Epstein Files में आया नाम तो कई देशों में 80+ ताकतवर लोगों को देना पड़े इस्तीफे, भारत में किस-किस का आया नाम?
Epstein Files: अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े नए दस्तावेज़ लगातार सामने आते जा रहे हैं, जिससे कई देशों में राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है। इन रिकॉर्ड्स में ईमेल, सोशल कॉन्टेक्ट, पैसों का लेन-देन, शारीरिक संबंधों की जानकारी, नाबालिग बच्चियों के साथ यौन हिंसा और निजी मुलाकातों का पूरा ब्योरा शामिल है। इन खुलासों के बाद कई प्रभावशाली और ताक़तवर लोगों के पुराने संबंधों पर सवाल उठने लगे हैं।
भारी दबाव के बाद शुरू हुए इस्तीफे
इन सभी लोगों पर जनता का दबाव इतना बढ़ गया है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में कई सीनियर अधिकारियों और नेताओं को इस्तीफ़ा देना पड़ा है। जबकि कई बिजनेसमेन इसकी चपेट में ऐसे आए कि जवाब देते नहीं बना। यह विवाद अब केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि यूरोप समेत 10 से 11 देशों तक फैल चुका है।

कई संस्थान अपनी साख और छवि को नुकसान से बचाने के लिए तुरंत सख़्त कदम उठा रहे हैं। खास बात यह है कि ज़्यादातर मामलों में इस्तीफ़े किसी अपराध के साबित होने की वजह से नहीं, बल्कि सिर्फ़ एपस्टीन के साथ पुराने संबंधों के सार्वजनिक हो जाने के कारण हुए हैं।
ब्रिटेन और नॉर्वे में हाई-प्रोफाइल इस्तीफ़े
इस विवाद का असर ब्रिटेन और नॉर्वे जैसे देशों में भी साफ़ तौर पर देखने को मिला है। ब्रिटेन में 3 अधिकारियों को पद छोड़ना पड़ा। पूर्व राजदूत पीटर मैंडेलसन, सलाहकार एडम पेरी और पीएम कीर स्टार्मर के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी ने इस्तीफा दिया।
इसके साथ ही नॉर्वे में भी एक बड़ा इस्तीफ़ा हुआ। विदेश मंत्रालय ने बताया कि सीनियर डिप्लोमेट जूल एपस्टीन से जुड़े संपर्कों को लेकर हुई फैसलों में बड़ी गलती के कारण पद छोड़ देंगी। 66 साल की मोना जूल पहले मंत्री रह चुकी हैं और उन्होंने इज़रायल, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राष्ट्र में नॉर्वे के राजदूत के रूप में भी काम किया है। उनके इस्तीफ़े को पूरे यूरोप में बढ़ते एपस्टीन विवाद का हिस्सा माना जा रहा है।
अमेरिका में भी लगातार इस्तीफ़ों का सिलसिला
एपस्टीन फाइलों का असर संयुक्त राज्य अमेरिका में भी साफ़ दिखा है, जहां कई बड़े और सीनियर अधिकारियों को पद छोड़ना पड़ा है। फरवरी 2026 में, ब्रैड कार्प ने एक प्रमुख लॉ फर्म के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया। ऐसा तब हुआ जब एपस्टीन से संपर्क दिखाने वाले ईमेल सार्वजनिक हुए। इससे पहले, नवंबर 2025 में पूर्व अमेरिकी ट्रेजरी सचिव लैरी समर्स ने एक अहम बोर्ड पद से इस्तीफ़ा दिया। उन्होंने यह स्वीकार किया कि एपस्टीन के संपर्क में रहना एक गंभीर गलती थी।
इसके बाद दिसंबर 2025 में एफबीआई के उप-निदेशक डैन बोंगिनो ने भी इस विवाद के बीच अपना पद छोड़ दिया। हालांकि उनके मामले में एपस्टीन से कोई सीधा संबंध साबित नहीं हुआ था, लेकिन एपस्टीन फाइलों से जुड़े लगातार बढ़ते दबाव के चलते उनका इस्तीफ़ा हुआ।
यूरोप के अन्य देशों में भी बढ़ा दबाव
यूरोप के कई अन्य देशों में भी एपस्टीन से जुड़े खुलासों का असर महसूस किया गया है। फ़्रांस में, पूर्व मंत्री जैक लैंग ने एक सांस्कृतिक संस्था के प्रमुख पद से इस्तीफ़ा दे दिया। स्लोवाकिया में, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मिरोस्लाव लाजाक ने ईमेल से जुड़े विवाद के बाद अपना पद छोड़ दिया। स्वीडन में भी एपस्टीन के आइलैंड से कथित संबंधों के आरोप लगने के बाद एक सीनियर डिप्लोमेट जोआना रुबिनस्टीन को इस्तीफ़ा देना पड़ा।
सबसे अहम बात यह है कि इन सभी मामलों में इस्तीफ़े किसी अपराध के साबित होने के बाद नहीं हुए। कई मामलों में सिर्फ़ पुराने संपर्कों के सार्वजनिक होने से ही भारी जनआक्रोश फैल गया। इस दबाव के चलते अधिकारियों ने अपनी संस्थाओं की विश्वसनीयता और भरोसा बनाए रखने के लिए पद छोड़ना बेहतर समझा।
कई भारतीय दिग्गजों के नाम उछले
एपस्टीन के एक मेल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम आने से कांग्रेस ने काफी हंगामा मचाया लेकिन जैसे विदेश मंत्रालय ने इसके बकवास करार दिया उसके बाद मामला शांत हो गया। इसके अलावा बिजनेसमेन अनिल अंबानी, फिल्म डायरेक्ट अनुराग कश्यप, मीरा नायर, दीपक चौपड़ा, नंदिता दास समेत कई हस्तियों का नाम आया है। हालांकि ज्यादातर ने आरोपों को गलत बताया है। इसके अलावा भारत से अभी तक किसी भी शख्स ने अपने किसी पद से एपस्टीन फाइल्स में नाम आने के कारण इस्तीफा नहीं दिया है।
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