख्य पार्टियां कौन-कौन सी हैं?
ऋषि सुनक के नेतृत्व वाली कंजर्वेटिव पार्टी, जिसे टोरीज के नाम से भी जाना जाता है, उसका मुकाबला यूके चुनाव में परंपरा के अनुसार, स्टारमर के नेतृत्व वाली लेबर पार्टी से है। इसके अलावा, स्कॉटिश नेशनल पार्टी, जो स्कॉटिश स्वतंत्रता के लिए अभियान चलाती है, लिबरल डेमोक्रेट्स; और डेमोक्रेटिक यूनियनिस्ट पार्टी, जो ब्रिटेन और उत्तरी आयरलैंड के बीच संबंधों को बनाए रखना चाहती है, वो वर्तमान में संसद में तीन सबसे बड़ी पार्टियां हैं।
लेकिन, कंजर्वेटिव पार्टी के वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी रिफॉर्म यूके कर सकती है। हालांकि, ये ज्यादा सीटें तो नहीं जीतेंगे, लेकिन ये कंजर्वेटिव पार्टी को काफी नुकसान पहुंचा सकती है। इसके अलावा, पर्यावरणवादी ग्रीन पार्टी भी बड़ी पार्टियों के असंतुष्ट मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश करेगी।
सभी की निगाहें रिचमंड और नॉर्थलेर्टन सीट पर होंगी, जहां से ऋषि सुनक चुनाव लड़ रहे हैं। पूर्वानुमानों में कहा गया है, कि वह लेबर पार्टी के टॉम विल्सन से अपनी सीट हार सकते हैं, साथ ही रिफॉर्म यूके के ली टेलर और ग्रीन पार्टी के केविन फोस्टर जैसे अन्य उम्मीदवार भी उन्हें चुनौती दे रहे हैं। नतीजे सुबह 4 बजे (स्थानीय समय) तक घोषित होने की उम्मीद है।
लगभग 15 मिनट बाद, होलबोर्न और सेंट पैनक्रास में परिणाम घोषित किए जाएंगे, जहां कीर स्टारमर कंजर्वेटिव पार्टी की मेहरीन मलिक सहित 12 उम्मीदवारों के खिलाफ अपनी सीट बरकरार रखने की कोशिश करेंगे। आठवीं बार संसद की सीट के लिए चुनाव लड़ रहे निगेल फरेज के दक्षिण-पूर्वी इंग्लैंड के क्लैक्टन से जीतने की व्यापक उम्मीद है।
पूर्व लेबर नेता जेरेमी कॉर्बिन, जिन्हें 2020 में पार्टी के भीतर यहूदी-विरोधी भावना पर उनके रुख के कारण पार्टी से निकाल दिया गया था, उनके इस्लिंगटन नॉर्थ सीट से स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रहे हैं, जिस पर वे 1983 से काबिज हैं। लिबरल डेमोक्रेट्स के नेता एड डेवी और एसएनपी के जॉन स्विनी भी क्रमशः दक्षिणी इंग्लैंड और स्कॉटलैंड में जीत के साथ कंजर्वेटिव वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
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